एक्सप्लेनर्स

क्या ममता बनर्जी INDIA से तोड़ लेंगी नाता? खुद दिया जवाब, समझें सीट बंटवारे का सारा गणित

Congress Vs TMC: क्या ममता बनर्जी विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA में बनी रहेंगी या अगर सीटों पर बात नहीं बनी तो इससे नाता तोड़ लेंगी? उन्होंने खुद इस सवाल का जवाब दिया है। कांग्रेस और टीएमसी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद कई सारे कयास लगाए जा रहे हैं। समझिए सियासी समीकरण।

Image

चुनाव से पहले बंगाल में होने वाला है खेला?

Photo : Times Now Digital

Lok Sabha Chunav News: आगामी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर ममता बनर्जी का आखिर क्या प्लान है? इस सवाल का जवाब हर कोई तलाश रहा है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पश्चिम बंगाल के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी बार-बार टीएमसी और ममता के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं। ऐसे में अगर ममता बनर्जी विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA से दूरी बना लेती हैं, तो इसमें कोई खास हैरानी की बात नहीं होगी।

कभी भी उल्टा दांव चल सकती हैं ममता दीदी

पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी का एकतरफा जलवा देखने को मिलता है। तमाम कोशिशों के बाद भी राज्य की सत्ता से टीएमसी को उखाड़ फेंकने में भाजपा कामयाब नहीं हो पाई थी। ममता के सियासी रसूख और ताकत से हर कोई परिचित है, ऐसे में यदि उन्होंने विपक्षी गठबंधन का साथ छोड़ा तो INDIA के लिए ये किसी बड़े सदमे से कम नहीं होगा। हालांकि फिलहाल ममता इस मूड में नजर नहीं आ रही हैं कि गठबंधन को गच्चा दिया जाए, हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि ममता दीदी कभी भी उल्टा दांव चलने में माहिर हैं।

गठबंधन को लेकर क्या बोल रही हैं ममता बनर्जी?

अधीर रंजन की बेलगाम जुबान के चलते शायद कांग्रेस पार्टी को ममता बनर्जी अपना शत्रु समझने पर मजबूत हो सकती हैं। बीते कई दिनों से ये चर्चा हो रही है कि क्या अब ममता दीदी INDIA से अलग राह अपनाने पर विचार कर रही हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुद इस बात पर जोर दिया कि उनकी पार्टी केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ लड़ाई में विपक्ष के INDIA गठबंधन में बनी रहेगी।

सीट शेयरिंग को लेकर बिगड़ सकती है बात

ममता बनर्जी भले ही ये दावा कर रही हैं कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई में विपक्षी गठबंधन एकजुट रहेगी, हालांकि अगर सीट बंटवारे के दौरान टीएमसी के खाते अगर ममता के मनमाफिक सीटें नहीं आईं तो निश्चित है कि वो नाराज हो सकती हैं। ये भी हो सकता है कि ममता अकेले अपने दम पर चुनावी मैदान में हुंकार भरती नजरी आएं।

ममता ने कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला

ममता का यह बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल में सीट बंटवारे को लेकर उनकी पार्टी और कांग्रेस में विवाद की खबरें आ रही थीं। पार्टी की पश्चिमी मेदनीपुर जिले की इकाई की बंद कमरे में हुई बैठक में ममता बनर्जी ने अपने इस रुख से अवगत कराया।

बैठक में मौजूद रहे तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम जाहिर नहीं होने के अनुरोध के साथ बताया, 'हमारी पार्टी सुप्रीमो ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस ‘INDIA’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस) गठबंधन में बनी रहेगी। मुख्यमंत्री ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की आलोचना की लेकिन कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला।' माकपा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस 28 विपक्षी पार्टियों के ‘INDIA’ गठबंधन का हिस्सा हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल में माकपा और कांग्रेस का तृणमूल कांग्रेस व भाजपा के खिलाफ गठबंधन रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article