How is Vice President elected in India: जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति की चर्चा तेज है। नए उप-राष्ट्रपति का चुनाव जल्द से जल्द कराना होगा। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव जल्द से जल्द आयोजित किया जाएगा। रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करने का हकदार होगा। आइए समझते हैं कि भारत में नए उप-राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है और संविधान में इस पर क्या कहा गया है।
गैर-मौजूदगी में कर्तव्यों का निर्वहन कौन करेगा?
हालांकि, संविधान में इस पर कुछ नहीं कहा गया है कि उपराष्ट्रपति की मृत्यु या उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले त्यागपत्र देने की स्थिति में, या जब उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, तो उनके कर्तव्यों का निर्वहन कौन करेगा। उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उनका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद, वह तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक कि उनका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले।
भारत का उपराष्ट्रपति कौन बन सकता है?
- वह भारत का नागरिक होना चाहिए
- 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो
- राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए योग्य होना चाहिए
- भारत सरकार, राज्य सरकार या किसी अधीनस्थ स्थानीय प्राधिकरण के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो
कैसे होता है उप-राष्ट्रपति का चुनाव?
भारत का चुनाव आयोग उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल हस्तांतरणीय मतों द्वारा किया जाता है। ंउपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों लोकसभा (543 सदस्य) और राज्यसभा (245 सदस्य, जिसमें 12 मनोनीत शामिल) के सभी सांसद मिलकर करते हैं। इस दौरान कुल 788 सांसद वोट डालते हैं। हर सांसद का वोट बराबर मूल्य का होता है।
मतदान सिंगल ट्रांसफरेबल वोट यानी एकल हस्तांतरणीय मत ((STV)) प्रणाली का इस्तेमाल करके गुप्त मतदान के जरिए किया जाता है। यानी सांसद उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में क्रमबद्ध करते हैं। हर मतदाता को अपनी पहली पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे '1' अंकित करना होता है। फिर वे अपनी पसंद के क्रम में अन्य उम्मीदवारों के आगे '2', '3', '4' आदि लिख सकते हैं। संख्याएं अंकों में लिखनी होती है या तो भारतीय अंकों में रोमन अंकों में, या किसी भी भारतीय भाषा में, लेकिन यह शब्दों में नहीं होना चाहिए।
जीत के लिए कोटा हासिल करना जरूरी
चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को न्यूनतम वोटों की संख्या हासिल करनी होती है, जिसे कोटा कहा जाता है। कोटे की गणना इस प्रकार की जाती है: (कुल वैध वोट ÷ 2) + 1 (यानी कुल वोटों को 2 से भाग देते हैं और 1 जोड़ते हैं। जैसे कि अगर 787 सांसद वोट डालते हैं, तो कोटा होगा: (787÷2) + 1 = 394। किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 394 वोट चाहिए।
क्या है पूरी प्रक्रिया?
सबसे पहले हर उम्मीदवार के प्रथम वरीयता वाले मतों की गणना की जाती है। अगर किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटे के बराबर या उससे अधिक मत मिलते हैं, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। अगर कोई भी कोटे तक नहीं पहुंच पाता है, तो यह प्रक्रिया अगले दौर की मतगणना तक जारी रहती है।
अगर किसी को कोटा नहीं मिलता है तो क्या होता है?
- सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को चुनाव से हटा दिया जाता है।
- उनके सभी मतपत्रों की फिर से जांच की जाती है।
- अब हर मतपत्र पर अंकित अगली वरीयता के आधार पर शेष उम्मीदवारों को मत हस्तांतरित कर दिए जाते हैं।
- अगर कोई दूसरी वरीयता अंकित है, तो वोट उस उम्मीदवार को जाता है।
- अगर कोई दूसरी वरीयता अंकित नहीं है, तो वोट समाप्त मान लिया जाता है और आगे उसकी गणना नहीं की जाती है।
- अगर इस स्थानांतरण के बाद भी कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटे तक पहुँच जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
अगर फिर भी कोई निर्वाचित नहीं होता है तो?
सबसे कम मत पाने वाले अगले उम्मीदवार को हटा दिया जाता है। पिछले दौर में प्राप्त मतों सहित, उनके सभी मतपत्रों की अगली उपलब्ध वरीयता के लिए फिर से जांच की जाती है। अगर दूसरी वरीयता किसी ऐसे व्यक्ति की है जो पहले ही बाहर हो चुका है, तो वोट तीसरी वरीयता वाले उम्मीदवार को जाता है, और इसी तरह। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है, जब तक कि सबसे कम मत वाले उम्मीदवारों को हटाकर वोटों को स्थानांतरित नहीं कर दिया जाता, जब तक कि कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटे तक नहीं पहुंच जाता और निर्वाचित नहीं हो जाता।
कैसे होता है चुनाव परिणाम घोषित?
चुनाव संपन्न होने और मतों की गणना के बाद, निर्वाचन अधिकारी चुनाव परिणाम घोषित करता है। इसके बाद, वह केंद्र सरकार (विधि एवं न्याय मंत्रालय) और भारत निर्वाचन आयोग को परिणाम की सूचना देता है, और सरकार उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित व्यक्ति का नाम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करती है।
