Dhadak 2 Review in Hindi: करण जौहर के बैनर में बनी फिल्म धड़क 2 भारतीय जाति व्यवस्था की सच्चाई पर्दे पर दिखाने का काम करती है, जिसमें तृप्ति डिमरी और सिद्धांत चतुर्वेदी ने अच्छा काम किया है। धड़क 2 न केवल एक खूबसूरती कहानी पर्दे पर पेश करती है बल्कि बताती है कि इस दौर में भी जाति के सामने इंसानी जान की कीमत कुछ भी नहीं है।
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Dhadak 2 Review in Hindi: ऐसा कहा जाता है कि इश्क इतना खूबसूरत होता है की दुनिया की बुराइयां भी उसे मैला नहीं कर पाती हैं लेकिन क्या ये वाकई सच है या फिर ख्वाबों की दुनिया में बोली गई वो मीठी बात जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। जब नीलेश (सिद्धांत चतुर्वेदी) नाम के एक दलित लड़के को विदिशा भारद्वाज (तृप्ति डिमरी) नाम की ब्राह्मण लड़की से इश्क होता है तो "अब ऊंच-नीच कहां है" कहने वाले लोग इंसानियत भूलकर फिर से कई सैकड़ों साल पहले पहुंच जाते हैं जब समाज के एक बड़े तबके को इंसान ही नहीं समझा जाता था। प्यार होने और प्यार के पूरे होने के बीच में जाति इतनी बड़ी हो जाती है कि नीलेश की जान की कीमत ही नहीं रह जाती है। ब्राह्मण परिवार की नाक नीलेश की जिंदगी से ज्यादा बड़ी हो जाती है लेकिन क्या नीलेश समाज के सामने हार मान जाएगा या फिर विदिशा का साथ पाकर अपने हक और प्यार की लड़ाई लड़ेगा? इन्हीं सब चीजों के आसपास घूमती है फिल्म धड़क 2 की कहानी, जिसे करण जौहर ने अपने बैनर तले बनाया है और इसे शाजिया इकबाल ने डायरेक्ट किया है।
तमिल मूवी परियेरुम पेरुमल की रीमेक धड़क 2 की राइटिंग शार्प है। जाति जैसे मुद्दे पर आधारित होने के बावजूद भी ये कहीं पर भी बोझिल नहीं लगती है। पहले ही सीन से धड़क 2 रिलेटेबल लगती है और जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसमें दिलचस्पी बढ़ती जाती है। कॉलेज पॉलिटिक्स हो या फिर एक खास जाति से होने की वजह से मिलने वाले ताने..., सभी चीजें रियल नजर आती हैं। शाजिया इकबाल और राहुल भांडवलकर ने मिलकर ऐसी दुनिया रची है, जिससे रिश्ता न रखने वाले भी नीलेश और विदिशा का दर्द महसूस करते हैं। इन दोनों को अपने म्यूजिक डायरेक्टर्स का भी खूब साथ मिला है, जिन्होंने धड़क 2 में सोलफुल सॉन्ग दिए हैं।
बात अगर सिद्धांत और तृप्ति की एक्टिंग की करें तो शाजिया ने उनसे कुछ हटकर कराया है। सिद्धांत एक दब्बू दलित लड़के के रोल में परफेक्ट लगे हैं, जो सिर्फ वकील बनना चाहता है। उसे समाज की ऊंच-नीच और कॉलेज की पॉलिटिक्स से मतलब नहीं है लेकिन जब ये सभी चीजें उसके सामने आती हैं तो वो भागने की जगह लड़ने का फैसला लेता है। तृप्ति डिमरी ने विदिशा का रोल निभाकर अपने फैंस की नाराजगी दूर की है। तृप्ति जब-जब ग्लैमरस रोल्स से हटकर कुछ करती हैं तो सीधे दिल में उतरती हैं और इस दफा भी वो दिल जीतने में कामयाब रही हैं। धड़क 2 के साथ सौरभ सचदेवा फिर से महफिल लूट ली है। सौरभ जब-जब स्क्रीन पर आते हैं तो शरीर में सिहरन पैदा होती है कि कुछ बुरा होने वाला है। धड़क 2 में दीक्षा जोशी, मंजिरी पुपाला, विपिन शर्मा, जाकिर हुसैन, प्रियांक तिवारी और साद बिलग्रामी को भी अच्छा स्क्रीन स्पेस मिला है और इन सभी ने इसका खूबसूरती से यूज किया है।
धड़क 2 समाज के लिए एक जरूरी फिल्म है, जिसे थिएटर में देखा जाना चाहिए। ये बड़े-बड़े शहरों में रहने वाले उन लोगों की आंखें खोलेगी, जो मानते हैं कि 70 सालों में देश पूरा बदल चुका है और अब समाज से ऊंच-नीच गायब हो चुकी है। जो लोग ऊंच-नीच का दर्द झेलते हैं, उन्हें ये मूवी बहुत प्रभावित नहीं करेगी क्योंकि उनके साथ हर दिन कुछ न कुछ ऐसा होता ही रहता है, जो फिल्म में दिखाया गया है। हालांकि धड़क 2 के दौरान उनकी आंखें भी कई जगह नम होगी।
अगर आप लम्बे वक्त से झकझोर देने वाली लव स्टोरी की तलाश कर रहे हैं और कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो ख्वाबों की दुनिया में नहीं बल्कि हकीकत के करीब नजर आए तो सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी की धड़क 2 आपके लिए है। मेरी तरफ से धड़क 2 को 3.5 स्टार्स, आप खुद थिएटर में इस मूवी को देखें और हमें कमेंट में जरूर बताएं कि आपको ये कैसी लगी।