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तिरंगा लेकर प्रदर्शन करना क्या गैरकानूनी है? संविधान, पुलिस की शक्तियां और नागरिकों के अधिकार समझें

तिरंगा देश की आजादी और संप्रभुता का प्रतीक है। संविधान नागरिकों को इसे सम्मानपूर्वक फहराने का अधिकार देता है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून और सार्वजनिक व्यवस्था का पालन जरूरी है।

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तिरंगा लेकर प्रदर्शन करना क्या गैरकानूनी है? (AI Photo)
Authored by: शिशुपाल कुमार
Updated Oct 17, 2026, 17:38 IST
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आजादी के मतवालों से लेकर इमरजेंसी के दौर में 'लोकतंत्र सेनानी' तक और फिर अन्ना आंदोलन से लेकर आज के कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनों तक एक चीज कॉमन दिखती है, वो है अपना प्यारा झंडा- तिरंगा। हाथ में तिरंगा लिए भारत में आंदोलनकारी हर दौर में सड़क पर उतरते रहे हैं। आजादी से पहले तिरंगा भारत का आधिकारिक झंडा नहीं था, स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे बनाया और फिर इसमें कई बदलाव हुए। आज के स्वरूप वाला झंडा 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था। खैर ये इतिहास की बात है। अब आते हैं वर्तमान पर, 16 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के कनॉट पैलेस में तिरंगा मार्च का ऐलान किया। सीजेपी चीफ अभिजीत दिपके इससे पहले कि ये मार्च निकाल पाते, पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सीजेपी ने इसे लेकर सवाल उठाए, कहा कि सरकार और पुलिस हमें तिरंगा फहराने से रोक रही है। अब सवाल ये है कि क्या तिरंगा लेकर प्रदर्शन करना गैरकानूनी है? क्या है संविधान, पुलिस की शक्तियां और नागरिकों का अधिकार, आइए इसे समझते हैं।

पुलिस ने तिरंगा फहराने के लिए दिपके को अरेस्ट या कोई और वजह?

ये सच है कि 16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन क्या ये सिर्फ तिरंगा फहराने के कारण हुआ? जवाब है नहीं। तिरंगा फहराने को लेकर अपनी गाइडलाइन है, लेकिन दिपके को इस वजह से गिरफ्तार नहीं किया गया। राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल और प्रदर्शन को फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत नियंत्रित किया जाता है। फ्लैग कोड के अनुसार आम नागरिक भी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर सकते हैं, बशर्ते उसकी गरिमा और सम्मान बनाए रखा जाए।

यहां दो अलग-अलग बातों को समझना जरूरी है। पहली, राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रदर्शन करना और दूसरी, उस प्रदर्शन के दौरान लागू कानूनों का पालन करना। तिरंगा हाथ में होने से किसी प्रदर्शन को स्वतः गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता। उसी तरह, तिरंगा लेकर चलने से प्रदर्शनकारियों को कानून से छूट भी नहीं मिल जाती।

सीजेपी के तिरंगा मार्च के दौरान झंडे के साथ एक प्रदर्शनकारी (फोटो- PTI)

सीजेपी के तिरंगा मार्च के दौरान झंडे के साथ एक प्रदर्शनकारी (फोटो- PTI)

दिपके ने किस कानून का क्या उल्लंघन?

दिपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। शुक्रवार को मार्च शुरू होने से कुछ घंटे पहले पुलिस ने अभिजीत दीपके केआवास पर पहुंचकर उन्हें प्रदर्शन नहीं करने को लेकर नोटिस थमाया था। अधिकारियों के अनुसार नोटिस में कनॉट प्लेस में निषेधाज्ञा लागू होने, इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बाजार, अस्पताल और अहम सरकारी इमारतें होने के साथ-साथ भगदड़ मचने की आशंका का हवाला दिया गया था। नोटिस में कहा गया है, "यह पत्र माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस में बिना किसी कानूनी अनुमति के एकत्र होने के आपके सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया पर की गई अपीलों के संदर्भ में जारी किया जा रहा है।"

नोटिस में कहा गया है कि कनॉट प्लेस एक व्यस्त वाणिज्यिक केंद्र है और इसमें प्रवेश तथा निकास के सीमित बिंदु हैं तथा एक सर्किल पर जमा हुई भीड़ जल्दी ही दूसरों सर्किल को बाधित कर सकती है, जिससे भीड़ को हटाना और आपातकालीन निकास कठिन हो सकता है। कनॉट प्लेस में राजीव चौक मेट्रो स्टेशन भी मौजूद है, जो ब्लू और येलो लाइन के बीच एक महत्वपूर्ण ’इंटरचेंज’ है और नेटवर्क के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है जिससे प्रतिदिन औसतन दो लाख यात्रियों की आवाजाही होती है। इस इलाके में भीड़ जमा होने से जाम और भगदड़ का गंभीर खतरा पैदा होता है।

इसमें कहा गया है कि यह मार्च अमित सैनी बनाम पुलिस आयुक्त मामले में जारी निर्देशों का भी उल्लंघन करेगा, जिसमें ऐसी सभाओं के कारण यात्रियों को होने वाली असुविधा पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि इन बातों पर विचार करते हुए और कनॉट प्लेस में एक गैर-कानूनी सभा से सार्वजनिक व्यवस्था तथा अन्य नागरिकों के अधिकारों को पैदा होने वाले गंभीर जोखिम को देखते हुए, वर्तमान में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। निषेधाज्ञा का कोई भी उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और कानून के अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई को आमंत्रित करेगा। नोटिस में कहा गया है, "इसलिए, दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29, 30, 31, 32 और 33 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आपको कनॉट प्लेस के आसपास के क्षेत्र में किसी भी रूप में प्रदर्शन, जुलूस, रैली आयोजित करने, हथियार के रूप में प्रयोग किए जाने वाले किसी भी उपकरण को ले जाने या लाउडस्पीकर का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया जाता है।"

क्या आम नागरिक फहरा सकता है तिरंगा?

इतना तो स्पष्ट हो गया है कि अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी तिरंगा फहराने को लेकर हुई नहीं हुई है। अब आते हैं कि तिरंगा फहराने पर देश का कानून क्या कहता है। साल 2004 से पहले आम नागरिक के लिए झंडा फहराने में कानूनी अड़चने थी, जिसे लेकर उद्योगपति नवीन जिंदल सुप्रीम कोर्ट गए थे और 23 जनवरी 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि सम्मान और गरिमा के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकार है। हालांकि, यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है और इस पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के वकील अमित द्विवेदी इसपर कहते हैं, "तिरंगा को लेकर पहले था ऐसा कि आप ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते। बाद में ‘भारत संघ बनाम नवीन जिंदल एवं अन्य’ के केस के फैसले के बाद तिरंगा फहराने के नियम बदलाव हुआ। हालांकि तिरंगे का सम्मान जरूरी है, अगर इसका उल्लंघन होता है फिर दिक्कत है।"

तिरंगा फहराने को लेकर क्या कहता है कानून?

दिल्ली पुलिस ने कल के मार्च से पहले तिरंगा फहराने को लेकर गाइडलाइन भी जारी की थी। जिसका उल्लंघन करना कानूनी जुर्म है। राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े प्रमुख नियम भारतीय ध्वज संहिता, 2002 (Flag Code of India) और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में दिए गए हैं।

  • कौन फहरा सकता है: भारत का कोई भी नागरिक, निजी संगठन और शैक्षणिक संस्थान राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकते हैं।
  • कब फहरा सकते हैं: तिरंगा केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही नहीं, बल्कि साल के किसी भी दिन फहराया जा सकता है।
  • रात में तिरंगा फहराना: खुले स्थान पर या किसी नागरिक के घर पर तिरंगा दिन और रात, दोनों समय फहराया जा सकता है।
  • तिरंगे का आकार: राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होना चाहिए। इसकी लंबाई और ऊंचाई का अनुपात 3:2 होना जरूरी है।
  • कपड़े का नियम: तिरंगा खादी, कपास, पॉलिएस्टर, ऊन या रेशम जैसे अनुमत कपड़ों से बनाया जा सकता है। मशीन से बना तिरंगा भी मान्य है।
  • सम्मान का ध्यान रखें: तिरंगे को जमीन, फर्श या पानी में घसीटने से बचाएं। उसे साफ-सुथरा और सम्मानजनक स्थिति में रखें।
  • दूसरे ध्वज के साथ प्रदर्शन: किसी अन्य ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर या उसके बराबर नहीं लगाया जाना चाहिए।
  • कपड़ों और सजावट में इस्तेमाल: तिरंगे का इस्तेमाल कमर के नीचे पहने जाने वाले कपड़ों, रूमाल या सजावटी झालर के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
  • वाहनों पर तिरंगा: हर व्यक्ति अपने वाहन पर मनमाने तरीके से राष्ट्रीय ध्वज नहीं लगा सकता। वाहनों पर ध्वज लगाने के लिए विशेष नियम हैं।
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तिरंगे का अपमान करने पर क्या सजा हो सकती है?

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने, उसे जलाने, विकृत करने, कुचलने या अन्य तरीके से अपमानित करने जैसे कृत्यों पर कार्रवाई हो सकती है। इस कानून की धारा 2 के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। सजा का निर्धारण मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होता है।

लोकतंत्र की असली ताकत संतुलन में

अंत में तिरंगे का सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों ही भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं। तिरंगा लेकर सड़क पर उतरना अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज की आड़ में कानून से छूट भी नहीं मिलती। लोकतंत्र की असली ताकत इसी संतुलन में है, जहां नागरिक बिना डर अपनी बात रख सकें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर की जाने वाली हर कार्रवाई भी संविधान और कानून की कसौटी पर खरी उतरे।

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