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राम के बाद कृष्ण के दर पर चोरी! भरतपुर बिहारी जी मंदिर से दान का हीरा गायब? कांच है या डायमंड; जांच की मांग तेज

दान दाता परिवार का दावा है कि भरतपुर के प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में लगा हीरा पहले लगाए गए हीरे जैसा नहीं लग रहा था। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार देवस्थान विभाग से हीरा जमा कराने की रसीद मांगी, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।

भरतपुर : भरतपुर के प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में श्रद्धालु द्वारा भेंट किए गए हीरे को लेकर विवाद सामने आया है। शहर के रंजीत नगर निवासी एक व्यापारी परिवार ने आरोप लगाया है कि मंदिर में भगवान को अर्पित किया गया लाखों रुपये का हीरा अब अपनी जगह पर नहीं है और उसकी जगह कांच जैसा टुकड़ा लगा दिखाई दे रहा है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री, देवस्थान विभाग और स्थानीय विधायक को शिकायत भेजी है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, व्यापारी प्रवीण बंसल की माता मीरा बंसल ने भगवान बिहारीजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए साल 2024 में मंदिर प्रशासन को एक हीरा भेंट किया था। उनका कहना है कि यह हीरा भगवान की प्रतिमा पर नथ (लौंग) के रूप में लगाया गया था। कुछ समय बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और परिचितों ने उन्हें बताया कि प्रतिमा पर लगा हीरा पहले जैसा नहीं दिख रहा और उसमें हीरे जैसी चमक भी नजर नहीं आ रही।

इसके बाद परिवार ने मंदिर पहुंचकर स्वयं भी प्रतिमा का अवलोकन किया। उनका दावा है कि वहां लगा हीरा पहले लगाए गए हीरे जैसा नहीं लग रहा था। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार देवस्थान विभाग से हीरा जमा कराने की रसीद मांगी, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।

परिवार का यह भी कहना है कि उन्होंने इस संबंध में देवस्थान विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और हीरे की जांच कराने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि बाद में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनसे बातचीत कर मामले को शांत करने की कोशिश की, जबकि परिवार लगातार केवल हीरे की सत्यता की जांच कराने की मांग करता रहा।

परिजनों का दावा है कि उनके पास हीरे की खरीद से संबंधित बिल, प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह स्पष्ट कराना है कि भगवान को अर्पित किया गया मूल हीरा अभी प्रतिमा पर लगा है या नहीं। फिलहाल परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया है और पहले जांच की मांग की है।

वहीं, देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा का कहना है कि जिस समय हीरा मंदिर में भेंट किया गया था, उस समय उनकी वहां तैनाती नहीं थी। इसलिए उस समय की प्रक्रिया या रसीद जारी होने की जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने बताया कि विभागीय रिकॉर्ड में हीरा दान की तिथि अलग दर्ज है, जबकि परिवार दूसरी तारीख बता रहा है। आयुक्त के अनुसार, हीरे का सत्यापन अभी तक नहीं हुआ है और इसकी जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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