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भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को कितना नुकसान? अफगान नेता ने एक-एक कर गिना दिया, इस्लामिक वर्ल्ड में भी कद हुआ और छोटा

भारत पाकिस्तान के बीच सीजफायर समझौता हो चुका है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर जिस तरह से भारत ने पलटवार किया, आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, सैन्य ठिकानों पर हमला बोला, उससे पाकिस्तान में आज भी खौफ है, इसी डर ने पाकिस्तान को सीजफायर की गुहार लगाने के लिए मजबूर कर दिया।

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अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने पाकिस्तान की खोली पोल

पहलगाम आतंकी हमले का बदला जिस तरह से भारत ने लिया है, उसके निशान पाकिस्तान पर सालों तक रहने वाले हैं। सीजफायर भले ही हो गया हो, लेकिन वास्तविकता है कि पाकिस्तान हर क्षेत्र में हारा है। कहने के लिए तो पाकिस्तान परमाणु मुल्क है, लेकिन दुनिया ने देख लिया कि कैसे भारत ने उसके एयर डिफेंस को चकमा देकर न सिर्फ पाकिस्तान में घुसा बल्कि उन आतंकी ठिकानों को उड़ा दिया, जहां वो रहते थे, ट्रेनिंग होती थी। बाद में हुए पलटवार में भारत ने पाकिस्तान के अति सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य ठिकानों को उड़ा दिया, एयरबेस को उड़ा दिया, एयर डिफेंस सिस्टम तबाह कर दिया। अब दुनिया भर से पाकिस्तान के नुकसान पर प्रतिक्रिया आने लगी है। पाकिस्तान के कभी खास रहे अफगानिस्तान में भी पाकिस्तान के नुकसान के जमकर चर्चे हैं। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमलरुल्लाह सालेह ने तो एक-एक नुकसान को गिना दिया।

पाकिस्तान पर जमकर परसे अमलरुल्लाह सालेह

अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमलरुल्लाह सालेह ने पाक में हुए भारत के हमले से नुकसान के बारे में तो बताया ही साथ ही उन्होंने इस्लामिक दुनिया में पाकिस्तान के कद और घटने का भी दावा कर दिया है। इसके लिए उन्होंने इस्लामिक फतवे का भी जिक्र किया। अमलरुल्लाह सालेह ने एक दो प्वाइंट में नहीं बल्कि सात प्वाइंट में समझा दिया कि पाकिस्तान को कैसे और कहां नुकसान हुआ है और भारत को कैसे फायदा हुआ है।

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता और अप्रासंगिकता को समझते हुए, भारत ने 1945 के स्थायी सदस्यों से सहानुभूति की अपेक्षा नहीं की। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत के आत्मविश्वास, रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता की स्पष्ट एवं सशक्त अभिव्यक्ति की।
  2. भारत ने पहली बार यह स्पष्ट किया कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों के बीच कोई भेद नहीं किया जाएगा — दोनों समान रूप से निशाने पर होंगे। यह मिथक भी टूटा कि केवल कुछ ‘दुष्ट’ पाकिस्तानी अधिकारी ही इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार हैं; अब पूरा ढांचा संदेह के घेरे में है। यह सुरक्षा नीति में एक नया दृष्टिकोण है।
  3. जब एक ओर स्ट्राइक जारी थी और जंग की तैयारी हो रही थी, तब पाकिस्तान ने IMF से ऋण के लिए बातचीत की, जिसे अप्रत्याशित रूप से स्वीकृति मिल गई। यह अहम है क्योंकि आर्थिक रूप से पाकिस्तान युद्ध का भार उठाने में सक्षम नहीं दिखता, फिर भी वह संघर्ष में प्रवेश की क्षमता रखता है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि सिर्फ IMF से मिला ऋण युद्ध नहीं जितवा सकता।
  4. रणनीतिक धैर्य और सांस्कृतिक सहिष्णुता की भी एक सीमा होती है। 22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा के हमले ने उस सीमा की परीक्षा ली। संभवतः हमलावरों का उद्देश्य भारत को उकसाना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना था, लेकिन वे अपने मकसद में नाकाम रहे। वे मानसिक रूप से अभी भी 2008 के परिप्रेक्ष्य में जी रहे हैं।
  5. किसी भी लड़ाई में देश का साइज भी मायने रखा है। पाकिस्तान का कोई भी हिस्सा भारत की पहुंच से बाहर नहीं है। नूर खान एयरबेस, जिसे पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित अड्डा माना जाता था, अब ये भ्रम टूट चुका है। यहां तक कि रावलपिंडी — पाकिस्तान की सैन्य शक्ति का गढ़ — भी सुरक्षित नहीं रहा।
  6. धार्मिक फतवों पर पाकिस्तान का एकाधिकार अब टूट चुका है। भारतीय उलेमाओं ने भी अपने फतवे जारी किए, जिससे पाकिस्तान द्वारा मुस्लिम उम्माह की सहानुभूति जुटाने की उसकी परंपरागत रणनीति कमजोर पड़ी। यह भी उल्लेखनीय है कि देवबंद — इस्लामी विचारधारा का एक प्रमुख केंद्र — भारत में स्थित है।
  7. लोकतांत्रिक समाजों में गोपनीयता बनाए रखना कठिन होता है, फिर भी भारत ने अद्वितीय दक्षता से परिचालन गोपनीयता और सार्वजनिक एकता को बनाए रखा है। इससे यह सिद्ध होता है कि भारत अब रणनीतिक रहस्य संरक्षण में भी एक परिपक्व शक्ति बन चुका है।
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अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह (फोटो- @AmrullahSaleh.Afg)

पहलगाम का बदला

बता दें कि 7 मई की रात को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान और पीओके में बने आतंकी ठिकानों पर हमला बोला था। जिसमें कम से कम 100 आतंकी मारे गए थे, जिसमें पाकिस्तान के टॉप के 5 आतंकी भी शामिल थे। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमले की नाकाम कोशिश की। इसके बाद भारत ने पलटवार करते हुए लाहौर का एयर डिफेंस सिस्टम उड़ा दिया। अगले दिन फिर पाकिस्तान का हमला नाकाम रहा और भारत ने पाकिस्तान के कई बड़े सैन्य ठिकाने उड़ा दिए। जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और सीजफायर की गुहार लगाने लगा।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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