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क्या बिखर जाएगा विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA? भविष्य पर उठने लगे सवाल; समझिए सारा गुणा-गणित

Internal War in Opposition Alliance: विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशलन डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस के भविष्य का क्या होगा? घटक दलों के बीच मतभेद सामने आने से विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। तो क्या इंडिया गठबंधन बिखरने वाला है? गठबंधन में शामिल दल खुद ही बार-बार ऐसे संकेत दे रहे हैं।

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विपक्षी गठबंधन का क्या होगा भविष्य?

Future of INDI Alliance: ‘इंडिया’ में शामिल कई सहयोगी दलों के बीच मतभेद सामने आने और कांग्रेस द्वारा गंभीर आत्मचिंतन के लिए आवाज उठने के साथ विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। टकराव का ताजा मुद्दा महाराष्ट्र से आया है, जहां समाजवादी पार्टी (सपा) ने शिवसेना (उबाठा) नेता द्वारा बाबरी मस्जिद के विध्वंस की प्रशंसा करने के बाद महा विकास आघाडी (एमवीए) छोड़ने की घोषणा की है। अदाणी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी ‘इंडिया’ के अन्य सहयोगियों के साथ नहीं दिखीं। संसद के अंदर और बाहर दोनों ही जगहों पर अन्य मुद्दों पर सहयोगी दलों के बीच मतभेद हैं।

गठबंधन के भीतर अपनी ताकत दिखाने लगी हैं पार्टियां

हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में कांग्रेस की चौंकाने वाली हार के बाद, अब पार्टियां गठबंधन के भीतर अपनी ताकत दिखाने लगी हैं। खराब चुनावी प्रदर्शन के बाद कांग्रेस को लेकर कुछ विपक्षी दलों का मानना है कि उसे आत्मचिंतन करना चाहिए और दूसरों के प्रति उदार होना चाहिए। सहयोगी दल विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस के ‘‘दबदबे’’ के खिलाफ भी बोल रहे हैं। साझेदारों के बीच मुद्दों पर असहमति के बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया है और संकेत दिया है कि अगर मौका मिला तो वह गठबंधन की कमान संभालेंगी।

कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हैं सभी की निगाहें

टीएमसी सुप्रीमो ने कहा है कि वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका जारी रखते हुए विपक्षी मोर्चे के नेतृत्व की दोहरी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। अब सभी की निगाहें कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि प्रमुख विपक्षी पार्टी अदाणी और किसानों के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर संसद में खुद को अलग-थलग पाती है जहां इसके कई सहयोगी इससे दूर रहते हैं। विपक्षी गठबंधन का गठन जून 2023 में लोकसभा चुनाव से पहले ‘‘भाजपा हटाओ, देश बचाओ’’ के नारे के साथ किया गया था। लेकिन इसके संस्थापकों में से एक, जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार ने आगे चलकर पाला बदल लिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से हाथ मिला लिया।

खड़गे को मुद्दों पर जवाब देने के लिए कहा

सपा के राज्यसभा सदस्य जावेद अली खान ने कहा कि उनकी पार्टी अभी भी ‘इंडिया’ गठबंधन में है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इस गुट के भीतर ‘‘मतभेद’’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं क्योंकि हम संस्थापकों में से थे। लेकिन गठबंधन के सहयोगियों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।’’ विपक्षी गठबंधन के भीतर हाल के घटनाक्रम पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे गठबंधन के अध्यक्ष हैं और उन्हें मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस को अपने सहयोगियों के प्रति अधिक उदार होना चाहिए और कुछ ‘‘गंभीर आत्मनिरीक्षण’’ करना चाहिए। राजा ने कहा, ‘‘कांग्रेस को गंभीरता से आत्मचिंतन करना होगा और इस बात पर विचार करना होगा कि विधानसभा चुनावों में सीटों का बंटवारा ठीक से क्यों नहीं किया गया, जहां उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।’’ उन्होंने कहा कि सभी दलों को एकजुट रहना होगा क्योंकि ‘इंडिया’ का गठन ‘‘भाजपा हटाओ, देश बचाओ’’ के नारे के साथ हुआ था और सभी को उस लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।

वामपंथी नेता ने हाल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस को अन्य दलों के प्रति उदार होना चाहिए और उनकी बात सुननी चाहिए।’’ जद(यू) नेता राजीव रंजन ने कहा कि इंडिया’ गठबंधन के हमेशा से बिखरने का खतरा रहा है। उन्होंने कहा कि अब यह केवल एक औपचारिकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनावों के दौरान सपा ने कांग्रेस के रुख पर हैरानी जतायी थी। सपा द्वारा एमवीए से बाहर निकलने की घोषणा के बाद जद(यू) नेता ने कहा, ‘‘यह गठबंधन केवल कागजों पर दिखाई देता था, लेकिन अब यह वहां भी नहीं रहेगा।’’

विपक्षी गठबंधन को ‘‘अवसरवादी’’ करार दिया

भाजपा नेता सी आर केसवन ने विपक्षी गठबंधन को ‘‘अवसरवादी’’ करार दिया और कहा, ‘‘इंडिया’ गठबंधन पाखंड का एक विभाजित घर है। उनके बीच कटु कलह, इसलिए है क्योंकि ‘इंडी’ गठबंधन को लगता है कि राहुल गांधी का असफल नेतृत्व चुनावों में उनकी बार-बार विफलता का कारण है। कलह अब खुले तौर पर सामने आ गई है।’’ बनर्जी की विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार होने संबंधी टिप्पणी पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि ‘इंडिया’ के सभी घटक दलों के नेता तय करेंगे कि उनका नेतृत्व कौन करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ममता बनर्जी भाजपा नीत राजग सरकार के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत स्तंभ हैं। विभिन्न नेता अपने-अपने राज्यों में आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे हैं।’’

महाराष्ट्र में एमवीए से सपा ने खुद को किया अलग

सपा नेता अबू आसिम आजमी ने कहा, ‘‘एमवीए ने कभी हमारा सम्मान नहीं किया...उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी ने कहा था कि वे सांप्रदायिकता छोड़ देंगे और धर्मनिरपेक्ष ताकतों से हाथ मिलाएंगे। हालांकि, उन्होंने और उनकी पार्टी ने एक बार फिर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने वालों का सम्मान किया है। समाजवादी पार्टी उन लोगों के साथ कभी नहीं रह सकती जो लोगों को धर्म के आधार पर बांटना चाहते हैं।’’ सपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख आजमी ने कहा, ‘‘हमें एमवीए की समन्वय बैठक के लिए कभी नहीं बुलाया गया। हम लोकसभा चुनावों की तरह समन्वय चाहते थे। लेकिन कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (एसपी) सीट बंटवारे को लेकर एक-दूसरे से लड़ते रहे। यही कारण है कि (महाराष्ट्र चुनाव) हम (एमवीए) हार गए।’’

पटना में ‘इंडिया’ की पहली बैठक नीतीश कुमार ने आयोजित की थी। उस समय, कई विपक्षी नेताओं ने अपने मतभेदों को स्वीकार करते हुए भाजपा को हराने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा और आवश्यकता व्यक्त की थी। खड़गे ने कहा था, ‘‘हमें हर राज्य के लिए अलग-अलग योजनाएं बनानी होंगी और केंद्र में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए मिलकर काम करना होगा।’’ पटना बैठक में करीब 17 राजनीतिक दलों के 32 से अधिक नेता शामिल हुए थे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था, ‘‘पटना बैठक से हम सभी के लिए संदेश स्पष्ट है कि हमें देश को बचाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।’’ हालांकि, कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ऐसी चीजें होती रहेंगी, लेकिन कोई भी विपक्षी गठबंधन बिना कांग्रेस की धुरी के काम नहीं कर सकता।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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