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'यमुना में जहर' ने केजरीवाल पर किया सबसे गहरा असर; दिल्ली जीतकर पीएम मोदी ने सबसे पहले लगाया यमुना मैया के जयकारे

PM Modi on Yamuna: दिल्ली विधानसभा चुनाव में यमुना का मुद्दा कितना अहम रहा, ये इस बात से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा कार्यालय से अपने संबोधन की शुरुआत यमुना मैया की जय के नारे से की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज की ये विजय ऐतिहासिक है। दिल्ली के लोगों ने AAP-दा को बाहर कर दिया है। एक दशक की AAP-दा से दिल्ली मुक्त हुई है। आपको पीएम मोदी के इस बयान के मायने समझाते हैं।

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पीएम मोदी ने कहा- यमुना मैया की जय।

Politics on Yamuna: क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव के बीच 'यमुना में जहर' मिलाने के दावे की वजहल से अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी? काफी हद तक ये बात बिल्कुल जायज साबित होती दिख रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में इस बात की ओर इशारा कर दिया कि केजरीवाल के इल्जाम के बावजूद यमुना मैया का आशीर्वाद भाजपा पर बन गया। दरअसल, पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत 'यमुना मैया की जय' के नारे से की।

विधानसभा चुनाव के बाद यमुना का मुद्दा गरमाया

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) को राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता से बाहर कर 27 साल बाद वापसी की। भाजपा ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 48 पर अपना कब्जा जमाया, जबकि आप के खाते में सिर्फ 22 सीटें आई। खुद अरविंदल केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को हार झेलनी पड़ी।

ऐसे में पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि 'आज दिल्ली की जनता ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की असली मालिक सिर्फ और सिर्फ दिल्ली की जनता है। जिनको दिल्ली का मालिक होने का घमंड था, उनका सच से सामना हो गया। दिल्ली के इस जनादेश से ये भी स्पष्ट है कि राजनीति में शॉर्टकट के लिए, झूठ और फरेब के लिए कोई जगह नहीं है।'

इन लोगों ने यमुना की कैसी दुर्दशा कर दी?

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 'हम लोग हमारा सदा मंगल करने वाली यमुना देवी को नमस्कार करते हैं। लेकिन, उसी यमुना की इन लोगों ने कैसी दुर्दशा कर दी? दिल्ली का तो अस्तित्व ही मां यमुना की गोद में पनपा है। दिल्ली के लोग यमुना की इस पीड़ा को देखकर कितना आहत होते रहे हैं! लेकिन, दिल्ली की AAP-दा ने इस आस्था का अपमान किया।' पीएम मोदी ने आगे कहा कि दिल्ली की AAP-दा ने लोगों की भावनाओं को, आस्था को पैरों तले कुचल दिया था। अपनी नाकामी के लिए हरियाणा के लोगों पर इतना बड़ा आरोप लगा दिया था।

क्या चुनाव में केजरीवाल की 'गलती' पड़ गई भारी?

राजनीति में कोई भी कुछ भी दावा कर देता है, वादा कर देता है, यहां कोई भी कुछ भी कर सकता है। यही वजह है कि अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर यमुना में जहर मिलाने का आरोप लगाया। उन्होंने ये आरोप ऐसे वक्त लगाया, जब चुनाव चल रहा था। क्या अरविंद केजरीवाल ने जो आरोप हरियाणा सरकार पर लगाए हैं, वो सच्चे हैं? या फिर चुनाव में सारी हवा अपनी ओर करने के मकसद से आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल ने कोई नई चाल चली थी। ये फिलहाल जांच का विषय है।

केजरीवाल ने चुनाव के बीच ऐसा दावा किया कि दिल्ली में लोगों को जहरीले पानी से नहीं मरने देंगे। ‘यमुना में जहर' छोड़ने के दावे को लेकर भाजपा ने केजरीवाल की गिरफ्तारी की मांग की, हरियाणा सरकार ने केजरीवाल पर केस कर दिया। चुनाव आयोग ने केजरीवाल को नोटिस भेजा, जवाब मांगा। मामले पर जमकर राजनीति हुई और आखिरकार चुनावी नतीजों में केजरीवाल को हार का मुंह देखना पड़ा।

अरविंद केजरीवाल ने क्या और क्यों लगाया आरोप?

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने दावे में कहा था कि वह कानूनी कार्रवाई से नहीं डरते और दिल्ली में गंदे तथा जहरीले पानी के कारण लोगों को नहीं मरने देंगे। केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित हरियाणा पर यमुना नदी में ‘जहर’ मिलाने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने दावा किया था कि दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने सोमवार को एक पत्र में पुष्टि की है कि पड़ोसी राज्य से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में अमोनिया नामक ‘जहर’ मिला दिया गया है।

चुनाव के ही वक्त केजरीवाल का क्यों आई इसकी याद?

अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि ऐसा तो है नहीं कि दिल्ली में हरियाणा से पानी अभी-अभी आना शुरू हुआ है। जिस वक्त पानी की किल्लत होती है तो उस वक्त केजरीवाल और आतिशी हरियाणा पर पानी नहीं देने का आरोप लगाते हैं। अब चुनाव है तो केजरीवाल और आतिशी हरियाणा से मिल रहे पानी में जहर मिलाने का दावा कर रहे हैं। सियासत में ब्लेम गेम बड़ी आसान सीढ़ी होती है, लेकिन हर बात पर जब ऐसी बातें होने लगे तो जनता के जेहन में शक पैदा होने लगता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर भाजपा अब केजरीवाल को आसानी से नहीं छोड़ने वाली है। अब वो सत्ता से बेदखल हो चुके हैं, देखना होगा कि केजरीवाल के दावे की जांच होती है या नहीं, और होती भी है तो जांच का क्या परिणाम होगा।

जब पहली बार दिल्ली में केजरीवाल ने चुनाव लड़ा था तो उन्होंने ये वादा किया था कि वो यमुना को साफ कर देंगे। 2015, 2020 दोनों चुनावों में उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और तमाम वादे किए। हालांकि वो नाकाम साबित हुए तो अब वो इस चुनाव में एक बार फिर मौका मांग रहे थे कि इस बार वो यमुना को जरूर स्वच्छ कर देंगे। लेकिन ये पब्लिक है, ये सब जानती है, पब्लिक है...।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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