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हरियाणा में कब किसकी रही सरकार? कौन कब से कब तक रहा सीएम; देख लें पूरी लिस्ट

Haryana Chunav: हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी सियासी दलों ने अपनी अपनी कमर कस ली है। सभी 90 विधानसभा सीट के लिए आगामी 1 अक्टूबर 2024 को मतदान होने हैं। ऐसे में आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि सूबे में कब किस पार्टी की सरकार रही और कौन कब सीएम रहा।

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हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की सूची।

Haryana Assembly Election 2024: हरियाणा का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इसका फैसला करने के लिए सूबे में 1 अक्टूबर को वोटिंग होगी, विधानसभा चुनाव के नतीजों से ये तस्वीर साफ हो जाएगी कि किसका डंका बजा और किसकी लंका लगी। राज्य में साल 2014 से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शासन है। क्या आप जानते हैं कि सूबे में पहली बार कब विधानसभा चुनाव हुए, कौन पहला मुख्यमंत्री बना और किसके नाम सबसे लंबे समय तक हरियाणा का सीएम रहने का कीर्तिमान दर्ज है। आपको सबकुछ इस रिपोर्ट में बताते हैं।

कौन बना था हरियाणा का पहला मुख्यमंत्री?

भगवत दयाल शर्मा... यही वो नाम है, जिन्हें हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में जाना जाता है। 1 नवंबर 1966 को उन्होंने इस पद को संभाला था। भारतीय संविधान के मुताबिक कानूनी तौर पर राज्य का मुखिया भले ही राज्यपाल होता है, लेकिन मुख्यमंत्री के पास सूबे का वास्तविक कार्यकारी अधिकार होता है।

हरियाणा पर किस पार्टी ने कितनी बार किया राज?

हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री ने 143 दिनों तक सत्ता की चाबी अपने हाथों में रखी। पांच महीने के बाद जब 1967 में दूसरी बार विधानसभा चुनाव हुए तो विशाल हरियाणा पार्टी ने दमदार सीट हासिल की और बीरेंद्र सिंह राव ने सीएम पद की शपथ ली। इसके बाद 20 नवंबर, 1967 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। साल 1968 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस ने जीत हासिल की और 1977 तक उसने शासन किया। फिर जनता पार्टी सत्ता में आई, कांग्रेस, जनता दल, समाजवादी जनता दल, कांग्रेस, हरियाणा विकास पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल, कांग्रेस और पिछले 10 सालों से कांग्रेस सत्ता में है।

कब से कब तक कौन रहा हरियाणा का सीएम?

नामकब से कब तकपार्टी
भगवत दयाल शर्मा1 नवंबर 1966 से 24 मार्च 1967 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
राव बीरेंद्र सिंह24 मार्च 1967 से 20 नवंबर 1967 तकविशाल हरियाणा पार्टी
राष्ट्रपति शासन20 नवंबर 1967 से 21 मई 1968 तकलागू नहीं
बंसी लाल तोशाम21 मई 1968 से 14 मार्च 1972 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
बनारसी दास गुप्ता1 दिसंबर 1975 से 30 अप्रैल 1977 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
राष्ट्रपति शासन30 अप्रैल 1977 से 21 जून 1977 तकलागू नहीं
देवी लाल21 जून 1977 से 28 जून 1979 तकजनता पार्टी
भजन लाल बिश्नोई28 जून 1979 से 23 मई 1982 तकजनता पार्टी
भजन लाल बिश्नोई23 मई 1982 से 5 जून 1986 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
बंसी लाल5 जून 1986 से 20 जून 1987 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
देवी लाल20 जून 1987 से 2 दिसंबर 1989 तकजनता दल
ओम प्रकाश चौटाला2 दिसंबर 1989 से 22 मई 1990 तकजनता दल
बनारसी दास गुप्ता22 मई 1990 से 12 जुलाई 1990 तकजनता दल
ओम प्रकाश चौटाला12 जुलाई 1990 से 17 जुलाई 1990 तकजनता दल
हुकम सिंह दादरी17 जुलाई 1990 से 22 मार्च 1991 तकजनता दल
ओम प्रकाश चौटाला22 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 1991 तकसमाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय)
राष्ट्रपति शासन6 अप्रैल 1991 से 23 जून 1991 तकलागू नहीं
भजन लाल बिश्नोई23 जून 1991 से 11 मई 1996 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
बंसी लाल11 मई 1996 से 24 जुलाई 1999 तक हरियाणा विकास पार्टी
ओम प्रकाश चौटाला24 जुलाई 1999 से 5 मार्च 2005इंडियन नेशनल लोकदल
भूपेंद्र सिंह हुड्डा5 मार्च 2005 से 26 अक्टूबर 2014 तकभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
मनोहर लाल खट्टर26 अक्टूबर 2014 से 12 मार्च 2024 तकभारतीय जनता पार्टी
नायब सिंह सैनी12 मार्च 2024 से अब तकभारतीय जनता पार्टी

हरियणा में कब होंगे विधानसभा चुनाव?

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए 5 सितंबर 2024 को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 सितंबर 2024 को है, नामांकन की जांच तारीख 13 सितंबर 2024 है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 16 सितंबर 2024 है। 90 विधानसभा सीटों के लिए 1 अक्टूबर 2024 को मतदान होगा। इसके बाद 4 अक्टूबर 2024 को मतगणना होगी।

जब टूट गया जेजेपी-भाजपा गठबंधन

साल 2019 से चले आ रहे भाजपा-जजपा गठबंधन में इसी साल दरार पड़ गई। 12 मार्च 2024 को बीजेपी और जेजेपी गठबंधन टूट गया। इसके बाद मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उसी दिन नायब सिंह सैनी ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को तगड़ा झटका लगा और जिस भाजपा ने 2019 के चुनावों में हरियाणा की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की थी, उसे सिर्फ 5 सीटें नसीब हुई और अन्य 5 सीटें कांग्रेस ने जीत ली।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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