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क्या आरजेडी पर दबाव बनाने के लिए बिहार का दौरा कर रहे राहुल गांधी? सीट बंटवारे पर अभी फंसा है पेंच; समझिए सियासत

Bihar Politics: कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को बिहार की एकदिवसीय यात्रा पर हैं। बेगूसराय में वे 'पलायन रोको, नौकरी दो' यात्रा में शामिल होने के बाद पटना में भी एक कार्यक्रम में शामिल हुए। भाजपा और जेडीयू के नेताओं ने राहुल की इस यात्रा को लेकर बड़ा दावा किया है। जिसके बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या राहुल गांधी आरजेडी पर दबाव बनाने के लिए बिहार का दौरा कर रहे हैं?

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क्या राहुल गांधी अपने ही सहयोगी दल आरजेडी पर बना रहे दबाव?

Rahul Gandhi in Bihar: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है, तमाम सियासी पार्टियां अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। विपक्षी गठबंधन INDIA और सत्ताधारी NDA दोनों में शामिल दलों के बीच अब तक सीट बंटवारे को लेकर फैसला नहीं हो पाया है। चुनावी उठापटक के बीच सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय करने के लिए अब तक बातचीत का दौर भी शुरू नहीं हुआ है। कांग्रेस के सामने इस बार बड़ी चुनौती होगी कि वो अपनी सहयोगी राजद से मोलभाव करके कम से कम पिछले चुनाव जितनी सीट पा सके। इसी बीच राहुल गांधी बिहार के दौरे पर हैं।

क्या लालू यादव की राजद पर दवाब बनाने बिहार पहुंचे हैं राहुल गांधी?

राहुल गांधी क्या राजद पर दबाव बनाने के मकसद से बिहार का दौरा कर रहे हैं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि उनके विरोधी नेताओं ने इसे लेकर बड़ा दावा किया है। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों के महागठबंधन का सीट शेयरिंग फॉर्मूला अब तक सेट नहीं हो पाया है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस ने ज्यादा से ज्यादा सीटें अपने खाते में लाने की भरपूर कोशिश करेगी। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीट हैं। आपको बताते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में किस पार्टी ने कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा था और कितनी सीटों पर जीत हासिल की थी।

पिछले चुनाव में किसने कितनी सीटों पर लड़ा चुनाव, कितनी जीती?

पार्टीकितनी सीटों पर लड़ा चुनावकितनी सीटों पर मिली जीत
राष्ट्रीय जनता दल14475
भारतीय जनता पार्टी11074
जनता दल (यूनाइटेड)11543
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस7019
सीपीआई (एमएल)1912
विकासशील इंसान पार्टी114
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा74
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी62
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम)42
लोक जनशक्ति पार्टी1341
अन्य---7

दबाव बनाने के लिए राहुल कर रहे बिहार की यात्रा: शाहनवाज हुसैन

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को बिहार के एक दिवसीय दौरे पर हैं। इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जोरदार निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बिहार यात्रा से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने राहुल गांधी के 'पलायन रोको, नौकरी दो' यात्रा पर भाग लेने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें पता होना चाहिए कि लालू यादव के राज में, जिसमें कांग्रेस बराबर की भागीदार थी, तभी पलायन हुआ था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इससे बच नहीं सकती। हुसैन ने कहा कि राहुल गांधी इसलिए भी दौरा कर रहे हैं कि तेजस्वी यादव भाव नहीं दे रहे हैं। वे तेजस्वी यादव पर दबाव बनाने के लिए यह दौरा कर रहे हैं। पिछली बार कांग्रेस को 70 सीटें दी थीं।

'बिहार में कांग्रेस को सता रहा है जीरो पर आउट होने का डर'

शाहनवाज हुसैन ने राहुल गांधी के बेगूसराय दौरे पर कहा कि वहां तो बहुत तरक्की हुई है। वहां कारखाने हैं। वहां सिमरिया घाट जाकर कुछ समय गुजारें। उन्हें वहां समय गुजारना चाहिए, विकास देखना चाहिए। वैसे उनकी यात्रा से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। राहुल गांधी महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली हारने के बाद बिहार आ गए हैं। उन्हें डर है कि बिहार में जीरो पर कांग्रेस आउट नहीं हो जाए, इस कारण वे यात्रा कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी यात्रा से तेजस्वी यादव पर दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस तेजस्वी यादव को नेता मानने को भी तैयार नहीं है। दोनों दल के नेता अलग-अलग बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी यह तो बताए कि वह महागठबंधन में लड़ेगी या नहीं, या अकेले लड़ेगी। पहले कांग्रेस को यह तो बताना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बिहार में सोमवार को तीन कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी को जमकर सुनाई खरी-खोटी

इससे पहले, भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि पहले वे अपना पलायन तो बचा लें। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बिहार आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। वे आएं, घूमे और भ्रम फैलाएं। नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की सरकार है। 2005 के पहले का बिहार और 2005 के बाद के बिहार को देखें। यहां सड़कें बन गईं, गंगा नदी पर पुल बन गए, आठ लाख लोगों को नौकरी दे दी गई है, आगे भी चार लाख लोगों को नौकरी दी जाने वाली है। राहुल गांधी आए हैं, घूमें और जाएं, नौटंकी करें, भ्रम फैलाएं। उनको भगवा रंग से नफरत है, इसलिए सफेद रंग चुने हैं। वैसे उनके आने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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