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स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से किसने दिया अब तक का सबसे लंबा और छोटा भाषण? पीएम मोदी ने बनाया नया कीर्तिमान

PM Modi Speech: क्या आप जानते हैं कि आजाद भारत के इतिहास में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किस प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया है? जवाब है- नरेंद्र दामोदरदास मोदी, उन्होंने एक बार फिर अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ा और इस बार भी स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अब तक का सबसे लंबा संबोधन दिया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थापित किया नया रिकॉर्ड।

Longest Speech From Red Fort: एक बार फिर पीएम मोदी ने खुद के द्वारा बनाए रिकॉर्ड को ही तोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2024 (बृहस्पतिवार) को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से 98 मिनट तक देश को संबोधित किया। इस प्रतिष्ठित स्मारक से मोदी का यह अब तक का सबसे लंबा संबोधन रहा। स्वतंत्रता दिवस पर मोदी के संबोधन अन्य प्रधानमंत्रियों के संबोधनों की तुलना में लंबे रहे हैं।

पीएम मोदी ने 2016 में स्थापित किया था कीर्तिमान

आज से पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह में उनका सबसे लंबा संबोधन 2016 में 96 मिनट का था, जबकि उनका सबसे छोटा संबोधन 2017 में था जब वह लगभग 56 मिनट बोले थे। 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने लगातार 11वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। अपने तीसरे कार्यकाल के पहले संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया। मनमोहन सिंह ने 2004 से 2014 के दौरान लाल किले की प्राचीर से 10 बार तिरंगा फहराया था। इस मामले में मोदी पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। नेहरू को यह सम्मान 17 बार और इंदिरा को 16 बार मिला था।

पीएम मोदी ने कब कितना लंबा भाषण दिया?

क्रमांकवर्षभारत का समय
1201465 मिनट
2201588 मिनट
3201696 मिनट
4201756 मिनट
5201883 मिनट
6201992 मिनट
7202090 मिनट
8202188 मिनट
9202274 मिनट
10202390 मिनट
11202498 मिनट

पीएम मोदी ने 2017 में दिया था सबसे छोटा भाषण

पहली बार देश की बागडोर संभालने के बाद मोदी ने 2014 में, लाल किले से पहली बार 65 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया था। साल 2015 में उनका संबोधन करीब 88 मिनट का था। साल 2018 में, मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 83 मिनट तक देश को संबोधित किया। इसके बाद, 2019 में, उन्होंने लगभग 92 मिनट तक बात की, जो उनका अब तक का दूसरा सबसे लंबा भाषण था। साल 2020 में मोदी का स्वतंत्रता दिवस संबोधन 90 मिनट का था। वर्ष 2021 में उनका स्वतंत्रता दिवस संबोधन 88 मिनट का और 2022 में 74 मिनट का रहा। पिछले साल यानी 2023 में मोदी का संबोधन 90 मिनट का था।

मोदी से पहले लाल किले से किसने दिया था सबसे लंबा भाषण?

वर्षप्रधानमंत्रीभाषण का समय
1947जवाहरलाल नेहरू72 मिनट
1997इंद्रकुमार गुजराल71 मिनट

लाल किले से अब तक का सबसे छोटा भाषण किसने दिया?

वर्षप्रधानमंत्रीभाषण का समय
1954जवाहरलाल नेहरू14 मिनट
1966इंदिरा गांधी14 मिनट
2002अटल बिहारी वाजपेयी25 मिनट
2003अटल बिहारी वाजपेयी30 मिनट
2012मनमोहन सिंह32 मिनट
2013मनमोहन सिंह35 मिनट
मोदी से पहले 1947 में जवाहरलाल नेहरू और 1997 में इंद्रकुमार गुजराल ने सबसे लंबा संबोधन दिया था, जो क्रमश: 72 मिनट और 71 मिनट का था। नेहरू और इंदिरा ने 1954 और 1966 में 14-14 मिनट का सबसे छोटा संबोधन दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के कुछ सबसे छोटे संबोधन दिए। साल 2012 और 2013 में सिंह के संबोधन क्रमशः केवल 32 और 35 मिनट के थे। 2002 और 2003 में वाजपेयी के भाषण क्रमश: 25 और 30 मिनट के थे।
Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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