ईरान- इजरायल संघर्ष में यूएस भी कूद सकता है।
Israel-Iran Conflict : इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष अपने सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। दोनों देश एक दूसरे पर जमकर हवाई हमले कर रहे हैं। फिलहाल यह संघर्ष थमता नहीं दिख रहा है बल्कि इसके और तीव्र होने की आशंका जताई जा रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि इजरायल के साथ पहले से मजबूती के साथ खड़ा अमेरिका भी इस युद्ध में कूद सकता है। वह ईरान को चारो तरफ से घेरने की तैयारी में है। मध्य पूर्व में वह अपनी उपस्थिति बढ़ाने लगा है। उसके कई युद्धपोत ईरान के नजदीक पहुंच रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक डिएगो गार्सिया सहित इलाके में अमेरिका के जितने भी सैन्य बेस हैं, वहां लड़ाकू विमानों से लेकर बॉम्बर प्लेन की हलचल तेज हो गई है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधि बढ़ने की पुष्टि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेठ ने की है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में अमेरिकी सैन्य हथियारों की तैनाती और गतिविधि बढ़ाने का मकसद यहां मौजूद अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रिपोर्टों के अनुसार पेंटागन ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त फाइटर जेट्स, री-फ्यूलिंग टैंकर्स तैनात किए हैं। हिंद महासागर में पहले से मौजूद अपने युद्धपोतों को वह ईरान की तरफ रवाना कर चुका है। ये सारी सैन्य हलचल बताती है कि अमेरिका इस संघर्ष में उतरने की तैयारी कर रहा है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी आया है जो यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में वह ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने कहा है, 'अब हमारा ईरान के आसमान पर पूरा और पूरी तरह से नियंत्रण है।' ऐसी अटकलें लग रही हैं कि इजरायल की तरह अमेरिका भी ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी फाइटर प्लेन अभी तक ईरान के वायु सीमा में दाखिल नहीं हुए हैं। अमेरिका की अभी सारी सैन्य कवायद रक्षात्मक है। खासकर, अमेरिकी रक्षा प्रणालियां इजरायल की तरफ आने वाली मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर उन्हें निष्क्रिय कर रही हैं।
मध्य पूर्व में अमेरिका के सैन्य मौजूदगी कितनी है, इसका सटीक आंकड़ा तो नहीं है, फिर भी कहा जा रहा है कि उसने अपने एफ-16 लड़ाकू जहाजों को सऊदी अरब पहुंचाया है। अमेरिकी फाइटर प्लेन इलाके में उड़ान भर रहे हैं। जबकि बॉम्बर बी-52 को डिएगो गार्सिया में तैयार रखा गया है। हालांकि, अमेरिका ने अपने शक्तिशाली बी-2 स्टील्थ बॉम्बर को अभी तैनात नहीं किया है। इस बॉम्बर के पास 30,000 पाउंड वजनी 'बंकर बस्टर' बम गिराने की क्षमता है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की तादाद में भी वृद्धि होने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि इलाके में पिछले दिनों अमेरिकी सैनिकों की संख्या 30 हजार से बढ़ाकर करीब 40 हजार कर दी गई।
अमेरिका के संभावित हमले को लेकर ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस्लामी गणराज्य को निशाना बनाकर किए जा रहे इजरायली हमलों में अमेरिका के शामिल होने पर उसे ‘उसे अपूरणीय क्षति होगी।’ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनके देश को निशाना बनाकर किए जा रहे इजरायली हमलों में अमेरिकी हस्तक्षेप से ‘पूर्ण युद्ध’ छिड़ जाएगा। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने ‘अल जजीरा इंग्लिश’ समाचार चैनल पर प्रसारित एक साक्षात्कार के दौरान ये टिप्पणियां कीं। इस साक्षात्कार का सीधा प्रसारण किया गया। बाघई ने कहा, ‘अमेरिका का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप इस क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का कारण होगा।’
ईरान पर इजरायल के हमलों के बाद अमेरिका ने खुद को इससे दूर रखा था लेकिन जी-7 समिट से रवाना होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह संघर्ष विराम से ‘कहीं अधिक बड़ा’ कुछ चाहते हैं। उनके इस बयान को ईरान पर संभावित अमेरिका सैन्य कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख एवं फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की राष्ट्रपति ट्रंप से भोज पर मुलाकात हुई। समझा जाता है कि अमेरिका, पाकिस्तान से मदद चाहता है। हो सकता है कि वह पाकिस्तान से बलोचिस्तान सीमा पर पाक फौज की तादाद बढ़ाने के लिए कहे। ईरान पर हमले की सूरत में वह पाकिस्तान स्थित सैन्य बेस का इस्तेमाल भी कर सकता है। कुल मिलाकर, ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका ज्यादा बढ़ गई है।
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