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'ड्रैगन' ने कब्जाई है नेपाल की जमीन! क्या चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजेंगे PM बालेन शाह?

2020 में नेपाल के सर्वे विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि सीमावर्ती सात जिलों में कई जगहों पर चीन अवैध रूप से नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है। वह नेपाली सीमा को पीछे करते हुए ज्यादा से ज्यादा जमीन पर अतिक्रमण करते हुए लगातार आगे बढ़ रहा है।

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रिपोर्टों में दावा नेपाल की जमीन पर चीन ने किया है कब्जा।

Photo : AP

Lipulekh Limpiyadhura border dispute : नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने अपने एक बयान से भारत-नेपाल सीमा विवाद को हवा दे दी है। कुछ दिनों पहले नेपाली संसद को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि लिपुलेख-लिंपियाधुरा सीमा विवाद वर्षों से लंबित है और यह विवाद तब से है जब भारत में ब्रिटेन का शासन था। शाह ने आगे कहा कि काठमांडू ने इस मसले को भारत, चीन और ब्रिटेन के साथ उठाया है। यही नहीं, इस विवादित मसले पर उन्होंने दिल्ली को 'डिप्लोमेटिक नोट' भी भेजा है। नेपाल के पीएम यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि नेपाल ने भी भारत की कुछ जमीन पर कब्जा किया है। हालांकि, अपने इस बयान पर वह घर में ही घिर गए। विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद नेपाल विदेश मंत्रालय की ओर से सफाई देनी पड़ी। यहां सवाल है कि 2020 के बाद चीन ने नेपाल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया है लेकिन क्या बालेंद्र शाह अपने इस देश के हिस्से को खाली करने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को डिप्लोमेटिक नोट भेजेंगे?

बीबीसी साल 2020 में कर चुका है दावा

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का यह दावा बीबीसी साल 2020 में कर चुका है। बीबीसी ने अपनी इस रिपोर्ट में नेपाल सरकार की एक लीक रिपोर्ट का जिक्र किया है। इस रिपोर्ट में चीन पर नेपाली सीमा पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया। यह पहली बार है जब नेपाल की तरफ से चीन पर अपनी जमीन का कब्जा करने का आरोप लगाया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया कि नेपाल के सुदूर पश्चिम इलाके के जिले हुमला में चीन ने अतिक्रमण किया है। हालांकि, काठमांडू स्थित चीनी दूतावास ने किसी अतिक्रमण से इंकार किया। वहीं, इस लीक रिपोर्ट के सामने आने के बाद तत्कालीन संचार मंत्री ज्ञानेंद्र कुमार कार्की ने कहा कि अपने पड़ोसियों के साथ किसी भी तरह के सीमा विवाद को कूटनीतिक तरीके से सुलझाया जाएगा। कार्की ने कहा कि इस तरह की समस्याएं नहीं होनी चाहिए और नेपाल सरकार इस तरह की स्थितियों को रोकने के लिए हमेशा प्रयास करेगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में अतिक्रमण का जिक्र

बीबीसी की इस रिपोर्ट के अलावा साल 2024 में द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण करने और उसे अपने कब्जे में लेने की बात कही गई है। NYT की इस रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने स्थानीय संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए नेपाल के सुदूर जिलों में बॉर्डर पीलर को आगे खिसकाते हुए बुनियादी संरचना का निर्माण किया। अपनी जमीन पर हुए इस अतिक्रमण का जिक्र नेपाल सरकार की एक रिपोर्ट में भी हुआ। हालांकि, चीन द्वारा अपने भू-भूभाग पर अतिक्रमण की रिपोर्टों को नेपाल सरकार कथित रूप से दबाती आई है। वह नहीं चाहती कि सीमा विवाद का असर चीन के साथ उसके संबंधों पर पड़े।

B shah

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नेपाल के सर्वे विभाग ने भी किया अतिक्रमण का जिक्र

यही नहीं, 2020 में नेपाल के सर्वे विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि सीमावर्ती सात जिलों में कई जगहों पर चीन अवैध रूप से नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है। वह नेपाली सीमा को पीछे करते हुए ज्यादा से ज्यादा जमीन पर अतिक्रमण करते हुए लगातार आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक समझा जाता है कि नेपाल के कई अन्य इलाकों में चीन ने सड़कें बना ली हैं। इस अतिक्रमण पर प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने चुप्पी साध ली है। ओली सरकार को डर है कि यह मसला उठाने पर सीसीपी नाराज हो सकती है। सवाल है कि चीन द्वारा कब्जाए गए अपनी जमीन नेपाल के हुक्मरान क्यों नहीं बोलते? उन्हें अपनी जमीन को खाली करने का मुद्दा बीजिंग के समक्ष उठाना चाहिए। शाह उस सीमा विवाद को उठा रहे हैं जो साल 1814-16 से चला आ रहा है।

सुगौली संधि से जुड़ा है यह विवाद

लिपुलेख-लिंपियाधुरा सीमा विवाद का यह मसला सुगौली संधि से जुड़ा हुआ है। उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच संधि हुई। यह विवाद तभी का है। भारत 1947 में आजाद हुआ और तब से आज तक उसने नेपाल की एक इंच जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया। नेपाल तो छोड़िए भारत ने किसी भी अपने पड़ोसी देश पर अतिक्रमण नहीं किया है। पड़ोसी देशों की जमीन पर अतिक्रमण करने में भारत विश्वास नहीं करता। भारत अपने पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते रखने का आकांक्षी है।

नेपाल ने अतिक्रमण के मुद्दे का उल्लेख किया

नई दिल्ली ने नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन इस महीने की शुरुआत में, भारत ने लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरने वाली आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को खारिज करते हुए, इस क्षेत्र पर काठमांडू के क्षेत्रीय दावों को 'एकतरफा कृत्रिम विस्तार' करार दिया था, जिसे नई दिल्ली 'अस्वीकार्य' मानती है। शाह ने संसद को बताया, 'नेपाल सरकार ने भारत को आधिकारिक तौर पर एक राजनयिक नोट भेजा है, जिसमें भारत द्वारा लिपुलेख सहित विभिन्न क्षेत्रों पर अतिक्रमण के मुद्दे का उल्लेख किया गया है, और हमें उनका जवाब पहले ही मिल चुका है।

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दोनों देशों ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और संबंधित विशेषज्ञों की मदद से राजनयिक माध्यमों से एक साथ बैठकर इस मुद्दे को हल करने पर सहमति जताई है।' जब एक सांसद ने विशेष रूप से लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों से संबंधित विवाद पर सरकार के दृष्टिकोण के बारे में पूछा, तो शाह ने कहा कि केवल भारत ने ही 'अतिक्रमण' नहीं किया, बल्कि नेपाल ने भी भारत के साथ ऐसा ही किया है।

विपक्षी दलों ने की शाह से माफी मांगने की मांग

नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि काठमांडू ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ राजनयिक चर्चा भी की- ये तीनों स्थान भारत, तिब्बत और नेपाल के त्रिकोणीय बिंदु के पास स्थित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन के साथ यह मामला इसलिए उठाया, क्योंकि यह उस दौर से जुड़ा है जब ब्रिटिश सरकार ने इस क्षेत्र को छोड़ दिया था। नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण करने के संबंध में शाह की टिप्पणियों से विवाद खड़ा हो गया। नेपाली कांग्रेस के बसाना थापा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के रमेश मल्ला सहित विपक्षी सांसदों ने शाह की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और मांग की कि उन्हें संसदीय रिकॉर्ड से हटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को या तो अपने इस दावे के समर्थन में सबूत पेश करने चाहिए कि नेपाल ने भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है या फिर अपना बयान वापस लेना चाहिए। खबरों के मुताबिक, नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने भी शाह से माफी मांगने की मांग की।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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