Iravin Nizhal Fame Radhakrishnan Parthiban Case: साउथ के जाने-माने स्टार और फिल्ममेकर राधाकृष्णन पार्थिबन (Radhakrishnan Parthiban ) इन दिनों फिल्मों से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। राधाकृष्णन पार्थिबन के जुड़ी एक के बाद एक खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच राधाकृष्णन पार्थिबन अपनी एक अनोखी मांग को लेकर खबरों में है। राधाकृष्णन पार्थिबन की इस मांग को कोर्ट ने भी मान लिया है। राधाकृष्णन पार्थिबन की इस खबर के सामने आने के बाद काफी चर्चा में बने हुए हैं। तो चलिए जानते हैं राधाकृष्णन पार्थिबन से जुड़ा ये मामला क्या है, जिसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी दुनिया तक में बात हो रही है। (ये भी पढ़ें:Raaka: दीपिका पादुकोण के लिए मुंबई शिफ्ट होंगे अल्लू अर्जुन, जानें कारण)
राधाकृष्णन पार्थिबन ने की ये मांग
राधाकृष्णन पार्थिबन एक बार फिर से चर्चा में है। इसकी वजह राधाकृष्णन पार्थिबन की एक मांग का पूरा होना है। राधाकृष्णन पार्थिबन ने कोर्ट से “नो कास्ट, नो रिलिजन” सर्टिफिकेट की मांग की थी। अब ये मांग पूरी हो गई है। कोर्ट ने राधाकृष्णन पार्थिबन को 'नो कास्ट, नो रिलिजन' सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया है। जस्टिस एम धनदापानी ने चेन्नई के शोलिंगनल्लूर तहसीलदार को कहा कि पार्थिबन के आवेदन को प्रोसेस करके 29 अप्रैल तक सर्टिफिकेट जारी किया जाए। कोर्ट का यह आदेश तब आया, जब पार्थिबन ने 20 मार्च को आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई न होने की शिकायत की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह की लापरवाही ठीक नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर तमिलनाडु सरकार इसी तरह जवाब नहीं देती रही, तो पार्थिबन को अदालत की अवमानना का केस करने का अधिकार होगा। (ये भी पढ़ें:Atlee Kumar के घर आई नन्ही परी, 7वें आसमान पर पहुंचे डायरेक्टर)
याचिका में कही ये बात
अपनी याचिका में राधाकृष्णन पार्थिबन ने साफ कहा कि यह फैसला उनकी अपनी सोच और निजी पसंद पर आधारित है। उन्होंने बताया कि बालिग होने के बाद उन्होंने तय किया कि वे खुद को किसी भी जाति या धर्म से नहीं जोड़ेंगे। इसी सोच के आधार पर उन्होंने आधिकारिक पहचान की मांग की। दिलचस्प बात यह है कि पार्थिबन के पास ऐसे दस्तावेज भी नहीं हैं, जिनमें उनकी जाति या धर्म का जिक्र हो। उन्होंने 11वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, इसलिए उनके पास स्कूल रिकॉर्ड या जन्म प्रमाण पत्र जैसे कागज नहीं हैं। इससे उनका मामला और मजबूत हुआ।

राधाकृष्णन पार्थिबन को कोर्ट से मिली जीत (Image Source: Radhakrishnan Parthiban Instagram)
राधाकृष्णन पार्थिबन ने कही ये बात
सुनवाई के बाद पार्थिबन ने समाज पर इसके असर को लेकर भी अपनी बात रखी। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कहना है कि जन्म के आधार पर तय की गई पहचान कई बार व्यक्ति की आजादी को सीमित कर देती है और समाज में अलगाव पैदा करती है। उन्होंने अपने शरीर दान के अभियान का उदाहरण दिया, जिसे शुरू में लोगों ने स्वीकार नहीं किया था, लेकिन धीरे-धीरे उसे मान्यता मिली। उनका मानना है कि 'नो कास्ट, नो रिलिजन' की सोच भी आगे चलकर इसी तरह स्वीकार की जा सकती है और इससे दूसरे लोगों को भी अपनी पसंद से जीने का रास्ता मिल सकता है।
