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IMF के पैसों पर चल रहे पाकिस्तान के पास जेट, ड्रोन और बमों का जखीरा कैसे, कंगाल देश कहां से जुटाता है इतने हथियार?

एक तरफ आईएमएफ से वित्तीय पैकेज की गुहार, दूसरी तरफ भारत से लड़ाई का मंसूबा, पाकिस्तान को कहां से मिलता है हथियारों के लिए खाद-पानी। इसे समझने की कोशिश करते हैं।

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पाकिस्तान को कैसे मिलते हैं इतने हथियार?

How Pakistan Manages Weapons And Jets: पहलगाम हमले के बाद भारत के हाथों बुरी तरह पिट चुका कंगाल पाकिस्तान आखिर हथियारों के लिए पैसा कहां से लाता है, ये सवाल फिर सामने है। आईएमएफ की मदद पर टिका पाकिस्तान हथियारों की दौड़ में बड़े-बड़े देशों से मुकाबला करता है। लड़ाकू विमान, ड्रोन, पनडुब्बी, युद्धपोत, पाकिस्तान के पास सभी हथियार हैं। लगातार लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के बीच पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। इस साल इसकी जीडीपी मुश्किल से 236 अरब डॉलर है और रक्षा के लिए उसने 7 अरब डॉलर से अधिक का बजट निर्धारित रखा है। यानी पाकिस्तान के हथियारों का जखीरा इस देश के आर्थिक पतन से बिल्कुल अलग ही कहानी बयां करता है।

इतने हथियार कैसे जुटा लेता है पाकिस्तान

आखिर कंगाल हो चुका पाकिस्तान इतने हथियार कैसे जुटा लेता है। इसका जवाब ढूंढना ज्यादा मुश्किल नहीं है। जब आपका मुख्य हथियार डीलर ही आपका बैंकर भी हो तो चीजें आसान हो जाती हैं। पाकिस्तान के 80% से अधिक सैन्य आयात की आपूर्ति उसका सदाबहार दोस्त चीन करता है। चीन सिर्फ हार्डवेयर ही नहीं देता है, इसके भुगतान के लिए पैसे भी देता है। कम ब्याज, लचीली शर्तों और लंबी छूट अवधि के साथ कर्ज लेकर पाकिस्तान चीनी हथियारों का भंडार बढ़ाता है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान को बड़े-बड़े हथियार जुटाने के लिए नकदी की जरूरत नहीं है, उसे बस कर्ज देने वाले दोस्तों की जरूरत है।

पाकिस्तानी सेना का अपना बिजनेस

इसमें एक ऐसी सेना को भी जोड़ दें जो अपने विशाल बिजनेस साम्राज्य को नियंत्रित करती है तो मामला और आसानी से समझ आ जाता है। खेत और सीमेंट कारखानों से लेकर हाउसिंग प्रोजेक्ट तक, पाकिस्तानी सेना सब कुछ चलाती है। ये एक ऐसी सेना है जो सरकार के गिरते बजट से बेपरवाह आजादी से निवेश करती है, कमाती है, खर्च करती है और हथियार रखती है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की दरियादिली

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की दरियादिली ने पाकिस्तानी सेना के इस मॉडल को काम करने लायक बनाया। अमेरिका और यूरोपिय देशों की पाकिस्तान पर नजरें इनायत रहीं। 1948 से अकेले अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर की आर्थिक और सैन्य सहायता दी है। कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप को जोड़ दें, तो यह आंकड़ा 55 अरब डॉलर को पार कर जाता है। फिर चीन ने भी खुलकर पाकिस्तान को कर्ज देना शुरू कर दिया। इन्हीं पैसों के दम पर पाकिस्तान ने हथियारों का जखीरा तैयार किया है। आज पाकिस्तान के हथियार आतंकियों की सुरक्षा कर रहे हैं।

हक्कानी ने कर दिया खुलासा

पाकिस्तान के इस खेल का खुलासा पूर्व पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी ने किया है। हक्कानी ने एक दशक पुराने वीडियो में कहा, दक्षिण कोरिया को 15 अरब डॉलर मिले, ताइवान को 10 अरब डॉलर मिले। उन्होंने अर्थव्यवस्थाएं बनाईं। हमें 55 अरब डॉलर मिले और हमने भ्रम पैदा किए। हक्कानी ने तर्क दिया कि जब दक्षिण कोरिया ने खुद को बदला, तो पाकिस्तान ने सैन्य प्रभुत्व को बढ़ावा देने के लिए विदेशी सहायता का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत को लेकर अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। भारत विरोध के नाम पर हर डॉलर ने सेना को और मजबूत बनाया। हक्कानी ने वर्षों पहले कहा था, पाकिस्तान हर दो साल में अमेरिका को गाली देने के बाद वापस उसके पास आता रहा है, और अमेरिका भी उसकी जरूरतों को हर बार पूरा कर देता है।

आईएमएफ से फिर मिली मदद

पाकिस्तान के कुत्सित इरादे जगजाहिर हैं, बावजूद इसके उसे मदद का सिलसिला है। भारत-पाक संघर्ष के बीच 9 मई, 2025 को आईएमएफ (IMF) ने पाकिस्तान के लिए 2.4 बिलियन डॉलर की नई फंडिंग को मंजूरी दी। विस्तारित फंड सुविधा (EFF) के तहत 1 अरब डॉलर और नई लचीलेपन और स्थिरता सुविधा (RSF) के तहत 1.4 अरब डॉलर। EFF, 37 महीने के 7 अरब डॉलर के पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को स्थिर करना है। वहीं, RSF की 1.4 अरब डॉलर की मदद जलवायु लचीलेपन के लिए दी गई है। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कितना सुधार आएगा और वह जलवायु परिवर्तन को लेकर कितना संजीदा है, ये बात किसी से छिपी हुई नहीं है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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