Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सितंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि वह इस मुद्दे के दायरे को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि पूरे देश में छात्रों के आवासों की सुरक्षा को लेकर व्यापक आदेश जारी कर सकता है।
"हम दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर नहीं करेंगे"
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार और केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि चूंकि दिल्ली हाईकोर्ट में पहले से ही इस मामले पर एक जनहित याचिका विचाराधीन है, इसलिए इस मुद्दे को हाईकोर्ट में ही स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिका ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया और टिप्पणी की- "नहीं, हम इसे स्थानांतरित नहीं कर रहे हैं। हमारे दिमाग में कुछ है।"
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा- "यह बेहद भयावह घटना है। लोग गहरे दुख में हैं और हमारा दिल भी बच्चों और खास तौर पर उनके माता-पिता के लिए रोता है, क्योंकि हम भी माता-पिता हैं।"
पूरे देश के PG और हॉस्टलों का हो 'सेफ्टी ऑडिट'
सुप्रिम कोर्ट द्वारा नियुक्त अमिसकस क्यूरी ने अदालत में एक विशेष आवेदन दायर कर मांग की है कि दिल्ली और देश भर के कॉलेज व विश्वविद्यालय परिसरों के आसपास चल रहे सभी प्राइवेट हॉस्टल, पीजी और छात्र आवासों का साइट इंस्पेक्शन और टाइम-बाउंड 'सेफ्टी ऑडिट' कराया जाए। इमारतों के स्वीकृत नक्शे, वास्तविक मंजिलों की संख्या, बेसमेंट के अवैध निर्माण, फायर-सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी (ढांचागत मजबूती) के अनुपालन की जांच की जाए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 सितंबर को होने वाली इस सुनवाई पर पूरे देश के छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग/कॉलेज हब के पीजी संचालकों की नजरें टिकी होंगी, क्योंकि अदालत एक राष्ट्रव्यापी सख्त दिशानिर्देश जारी कर सकती है।
