Nayii Naveli Review: यामी गौतम स्टारर नई नवेली एक कन्फ्यूज्ड हॉरर कॉमेडी है, जिसका कॉन्सेप्ट पेपर पर कमाल का होगा लेकिन पर्दे पर आते-आते इसमें ना तो हॉरर ही ठीक से बचा है और ना ही कॉमेडी रह गई है।
Nayii Naveli Review: नो हॉरर, लिटिल-लिटिल कॉमेडी
Nayii Naveli Review: भारत में इस वक्त पौराणिक और लोक कथाओं से प्रेरित फिल्में बड़े पर्दे पर परोसने का मौसम चल रहा है। साउथ से लेकर बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री तक हर फिल्मकार इस बहती गंगा में हाथ धुलने की कोशिश कर रहा है। निर्माता आनंद एल. राय ने भी डायरेक्टर बालाजी मोहन के साथ मिलकर नई नवेली के रूप में ऐसी ही कहानी परोसी है लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या यामी गौतम स्टारर नई-नवेली आनंद एल राय और बालाजी मोहन की कोशिश सफल कर पायी है?
फिल्म नई नवेली की कहानी भगवान राम और रावण की महागाथा रामायण से प्रेरित है और त्रेताकाल से ही शुरु होती है, जब भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद एक शक्तिशाली पत्थर विभीषण-मंदोदरी को सौंपा था। ये पत्थर पापी शक्तियों को खुद में समाहित किए हुए है, जो त्रेतायुग से चलता हुआ द्वापरयुग और फिर कलयुग तक पहुंच गया है। सालों-साल दुनिया से छुपा ये पापी शक्तिशाली पत्थर अचानक से कलयुग में आकर अपना रंग दिखाता है और किसी से ना पराजित होने वाला रावण पैदा कर देता है। अगर इस रावण के हाथ ये शक्तिशाली पत्थर लग जाएगा तो फिर से दुनिया में रावण युग आ जाएगा लेकिन हम सबको पता है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों ना हो, जीत हमेशा अच्छाई यानि कि भगवान राम की ही होती है। नई नवेली भी बुराई पर अच्छाई की यही जंग पर्दे पर पेश करती है, जिसमें त्रेतायुग के शक्तिशाली पत्थर की चमत्कारी कहानी से लेकर मेरठ की शादियों में होने वाली लड़ाइयों की लोककथा और राम-रावण वंश की काल्पनिक दास्तां तक सबकुछ है। TimesNow NavBharat पर ये भी पढ़ें: Prahaar Movie Review: कसाब को बैठाकर बिरयानी क्यों खिलाई? उज्जवल निकम ने दिया जवाब
डायरेक्टर बालाजी मोहन की फिल्म नई नवेली का कॉन्सेप्ट सुनने में बेहद कमाल का लगता है लेकिन परेशानी ये है कि पर्दे पर ये विजन उस तरह से नहीं आ पाया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ का रहने वाला एक देसी परिवार जहां मायावी लड़की आ जाती है, जिसे त्रेतायुग के शक्तिशाली पत्थर की रक्षा करनी है क्योंकि ये उसके वंश की जिम्मेदारी है। इस लड़ाई में वो सबकुछ हो सकता था, जो दर्शकों को हिलने का मौका ना देता लेकिन बालाजी मोहन का डायरेक्शन बेहद कमजोर है। इसकी वजह से ना केवल नई नवेली हल्की पड़ गई बल्कि बेहतरीन कलाकारों की जमात होने के बावजूद भी कमेडी सीन्स वो हंसी पैदा नहीं कर पाते हैं, जिसकी उम्मीद थी। नई नवेली मेरठ की गलियों में रेंगती वो कहानी है, जिसे अपनी मंजिल तो पता है लेकिन रास्ता बुरी तरह से भटक चुकी है। TimesNow NavBharat पर ये भी पढ़ें: Jailer 2 Review: रजनीकांत की दमदार वापसी, कॉमेडी और एक्शन के बीच कमजोर पड़ी कहानी
यामी गौतम नई नवेली की धुरी हैं, जिनके आसपास पूरी कहानी घूमती है। उनके कंधों पर भारी जिम्मेदारी थी लेकिन परेशानी ये है कि उनके कैरेक्टर में करने के लिए कुछ है ही नहीं। ये कैरेक्टर बस एक सीधी लाइन में चलता रहता है। यामी गौतम के द्वारा निभाए गए कैरेक्टर्स अक्सर याद रह जाते हैं लेकिन जो फिल्म पूरी की पूरी ही उनके कैरेक्टर के आसपास घूमती हो, वो बेहद सामान्य रह जाए तो लिखावट पर सवाल खड़े होना लाजमी हैं। यामी के अलावा मूवी में आदिनाथ कोठारे, सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ, सोनल झा, सुष्मिता मुखर्जी, सुनील सिन्हा, राजेश दुबे, आदित्य कुलश्रेष्ठ और प्रतीक पचौरी जैसे बेहतरीन कलाकार हैं, जिन्होंने बेस्वाद कॉमेडी सीन्स में जान भरने की पूरी कोशिश की है।
अब आते हैं आखिरी फैसले पर कि क्या यामी गौतम स्टारर नई-नवेली एक बेहतरीन दशहरा रिलीज है तो जवाब है नहीं। कुछ कॉमेडी सीन्स को छोड़ दें तो नई नवेली पूरी तरह से निराश करती है। अच्छे कॉन्सेप्ट के बावजूद भी ये फिल्म वन टाइम वॉच भी नहीं बन पायी है, जिसके लिए पूरी तरह से निर्माता जिम्मेदारी हैं क्योंकि इसके कलाकारों ने सीन्स में जान भरने की पूरी कोशिश की है। हम अपनी ओर से नई नवेली को 1.5 स्टार देते हैं।