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क्या विनेश फोगाट जाएंगी राज्यसभा? हरियाणा चुनाव से पहले कांग्रेस बिगाड़ सकती है BJP का गणित; कैसे बदलेंगे समीकरण

Vinesh Phogat News: अगर विनेश फोगाट को कांग्रेस राज्यसभा के लिए भेजती है तो उनका विरोध भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में विनेश फोगाट भाजपा और जेजेपी के लिए मजबूरी बन सकती हैं।

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विनेश फोगाट।

Photo : Twitter

Vinesh Phogat News: भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है। विनेश को एक दिन पहले पेरिस ओलंपिक में फाइनल मुकाबल से ठीक पहले डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था, 50 किलो वर्ग स्पर्धा में उनका 100 ग्राम वजन अधिक निकला था। विपक्ष इसमें साजिश की तरफ इशारा कर रहा है तो सरकार ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जो भी हो लेकिन एक बात तय है कि विनेश फोगाट का मामला हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण तैयार कर रहा है।

इसके संकेत तब मिले जब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विनेश फोगाट को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास संख्याबल होता तो वह पहलवान विनेश फोगाट को राज्यसभा के लिए मनोनीत करते। कांग्रेस के सीनियर नेता की तरफ से यह बयान अनायास ही नहीं आया है, दरअसल हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले कांग्रेस का यह दांव भारतीय जनता पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। आइए समझते हैं हरियाणा के बदलते समीकरण...

भूपेंद्र हुड्डा ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा ने गुरुवार को कहा, जल्द ही राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं। यदि हमारे पास बहुमत होता तो हम उन्हें प्रेरित करने के लिए नामांकित करते। उन्होंने हम सभी को गौरवान्वित किया है। वहीं, भूपेंद्र हुड्डा के बेटे एवं लोकसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने भी उनकी बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा, उनके लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद हरियाणा की एक राज्यसभा सीट रिक्त हुई है। विनेश फोगाट को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए। वह हारी नहीं, जीती हैं। उन्होंने लोगों का दिल जीता है और वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

क्या है राज्यसभा का गणित?

3 सितंबर को 9 राज्यों की 12 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। इसमें एक सीट हरियाणा की भी है। कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा के लोकसभा के लिए निर्वाचित होने से यह सीट खाली हो गई है। कांग्रेस ने इस सीट पर विनेश फोगाट को भेजने का मामला उठाकर सियासत को नई हवा दे दी है। अगर हरियाणा के राज्यसभा गणित को देखें तो 90 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 87 सदस्य हैं। इसमें भाजपा के पास 41 विधायक और कांग्रेस के पास 29 विधायक हैं। इसके अलावा दुष्यंत चौटाला की जेजेपी के 10, इनेलो और एचएलपी के एक-एक और पांच निर्दलीय विधायक हैं। भाजपा को एक निर्दलीय और एचएलपी विधायक ने भी समर्थन दे रखा है, जिससे उसका संख्याबल 43 है। वहीं, कांग्रेस को तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उसका संख्याबल 32 हो जाता है। अब पूरा खेल दुष्यंत चौटाला की जेजेपी पर निर्भर है, जिनके पास 10 विधायक हैं। वह कांग्रेस के साथ आते हैं तो बीजेपी के लिए राज्यसभा की मुश्किल हो जाएगी। हालांकि, एक निर्दलीय और अभय चौटाला ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं, दुष्यंत चौटाला की जेजेपी के कुछ विधायक भी बीजेपी के संपर्क में हैं।

भाजपा के लिए मुश्किल क्यों?

यह बात जगजाहिर है कि भाजपा नेता बृजभूषण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन का मुख्य चेहरा विनेश फोगाट ही थीं। उनकी रोते हुए तस्वीर भी सामने आई थी। भाजपा इसका नुकसान पहले ही उठा चुकी है, जिस कारण इस बार के लोकसभा चुनाव में बृजभूषण सिंह को टिकट भी नहीं दिया गया था। अब अगर विनेश फोगाट को कांग्रेस राज्यसभा के लिए भेजती है तो उनका विरोध भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में विनेश फोगाट भाजपा और जेजेपी के लिए मजबूरी बन सकती हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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