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Explained: अगर गलती से कोई सैनिक चला जाए पाकिस्तान या पाक से आ जाए भारत, तो कैसे होती है रिहाई

Explained: बीएसएफ का एक जवान कुछ दिनों पहले किसानों की सुरक्षा के लिए सीमा के पास गया था, इसके बाद वो गलती से सीमापार कर गया, जहां उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया। अभी तक बीएसएफ के जवान की रिहाई नहीं हुई। आइए जानते हैं कि गलती से सीमापार कर गए जवानों की रिहाई कैसे होती है, रिहाई के लिए क्या नियम हैं?

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गलती से सीमापार गए जवानों की रिहाई कैसे होती है

Explained: पहलगाम आतंकी हमले के बाद बीएसएफ का एक जवान, गलती से पाकिस्तान की सीमा में चला गया। जिसे तुरंत पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया और अभी तक रिहा नहीं किया है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान में हुआ, जब पाकिस्तान का एक रेंजर भारत की सीमा में घुसते हुए पकड़ा गया। अब भारत उसे नहीं छोड़ रहा है। अब सवाल ये है कि अगर कोई जवान गलती से भारत से पाकिस्तान की सीमा में या पाकिस्तान से भारत की सीमा में आ जाता है तो वो रिहा हो सकता है या नहीं, अपने देश जा सकता है या नहीं? गलती से सीमा पार गए जवानों को रिहा करना कितना मुश्किल है, रिहाई की प्रक्रिया क्या है, आइए समझते हैं।

रिहाई कैसे, माहौल पर निर्भर

भारत-पाकिस्तान की सीमा पर आमतौर पर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब गलती से कोई जवान बॉर्डर क्रॉस कर गया हो। अगर सीमा पर तनाव नहीं है, जंग नहीं तो इनकी रिहाई आसान रही है। आम तौर पर सेना के अधिकारी ही ऐसे मामलों को सुलझा लेते हैं। लेकिन तनाव या जंग में यह आसान नहीं है। जंग में तो रिहाई में सालों लग जाते हैं और कभी-कभी तो वापसी भी नहीं होती है, सीमा पर तनाव के दौरान भी ऐसा ही होता है।

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पाकिस्तान के कब्जे में BSF का एक जवान

सीमापार कर गए जवानों की रिहाई कैसे

अगर भारतीय जवान गलती से सीमा पार कर जाते हैं, तो उनकी रिहाई एक संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत, सैन्य संपर्क और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान कई तरह के तरीके अपनाए जाते हैं।

1. संपर्क और जानकारी का आदान-प्रदान

  • सबसे पहले, उस देश के अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, जिसमें जवान गए होते हैं। आमतौर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) या भारतीय सेना के अधिकारियों से कूटनीतिक चैनल के जरिए जानकारी साझा की जाती है। इसके बाद, दूसरे देश के अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, ताकि यह पुष्टि हो सके कि जवान गलती से सीमा पार किए हैं।

2. कूटनीतिक और सैन्य वार्ता

  • दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत शुरू होती है। इस बातचीत में यह सुनिश्चित किया जाता है कि घटना गलती से हुई थी या जानबूझकर। इस स्तर पर दोनों देशों के सैन्य अधिकारी और विदेश मंत्रालय शामिल हो सकते हैं।

3. दूसरे देश का निर्णय

  • वह देश, जिसमें जवान पकड़े गए हैं, उनकी रिहाई के बारे में निर्णय लेता है। कई बार, सीमा पार करने वाले जवानों को जमानत पर छोड़ा जा सकता है या फिर कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत उनका प्रत्यर्पण किया जाता है।

4. रिहाई की प्रक्रिया

  • रिहाई के बाद, जवानों को उनके देश के अधिकारियों के हवाले कर दिया जाता है। यदि मामला सुलझा लिया जाता है, तो जवानों को उनके देश वापस भेजा जाता है। कभी-कभी, यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच एक समझौते या कूटनीतिक समाधान के रूप में होती है।

5. कानूनी और सैनिक पहलू

  • अंतरराष्ट्रीय कानून और सैन्य संधियों के तहत, यदि कोई जवान गलती से सीमा पार करता है, तो उसके खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जाती। इस मामले में दोनों देशों के बीच संवाद और समझौते की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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बीएसएफ ने भी एक पाकिस्तानी रेंजर को पकड़ा

भारत के पास पाक रेंजर तो पाक के पास बीएसएफ का जवान

राजस्थान के श्रीगंगानगर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ ने शनिवार को रायसिंह नगर के पास एक पाकिस्तानी रेंजर को घुसपैठ के प्रयास के दौरान गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई उस समय की गई, जब पाकिस्तानी रेंजर भारतीय सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। बीएसएफ के जवान सीमा पर गश्त कर रहे थे, तभी उन्होंने संदिग्ध गतिविधि देखी। सतर्क जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी रेंजर को पकड़ लिया। गिरफ्तार रेंजर से बीएसएफ के अधिकारी गहन पूछताछ कर रहे हैं, ताकि उसके इरादों का पता लगाया जा सके। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रेंजर का मकसद जासूसी था या कोई अन्य गतिविधि। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में एक बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ गलती से सीमा पार करने के बाद पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में है। शॉ के मामले में बीएसएफ ने पाकिस्तान के साथ कई दौर की बातचीत की, लेकिन अभी तक उनकी रिहाई नहीं हो सकी है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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