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Share Market में जारी रहेगा बिकवाली का तूफान या मिलेगी राहत, क्या मिल रहे संकेत?

शेयर बाजार में फिलहाल बिकवाली का तूफान जारी है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में 1 ही दिन के कारोबार में निवेशकों के 1,05,208.954 करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं। क्या आज बाजार में बिकवाली थमेगी?

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शेयर बाजार में अब भी क्रूड का असर

Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई हफ्तों से जारी गिरावट के बीच आज थोड़ी राहत की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन बाजार का ट्रेंड अभी पूरी तरह बदलता नजर नहीं आ रहा। GIFT Nifty में मजबूती और Asian markets की तेजी से सोमवार को Sensex-Nifty की शुरुआत पॉजिटिव हो सकती है।

हालांकि, FII की भारी बिकवाली, महंगा क्रूड ऑयल (Crude Oil) और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बाजार के लिए अब भी बड़े खतरे बने हुए हैं। पिछले कारोबारी सत्र में Sensex 570.59 अंक टूटकर 71,909.70 पर और Nifty 198.50 अंक गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ था। इसके साथ Nifty की वीकली क्लोजिंग लगातार 8वें हफ्ते में नेगेटिव रही। अकेले सितंबर में Nifty करीब 6.1% टूटा है। दूसरी तरफ गोल्ड और सिल्वर में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। गोल्ड और सिल्वर एशियन सत्र की शुरुआत में 2 फीसदी से ऊपर उछल गए हैं।

आज मिल रहे गैप अप ओपनिंग के संकेत

आज शुरुआती संकेत बाजार के पक्ष में हैं। GIFT Nifty करीब 22,610-22,625 के आसपास कारोबार कर रहा था, जिससे घरेलू बाजार में गैप अप ओपनिंग (Gap-Up Opening) की उम्मीद है। एशियन मार्केट्स में भी US के जॉब डाटा में नरमी के बाद सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। जापान का Nikkei मजबूत रहा, जबकि अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए।

FII सेलिंग का प्रेशर अब भी कायम?

बाजार की सबसे बड़ी चिंता विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹45,537 करोड़ की बिकवाली की है। वहीं, दूसरी तरफ IPO मार्केट में करीब ₹9,676 करोड़ का विदेशी निवेश आया है। यानी विदेशी निवेशकों का पैसा पूरी तरह भारत से बाहर नहीं जा रहा, लेकिन इक्विटी सेगमेंट में सेलिंग प्रेशर काफी ज्यादा है। 1 अक्टूबर को भी FIIs ने करीब ₹9,484 करोड़ की नेट सेलिंग की, जबकि DIIs ने करीब ₹10,042 करोड़ की बायिंग करके बाजार को सहारा दिया।

Nifty के लिए 22,380 का लेवल अहम

शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स Nifty के टेक्निकल सेटअप में अब भी कमजोरी है। Nifty का 200 वीक एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) करीब 22,380 के आसपास है और पिछली वीकली क्लोजिंग इसी लॉन्ग टर्म सपोर्ट के ऊपर रही। इस लेवल के ऊपर टिकने पर टेक्निकल रिबाउंड और कंसोलिडेशन देखने केा मिल सकता है। लेकिन, अगर यह लेवल मजबूती से टूटता है, तो सेलिंग प्रेशर और बढ़ जाएगा। फिलहाल निफ्टी के लिए 22,600 के आसपास एक रेजिस्टेंस बना हुआ है। इसके बाद 22,800-23,000 का जोन अब रेजिस्टेंस बन गया है।

क्रूड ऑयल और RBI की चुनौती

बाजार के लिए क्रूड ऑयल अब भी बड़ी चिंता है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फिलहाल $100 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। महंगा तेल रुपये, महंगाई और कॉरपोरेट प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा RBI की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की बैठक भी इसी सप्ताह बाजार को दिशा देगी। फिलहाल, ज्यादातर अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी हो सकती है।

किन शेयर और सेक्टर में रहेगी हलचल?

आज IT sector में रिकवरी की कोशिश दिख सकती है, जबकि Metal stocks पर दबाव बना रह सकता है। IT में TCS खास फोकस में रहेगा, क्योंकि बेस्ट बाय (Best Buy) के India Global Capability Center ने TCS के साथ समझौता किया है। वहीं मेटल स्पेस में Hindalco corporate अपडेट के कारण चर्चा में है। इसके अलावा Banking और Financial stocks में भी स्टॉक स्पेसिफिक एक्शन रह सकता है। HDFC Bank में नए MD & CEO की नियुक्ति और Bajaj Finance के बड़े फंड जुटाने के प्लान के चलते दोनों शेयरों पर नजर रहेगी।

दूसरी तरफ Realty, Pharma और PSU/Railway stocks में भी हलचल देखने को मिल सकती है। DLF अपने Gurugram luxury project की करीब ₹1,985 करोड़ की बिक्री को लेकर फोकस में है, जबकि Aurobindo Pharma को USFDA अप्रूवल मिला है। RVNL और IREDA जैसे PSU Stocks में भी वोलैटिलिटी रह सकती है। Auto sector में Maruti Suzuki, M&M और Bajaj Auto पर sales और हालिया कमजोरी के बाद नजर रहेगी। कुल मिलाकर आज IT में राहत, Metal में दबाव और Banking-Financial तथा चुनिंदा PSU शेयरों में स्टॉक स्पेसिफिक मूवमेंट बाजार की दिशा तय कर सकता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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