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आग का तांडव, 26 मौतें...दिल्ली से लेकर मुजफ्फरपुर तक हाहाकार, कौन जिम्मेदार?

जब होटलों और अस्तपाल जैसी जगहों का ये हाल है, तो बाकी जगहों की स्थिति समझी जा सकती है। आखिर ये हादसे क्यों हुए और कौन है जिम्मेदार, समझने की कोशिश करते हैं।

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आग का तांडव, 26 मौतें

Photo : PTI

Fire Deaths in Delhi-Muzaffarpur: देश में एक के बाद एक हो रही आग लगने की घटनाओं ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। इससे हुई मौतों ने सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार 3 जून को पहला हादसा राजधानी दिल्ली में हुआ जिसमें 12 विदेशियों सहित 21 लोगों की मौत हो गई। इसमें सरकार, एमसीडी की ओर से भारी लापरवाही नजर आई। माममा ठंडा भी नहीं हुआ कि आज 4 जून को बिहार के मुजफ्फरपुर में इसी तरह की घटना सामने आई। यहां एक अस्पताल में आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। जब होटलों और अस्तपाल जैसी जगहों का ये हाल है, तो बाकी जगहों की स्थिति समझी जा सकती है। आखिर इस तरह के हादसे क्यों होते हैं और कौन है जिम्मेदार, समझने की कोशिश करते हैं।

दिल्ली के होटल में थी गंभीर सुरक्षा खामियां

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई। इस घटना की जांच में अवैध रेस्तरां, तहखाने में बंद ग्रिल, छोटी खिड़कियां और एक्जिट डोर का न होने की बात सामने आई है। आग लगने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। हौज रानी के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित बहुमंजिला इमारत 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' में आग लगने के कुछ घंटों बाद, जांचकर्ताओं ने कई संदिग्ध खामियों की पहचान की, जिनमें होटल का निर्धारित क्षमता से अधिक संचालन, तहखाने में आने-जाने की अपर्याप्त व्यवस्था, निकासी में बाधा डालने वाली छोटी कमरे की खिड़कियां और अग्निशन की एनओसी लिए बिना होटल चलाना प्रमुख वजहें रहीं। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इमारत की तंग जगह और आसपास बिछे बिजली के तारों ने अग्निशमन और बचाव कार्यों में बाधा डाली।

एक ही प्रवेश-निकास द्वार था

इमारत के भूतल पर संचालित रेस्तरां के पास जरूरी लाइसेंस नहीं था और कथित तौर पर वह अवैध रूप से चल रहा था। अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, इमारत में एक तहखाना, भूतल और पांच ऊपरी मंजिलें हैं। जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या प्रतिष्ठान ने सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया और क्या उसके संचालन से परिसर में आग लगने का खतरा बढ़ गया। अधिकारी होटल की निकासी व्यवस्था की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इमारत में मेहमानों के लिए केवल एक ही प्रवेश-निकास द्वार था, जिससे आग और धुएं से घिरने पर भागने के रास्ते बेहद सीमित हो गए थे। कमरों में छोटी खिड़कियों ने अंदर फंसे लोगों के लिए भागने के विकल्पों को और भी कम कर दिया और बचाव प्रयासों को जटिल बना दिया।

बेसमेंट जांच का एक और प्रमुख केंद्र बन गया है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि उस क्षेत्र में प्रवेश और निकास की व्यवस्था अपर्याप्त थी। जांचकर्ता उन आरोपों की भी जांच कर रहे हैं कि बेसमेंट में लगी एक बंद ग्रिल ने अंदर फंसे लोगों के भागने के प्रयासों और आपातकालीन बचाव कर्मियों के बचाव कार्यों दोनों में बाधा डाली।

अब टूटी सरकार की नींद

भयानक हादसा होने के बाद सरकार और एमसीडी की नींद टूटी है। सीएम रेखा गुप्ता ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सरकार ने सभी होटलों और अस्पतालों की जांच की बात भी कही है। नियम उल्लंघन पाए जाने पर इन्हें सील करने का निर्देश दिए जाने की खबर आई है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने कहा है कि होटलों में ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट योजना को खत्म किया जाएगा। सरकार ने सख्त कार्रवाई की बात कही है, लेकिन अगर नियमों को ठीक तरह से और सख्ती से लागू किया गया तो शायद आधे से अधिक होटल ही बंद हो जाएंगे। क्या सरकार में इतनी हिम्मत है। दिल्ली में घनी आबादी के बीच होटल किस तरह कानूनों को ठेंगा दिखाकर चल रहे हैं, ये किसी से छुपा नहीं है। इसलिए सरकार की बयानबाजी हर हादसे के बाद होने वाली सिर्फ एक कवायद ही नजर आती है।

MCD को आई नियमों की याद

दिल्ली नगर निगम (MCD) दक्षिण दिल्ली में अनधिकृत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगा। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि भवन उपनियमों और लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाली इमारतों को सील करने का अभियान चलाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मालवीय नगर स्थित एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट में लगी भीषण आग के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन उजागर हुआ, जिनमें निर्धारित क्षमता से अधिक संचालन और स्वीकृत भवन योजना का अभाव शामिल है। एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस इमारत में यह घटना हुई, उस पर पहले कभी किसी उल्लंघन का मामला दर्ज नहीं किया गया था।

क्या है बी-एंड-ब्रेकफास्ट योजना?

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी ने कहा, इस इमारत में कभी किसी उल्लंघन का रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। भवन योजना भी कभी स्वीकृत नहीं हुई थी। अधिकारियों ने उसी इमारत के भूतल पर चल रहे एक फूड आउटलेट में भी अनियमितताओं की ओर इशारा किया। एक अन्य अधिकारी ने कहा, बी-एंड-ब्रेकफास्ट योजना के तहत, व्यावसायिक रसोई या पूरी तरह विकसित रेस्तरां की अनुमति नहीं है। सिर्फ सीमित आतिथ्य गतिविधि की अनुमति है। एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्नैक्स एंड बाइट्स नाम से संचालित इस आउटलेट को पहले चाय-नाश्ते की दुकान खोलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अप्रैल में इसका लाइसेंस समाप्त हो गया। अधिकारी ने आगे कहा, जिसे नाश्ते की दुकान के रूप में दिखाया जा रहा था, वह वास्तव में एक पूर्ण रेस्तरां के रूप में चल रहा था।

मुजफ्फरपुर में अस्पताल में आग, 4 की मौत

दिल्ली जैसी ही घटना अगले दिन बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। यहां एक निजी अस्पताल में विकराल आग लगी और कीमत आमजनों को चुकानी पड़ी। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में रात करीब 3 बजे भीषण आग लग गई, जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि आग अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी। इस हादसे में अभी तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं। आग की यह घटना जूरन छपरा रोड नंबर 3 स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। जिसके बाद आग बुझाने के साथ राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। वहीं प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेने में जुटी रही।

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि हादसे में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 15 अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल शहर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। इस हॉस्पिटल में भर्ती कई मरीजों को एंबुलेंस के जरिए दूसरे अस्पतालों में पहुंचाया गया। इस हादसे के बाद घटना पर चीख-पुखार मच गई। जानकारी के अनुसार, अभी तक आग लगने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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