मशहूर गीतकार जहीर आलम (Zaheer Alam) को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है कि पूरे म्यूजिक इंडस्ट्री में मातम पसर गया है। तुम तो ठहरे परदेसी (Tum To Thehre Pardesi) सॉन्ग के गीतकार जीहर आलम का निधन हो गया है। इस खबर से सभी लोग दुखी हो गए हैं। सोशल मीडिया पर सभी लोग जहीर आलम को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। सादगी से भरी जिंदगी जीने वाले जहीर इकबाल की मौत से लोगों को तगड़ा झटका लगा है। आइए नजर डालते है इस रिपोर्ट पर...(ये भी पढ़ें-तमिल निर्माता RB Choudary की कार एक्सीडेंट में हुई मौत, रजनीकांत-चिरंजीवी ने दी श्रद्धांजलि)
जहीर आलम का निधन
जहीर आलम, जिन्होंने 90 के दशक के मशहूर गाने तुम तो ठहरे परदेसी को लिखा था, उनका सोमवार को नागपुर में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।जहीर आलम नागपुर के मोमिनपुरा इलाके में एक छोटे से घर में रहते थे। उन्होंने ऐसा गाना लिखा, जिसने पूरे देश में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की, लेकिन इसके बावजूद उनकी जिंदगी संघर्ष और आर्थिक तंगी में ही बीती। पिछले कुछ सालों में लोग उन्हें लगभग भूल चुके थे।
गुमनामी में जी रहे थे जहीर
'तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे' सॉन्ग को शुरुआत में लोकल स्तर पर गाया गया था। बाद में अल्ताफ राजा ने इसे अपनी आवाज दी और यह गाना 90 के दशक के सबसे बड़े हिट गानों में शामिल हो गया। इस गाने ने संगीत इंडस्ट्री में कई लोगों को पहचान और सफलता दिलाई। हालांकि, इतना बड़ा हिट गाना लिखने के बावजूद जहीर आलम को उनकी मेहनत के मुताबिक पहचान और आर्थिक फायदा नहीं मिल पाया। वह सादगी भरी जिंदगी जीते रहे और आखिर तक सामान्य हालात में ही रहे। जानकारी के लिए बता दें कि तुम तो ठहरे परदेसी गीत भले ही काफी फेमस हुआ था, लेकिन बताया जाता है कि इसका जहीर आलम को कुछ खास फायदा नहीं हुआ था। उनका जीवन आर्थिक तंगी में ही बीता था। उन्हें इस गाने के लिए सिर्फ 3 हजार रुपये मिले थे। अब शायद उनकी मौत के बाद लोग जहीर और उनकी फैमिली को वो सम्मान दें जिसके वो असली हकदार थे।
