Apache AH-64E Helicopters: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अमेरिकी एयरोस्पेस दिग्गज बोइंग की ओर से 22 जुलाई को भारतीय सेना को तीन अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर मिल गए। कंपनी ने भारतीय सेना को छह हेलीकॉप्टर की आपूर्ति के अनुबंध के तहत एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर (AH-64E) सौंपे। एएच-64 अपाचे दुनिया के सबसे एडवांस मल्टीरोल लड़ाकू हेलिकॉप्टरों में से एक है और इसे अमेरिकी सेना उड़ाती है। उड़ता टैंक कहे जाने वाले अपाचे मिलने के बाद भारतीय सेना की ताकत में भारी इजाफा होगा। इनकी उन खासियतों के बारे में जानिए जिनसे दुश्मन का खौफ खाना तय है। भारतीय सेना के लिए ये हेलिकॉप्टर गेम चेंजर साबित हो सकते हैं और दुश्मनों पर बढ़त मिल सकती है। अपाचे खरीदने की हसरत कई देशों की रहती है और इसकी ताकत से दुश्मनों की नींद उड़ जाती है। आइए जानते हैं इसकी वो खासियतें जो इसे अलग मुकाम पर खड़ा करती हैं।
पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ेगी सेना की ताकत
अमेरिका में सामने आ रही तकनीकी समस्याओं के कारण अपाचे की डिलीवरी में देरी हुई। तीन हेलीकॉप्टरों का पहला बैच भारत को मिल गया है, जबकि बाकी तीन हेलीकॉप्टरों का दूसरा बैच इस साल के अंत में भारत पहुंचेगा। अपाचे AH-64E अटैक हेलीकॉप्टर पश्चिमी मोर्चे पर सेना के अहम अभियानों को मजबूत करेगा। ये एडवांस हेलिकॉप्टर अपनी तेजी, मारक क्षमता और सटीक टारगेट के लिए जाने जाते हैं। भारतीय वायु सेना ने 2015 में हुए एक सौदे के तहत पहले ही 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों को शामिल कर लिया है। अब तीन और अत्याधुनिक अपाचे मिलने के बाद भारतीय सेना की क्षमताओं में भारी इजाफा होगा।

Apache AH-64 से बढ़ेगी सेना की ताकत
अपाचे AH-64 की ताकत
- AH-64 अपाचे एक शक्तिशाली अटैक हेलिकॉप्टर है जो अपनी एडवांस विशेषताओं के लिए जाना जाता है
- इसमें शक्तिशाली हथियार, परिष्कृत सेंसर और मजबूत सर्वाइवल फीचर शामिल है
- 30 मिमी चेन गन, हेलफायर मिसाइल और 70 मिमी रॉकेट के लैस जो इसे विभिन्न टारगेट को भेद सकते हैं
- इसके उन्नत सेंसर, लक्ष्यीकरण रडार और नाइट विजन सिस्टम कम दृश्यता सहित विभिन्न हालात में संचालन को सक्षम बनाते हैं
- AH-64E नवीनतम संस्करण, बेहतर लड़ाकू क्षमताओं के लिए बेहतर थ्रस्ट, लिफ्ट और डिजिटल कनेक्टिविटी से लैस है
- टारगेट पर सटीक लक्ष्यीकरण के लिए एक नया इन्फ्रारेड लेजर भी शामिल
- 30 मिमी की ऑटोमेटिक गन जो चलते टारगेट पर सटीक वार कर सकती है
- हाइड्रा-70 रॉकेट सिस्टम जो बेहद असरदार और घातक है
- एंटी-टैंक मिसाइलें (जैसे हेलफायर) – दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को उड़ाने में सक्षम
- रॉकेट पॉड्स बड़े क्षेत्र में बमबारी करने की ताकत रखते हैं
- नाइट विजन और एडवांस टारगेटिंग सिस्टम जो दिन हो या रात, हर मौसम में ऑपरेशन में सक्षम हैं
अपाचे सौदे की अहम बातें
- अमेरिका से खरीदे गए ये हेलीकॉप्टर 860 करोड़ रुपये प्रति यूनिट की लागत से मिले हैं
- पहले फेज में छह में से तीन हेलीकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं, जो अब सेना का हिस्सा बनेंगे
- इनकी खरीद 2020 में 600 मिलियन डॉलर (करीब 5,000 करोड़ रुपये) के सौदे के तहत हुई है
- फिलहाल हेलिकॉप्टर का संचालन जोधपुर में स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन करेगा, जिनकी खासतौर पर पश्चिमी सीमा की निगरानी और जवाबी कार्रवाई के लिए तैनात होगी
भारतीय सेना की एविएशन कोर को मिले अपाचे
भारतीय सेना की एविएशन कोर की परिचालन क्षमताओं का एक अहम हिस्सा है, जो तमाम मिशनों के लिए जरूरी हवाई मदद देता है। मौजूदा वक्त में ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनजर पश्चिमी सीमा पर तैनाती को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अपाचे हेलिकॉप्टर की डिलिवरी के बाद यहां भी सेना के अभियानों को मजबूती मिलेगी।
कब हुआ था सौदा?
2020 में बोइंग ने भारतीय वायु सेना को 22 ई-मॉडल अपाचे की डिलीवरी पूरी की और भारतीय सेना के लिए छह AH-64E की आपूर्ति के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2015 में 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ अरबों डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। रक्षा मंत्रालय ने 2017 में सेना के लिए 4,168 करोड़ रुपये की लागत से बोइंग से हथियार प्रणालियों सहित छह अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी। भारतीय सेना को अपाचे की डिलीवरी 2024 में शुरू होने वाली थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण इसमें देरी हुई।
