Delhi Crime 3 Series Full Review: नेटफ्लिक्स की पॉपुलर क्राइम थ्रिलर सीरीज 'दिल्ली क्राइम 3' रिलीज हो चुकी है। अगर आप भी इस सीरीज को देखने के तैयारी कर रहे हैं, तो इस रिव्यू को आपको एक बार जरूर पढ़ लेना चाहिए। इस सीरीज में क्या बुरा और क्या अच्छा है?
Image Source: Netflix
Delhi Crime 3 Series Full Review: नेटफ्लिक्स की पॉपुलर क्राइम थ्रिलर सीरीज 'दिल्ली क्राइम' का तीसरा सीजन आखिरकार रिलीज हो गया है और ये एक बार फिर से दर्शकों को दिल्ली की सड़कों पर क्राइम की काली सच्चाई से रूबरू करा रही है। रिचा अनजिलव की क्रिएटेड इस सीरीज का पहला सीजन 2020 में आया था, जो निर्भया केस पर बेस्ड था और इंटरनेशनल एमी जीत चुका था। दूसरा सीजन 2022 में आया, जो 26/11 केस को टच करता था। अब तीसरा सीजन ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मुद्दे पर फोकस करता है, जो आज के समय की सबसे सेंसिटिव और रियल प्रॉब्लम्स में से एक है। शेफाली शाह की लीड रोल वाली ये सीरीज हमेशा की तरह रॉ, रियलिस्टिक और इमोशनली चार्ज्ड है। लेकिन क्या ये सीजन पहले वाले जितना इंपैक्टफुल है? तो चलिए जानते हमारे इस रिव्यू में।
सीजन 3 की स्टोरी एक छोटे से केस से शुरू होती है। AIIMS हॉस्पिटल के बाहर एक घायल बच्ची मिलती है, जिसकी मां गायब है। दिल्ली पुलिस की फेमस DCP वर्तिका चतुर्वेदी (शेफाली शाह) और उनकी टीम इस केस को सॉल्व करने उतर पड़ती है। लेकिन जैसे-जैसे इन्वेस्टिगेशन आगे बढ़ती है, ये केस एक बड़े ह्यूमन ट्रैफिकिंग नेटवर्क से जुड़ जाता है। नॉर्थईस्ट के रिमोट एरियाज से कमजोर लड़कियों को लाकर उन्हें सेक्स ट्रेड या फोर्स्ड मैरिज के लिए नॉर्थ इंडिया में बेचा जाता है। टीम में ACP नीति सिंह (रसिका दुगल) और इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह (राजेश तैलंग) जैसे अफसरों की मदद से वर्तिका नेटवर्क के पीछे की मास्टरमाइंड 'मीना' उर्फ 'बड़ी दीदी' (हुमा कुरैशी) तक पहुंचने की कोशिश करती है।
'दिल्ली क्राइम' सीजन 3 की सबसे बड़ी ताकत इसके एक्टर्स हैं। शेफाली शाह एक बार फिर DCP वर्तिका के रोल में कमाल कर जाती हैं। वो एक स्ट्रॉन्ग विमेन को प्ले करती हैं जो इमोशंस को कंट्रोल में रखती हैं, लेकिन आंखों से सब कुछ बोल जाती हैं।हुमा कुरैशी का रोल मीना के रूप में गेम-चेंजर है। वो एक रूथलेस ट्रैफिकर को इतनी मैग्नेटिक तरीके से प्ले करती हैं कि आप उनसे नजरें नहीं हटा पाते। रसिका दुगल ACP नीति के रोल में अंडरस्टेटेड ब्रिलियंस दिखाती हैं, खासकर पर्सनल स्ट्रगल्स के सीन में। राजेश तैलंग का भूपेंद्र सिंह एक रिलायबल सपोर्टिंग कैरेक्टर है, जो टीम को ग्राउंडेड फील देता है।
अब नेगेटिव्स की बात करें तो पेसिंग एक समस्या है। सीरीज स्टेडी पेस पर चलती है, जो रियलिस्टिक तो है, लेकिन कभी-कभी इंटेंसिटी की कमी खलती है। पहले सीजन की तरह इमोशनल पुल इतना स्ट्रॉन्ग नहीं, कुछ सीन ड्रैग फील होते हैं, खासकर मिड-सीजन में। ट्रैफिकिंग नेटवर्क को अनवेल करने में थोड़ा प्रेडिक्टेबल लगता है। अगर आप फास्ट-पेस्ड थ्रिलर्स जैसे 'सैक्रेड गेम्स' या 'मिर्जापुर' पसंद करते हैं, तो ये थोड़ा स्लो लगेगा। बैकग्राउंड म्यूजिक भी मिनिमल है, जो अम्बिएंस तो बनाता है लेकिन एक्साइटमेंट नहीं जोड़ता। कुल मिलाकर, वीकनेसेज माइनर हैं, लेकिन पहले सीजन्स की तुलना में ये थोड़ा कम इंपैक्टफुल लगता है।
'दिल्ली क्राइम' सीजन 3 एक नेटली क्राफ्टेड सीरीज है, जो क्राइम स्टोरीटेलिंग को इमोशनल और मोरल डेप्थ देती है। ये सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि सोशल अवेयरनेस का टूल है। ट्रैफिकिंग जैसी प्रॉब्लम पर ईमानदारी से सवाल उठाती है। शेफाली और हुमा की परफॉर्मेंसेज इसे मस्ट-वॉच बनाती हैं।