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Explained: जंग के नए कायदों के साथ इजरायल की गर्म तासीर और तीखे तेवर

Israel Hamas War: इजरायल और फिलिस्तीन की जंग में दुनियाभर के सुन्नी बहुल देशों और इलाकों में हमास को लेकर कहीं ना कहीं हमदर्दी देखी गई है। इसकी बड़ी वजह साफ है, हमास की तरफ से जैसे भावुक वीडियो जारी किए जाने की मुहिम चलाई गई, वो फिलिस्तीन के समर्थन में लोगों को लामबंद करती हैं।

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हमास vs इजरायल

World News: चाणक्य नीति का मशहूर श्लोक है, अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्। आत्मतुल्यबलं शत्रु: विनयेन बलेन वा।। यानि पहले दुश्मनों को समझ फिर उस वार करो। अगर वो आपसे कई गुना ताकतवर है तो उसे उसी के बिसात पर मात दो। नीच शत्रु की सोच के उलट जाकर उसे ढ़ेर कर दो। अगर दुश्मन बराबरी का है तो उसे कूटनीति का इस्तेमाल कर शिकस्त दो। श्लोक के इस पैटर्न का इजरायल ने बखूबी इस्तेमाल अपनी जंगी नीतियों में किया है। 6 डे वॉर, ऑप्रेशन एन्तेबे, ऑप्रेशन डिफेंसिव शील्ड, ऑप्रेशन बेक्रिंग डॉन और ऑप्रेशन एबीरे हैलेव, तेल अवीव की रणनीतिक दक्षता को ज़ाहिर करते है।

दुश्मनों से घिरा रहा है इजरायल

चारों और दुश्मनों से फिरे इजरायल ने वजूद में आते ही 6 अरबी देशों के हमलों को नेस्तनाबूत किया। इसी जंग के दम पर उसने अपने दबदबे को मिडिल ईस्ट एशिया में कायम किया। उसके दुश्मनों की फेहरिस्त काफी लंबी है, हमास, हिजबुल्लाह, पॉपुलर फ्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ फ़िलिस्तीन और हूती ये तो ऑन रिकॉर्ड नॉन स्टेट एक्टर्स है। अगर दुश्मन मुल्कों की लिस्ट बनाई जाये तो ईरान, फिलिस्तीन और यमन का नाम सबसे ऊपर आयेगा। जरूरत और क्षमता के मुताबिक तेल अवीव ने सब पर जवाबी कार्रवाई की है।

Israel-Hamas War

गाजा की तस्वीर।

ढेर हुआ हमास का जंगी सिपहसालार

मौजूदा हालातों में हमास कमांडरों का बैकफुट पर आना और घनी आबादी वाले विस्थापित फिलिस्तीनियों के इलाके अल-मवासी पर इजरायली जंगी ड्रोन की कार्रवाई उसके बरकरार तीखे तेवरों को दिखाती है। वजूद और तासीर के मद्देनज़र तेल अवीव ने कई इलाकों में अमेरिकी लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया, वो भी उस इलाके में जिसे सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। कई सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि आधा टन के इन बमों ने विस्थापित फिलिस्तीन आबादी को नुकसान पहुंचाने के साथ पूरे इलाके के बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया। इसी फेहरिस्त में बीती 13 जुलाई को हमास का जंगी सिपहसालार मोहम्मद डेफ भी ढ़ेर कर दिया। इस मामले पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि हमास को अब इतिहास को पन्नों में दफन कर दिया जाएगा।

The war between Israel and the Palestinian militant group, which rules the Gaza Strip, erupted after Hamas fighters carried out a deadly attack on southern Israel on October 7.

इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध।

सोशल मीडिया पर मजबूत है, फिलिस्तीनी के नैरेटिव की तिलिस्मी दुनिया

इजरायली कार्रवाई के बावजूद दुनियाभर में फिलिस्तीनी नैरेटिव को खासा उभार मिला है। अमेरिका और भारत में इसकी साफ तस्वीर देखी जा चुकी है, जहां फिलिस्तीन के समर्थन में लामबंद होने की तस्वीरें सामने आयी हैं। दुनियाभर के सुन्नी बहुल इलाकों में कहीं ना कहीं हमास को लेकर हमदर्दी है। इसकी बड़ी वजह हमास की ओर से जारी भावुक वीडियो मुहिम है। जिसके लिए वो सोशल मीडिया का इस्तेमाल जमकर कर रहा है। इस पैंतरेबाज़ी का जवाब अक्सर तेल अवीव उनके आला लीडरशिप को निशाना बनाकर दे रहा है। हमास की सियासी विंग के बड़े चेहरे अब्देल अज़ीज़ अल-रंतिसी और शेख यासीन इजरायली हमले का शिकार बने। साल 2002 में IDF ने खुफिया मिशन के तहत हमास सैन्य कमांडर सलाह शेहादे और याह्या अय्याश को भी ढ़ेर कर दिया। जिसके बाद हमास को जंगी मैदान के साथ साथ सोशल मीडिया के मैदान में उतरने के लिए बेबस होना पड़ा, जिससे कि उसने खुद को दुनिया के सामने विक्टिम पेश किया। सिलसिलेवार तरीकों से देखा जाए तो हमास की कमर तेल अवीव ने उसकी आला लीडरशिप को निशाना बनाकर तोड़ी है।

बदला जवाबी कार्रवाई का पैटर्न

साल 2008 के बाद तेल अवीव के जंगी सरदारों ने अपनी कार्रवाईयों का रूख बदला। बदली नीति के तहत हमास पर नकेल कसने के लिए इजरायली सैनिक इरादतन तौर पर घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने लगे। इस पॉलिसी के चलते घायल, मरने वालों और विस्थापितों की तादाद में एकाएक उछाल आया। इन मामलों को जायज ठहराने के लिए हथियारबंद जंगी कार्रवाईयों से जुड़ी कानून में बदलाव लाए गए ताकि नई जंगी तरकीबों के साथ वो घुलमिले जान पड़े। मिसाल के तौर इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर इजरायली एजेंसियों के रडार पर किसी फिलिस्तीनी कमांडर की शिनाख्त हो गयी तो उसे मारने के लिए ऑप्रेशन के दौरान अगर 100 से ज्यादा आम लोगों की मौत हो जाती है तो ये जायज माना जाएगा। दूसरे लफ्जों में कहे तो दक्षिणपंथ यहूदी राष्ट्रवाद अपने वजूद के लिए सेना के हाथ ना बांधकर उसे कानूनी तरीके मुहैया करवाता है।

Israel-Hamas war

इजरायल-हमास युद्ध से लोगों का जीना मुहाल।

तलाशे जा रहे हैं कानूनी रास्ते

अल-मवासी पर हुए हमले का विश्लेषण किया जाए तो ऊपर कहीं बात बिल्कुल साफ हो जाती है। नेतन्याहू ये बात अच्छे से जानते थे कि जिस अमेरिकी लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया गया, उससे हमास के लोग कम और आम फिलिस्तीनी ज्यादा मारेंगे। बावजूद इसके नेतान्याहू ने सामूहिक निषेध (कॉलेट्रल डैमेज) को मंजूरी दी। अब एक बार फिर इजरायल की ओर से नए जंगी रिवाज़ों की बुनियाद रखी जा रही है, जल्द ही इस जायज ठहराने के लिए नए कानूनी रास्ते भी अख्तियार कर लिए जाएंगे। नेतन्याहू और उनकी हुकूमत अपने लोगों के बीच इस तरह की जवाबी कार्रवाई को वाज़िब ठहराने के रास्ते तलाश रही है। अगर वो इस काम में कामयाब हुई तो वाकई गाजा और हमास का नाम इतिहास की तारीखों में कहीं खो जाएगा।

इस लेख के लेखक राम अजोर जो स्वतंत्र पत्रकार एवं समसमायिक मामलों के विश्लेषक हैं।

Disclaimer: ये लेखक के निजी विचार हैं, टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हा author

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रक... और देखें

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