Mano Ya Na Mano Movie: बॉलीवुड में हमेशा से वर्ल्ड सिनेमा का असर दिखाई देता रहा है, और इसका नया उदाहरण है फिल्म ‘मानो या ना मानो – एनीथिंग इज़ पॉसिबल’, जो हॉलीवुड फिल्म A Man From Earth से प्रेरित है। यह फिल्म अपने अनोखे विचार और दिलचस्प कहानी से दर्शकों को बांधे रखती है।
कहानी की शुरुआत होती है एक शाम से, जब कुछ दोस्त वंश मेहता की बर्थडे पार्टी और इतिहास के प्रोफेसर मानव कुमार की फेयरवेल पार्टी के लिए इकट्ठा होते हैं। माहौल खुशनुमा होता है, लेकिन अचानक मानव एक ऐसा राज बताता है जिससे सब हैरान रह जाते हैं। वह कहता है कि उसकी उम्र 40 साल के बाद कभी नहीं बढ़ी और वह पिछले 14,000 सालों से धरती पर जीवित है! कुछ लोग इसे मज़ाक समझते हैं, तो कुछ हैरान रह जाते हैं। क्या सच में कोई इंसान ‘अमर’ हो सकता है? यही सवाल फिल्म के दौरान दर्शकों के मन में घूमता रहता है।
निर्देशक योगेश पगारे ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम किया है। पूरी फिल्म एक ही लोकेशन पर शूट की गई है, लेकिन कहानी और संवाद इतने दिलचस्प हैं कि दर्शक शुरू से अंत तक जुड़े रहते हैं। सिर्फ एक कमरे में घटने वाली यह कहानी सोचने पर मजबूर करती है और दर्शकों को एक अलग अनुभव देती है।
अभिनय की बात करें तो हितेन तेजवानी( Hiten Tejwani) ने ‘मानव’ के किरदार को बड़ी सहजता और गहराई से निभाया है। उनका शांत चेहरा, भावनाओं की बारीक अभिव्यक्ति और डायलॉग डिलीवरी हर सीन में असर छोड़ती है। राजीव ठाकुर ने ‘वंश’ के रूप में अपने कॉमिक टाइमिंग और वन-लाइनर्स से हल्कापन बनाए रखा है। दोनों के बीच की बातचीत फिल्म का मुख्य आकर्षण है। वहीं शिखा मल्होत्रा (मेघना), पूर्णिमा नवानी, निहार ठक्कर, हंसी श्रीवास्तव, और संजीव शुबा श्रीकर ने भी अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाया है।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका विषय और इसकी संक्षिप्त अवधि है। महज़ 70 मिनट की यह फिल्म न तो खींचती है और न ही बोर करती है — बल्कि लगातार जिज्ञासा बनाए रखती है। इस फिल्म को 3.5 रेटिंग दी जा रही है।