Saba Azad on Deepika Padukone's 8-Hour Shift Demand: बॉलीवुड इंडस्ट्री की खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने कुछ महीनों पहले 8 घंटे की शिफ्ट की डिमांड की थी। एक्ट्रेस की इस डिमांड के चलते इंटरनेट पर अलग ही बहस छिड़ गई थी। बॉलीवुड से लेकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री में कई सेलेब्स ने दीपिका पादुकोण की इस डिमांड का समर्थन भी किया। ऐसे में अब बॉलीवुड एक्ट्रेस सबा आजाद (Saba Azad) ने दीपिका पादुकोण की इस डिमांड पर खुलकर बात की है। उन्होंने इस मामले में दीपिका पादुकोण की बातों का समर्थन किया है।
दीपिका पादुकोण की डिमांड पर सबा आजाद ने दिया रिएक्शन
सबा आजाद ने यह सवाल भी उठाया कि किसी महिला से बच्चा होने के तुरंत बाद 8 घंटे काम करने की उम्मीद क्यों की जाती है। इस इंडस्ट्री में जेंडर के आधार पर वेतन में इतना बड़ा अंतर क्यों है। सबा आजाद ने यह भी माना कि कुछ सुधार हुए तो लेकिन अभी सफर लंबा है। स्क्रीन से बात करते हुए सबा आजाद ने कहा, 'सबसे ज्यादा प्रगतिशील घरों में भी औरतें काम पर जा सकती हैं? लेकिन घर वापस आने के बाद उन्हें ही सबका ध्यान और खाना खिलाना पड़ता है। लड़कों से घर पर रहने को नहीं कहा जाता है लेकिन लड़कियों से कहते हैं कि रात 8 बजे के बाद बाहर न निकलें। लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता है। दुनिया में घरेलू हिंसा जैसी चीजें मौजोद हैं। 'मैनोस्फीयर' अभी भी एक्टिव है। मुझे लगता है कि हम अभी भी पीछे की ओर चल रहे हैं।' (इसे भी पढ़ें: Drishyam 3 Box Office Collection Day 5: मोहनलाल स्टारर ने दर्ज कराई 47% की गिरावट, कमाई रही इतने करोड़)

Saba Azad
दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शिफ्ट की डिमांड पर सबा आजाद ने कहा, 'कला का छेत्र हमेशा से अलग ही रहा है और इसने समाज की सोच को चुनौती भी दी है। हमारी इंडस्ट्री में अब महिलाओं को काम के खूब मौके मिलते हैं। हालात काफी बेहतर हुए हैं। लेकिन क्या आज भी वेतन में बहुत अंतर है? नहीं ऐसा नहीं है। क्या हम आज भी उन महिलाओं के बारे में सोचते हैं, जिन्होंने बच्चे को जन्म दिया है और जो 8 घंटे काम करने की मांग कर रही हैं? इन चीजों में अभी तक कोई सुधर नहीं है और संघर्ष जारी है।' (इसे भी पढ़ें: 2026 में 100 करोड़ी बनकर इन फिल्मों ने निर्माताओं को किया मालामाल, 'Drishyam 3' ने भी रचा इतिहास)
शादीशुदा महिलाओं को मिल रहा है काम
सबा आजाद ने आगे कहा कि महिलाओं को अभी भी उनका हक नहीं मिल रहा है। उन्हें अक्सर उनकी जगह दिखा दी जातो है। फिलहाल चीजें बेहतर हो रही हैं। महिलाओं के ओटीटी पर भी कंटेंट है। शादीशुदा होने के बाद भी ऐसा नहीं है कि किसी को काम मिलना बंद हो जाता है। शादीशुदा महिलाएं भी अच्छा कम कर रही है। इसलिए ओटीटी को धन्यवाद दिया जा सकता है। अब 'स्टारडम' के मुकाबले 'कंटेंट' की पूछ हो रही है।
