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'फिल्म देखकर हिंसा की नकल करने वाले बेवकूफ हैं', Sandeep Reddy Vanga के समर्थन में बोले Amaal Mallik

  • Authored by: अभय
  • Updated Nov 5, 2026, 01:46 PM IST

Amaal Mallik on Movie Violence: आंध्र प्रदेश में चेनसॉ हमले के बाद फिल्मों में हिंसा दिखाने को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सिंगर अमाल मलिक भी इस चर्चा में शामिल हो गए हैं।

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संदीप रेड्डी वांगा के समर्थन में उतरे अमाल मलिक, बोले- सिनेमा एक काल्पनिक दुनिया है, हर चीज कॉपी नहीं करनी चाहिए (Image Source: IMDb)

Amaal Mallik on Movie Violence: सिंगर और म्यूजिक कंपोजर अमाल मलिक (Amaal Mallik) अपने गानों के साथ-साथ बेबाक बयानों को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा को लेकर बहस चल रही है। इस मामले में अब अमाल ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने फिल्ममेकर्स का बचाव करने के साथ ही एंटरटेनमेंट जगत के कुछ दूसरे पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी अपराध के लिए सिर्फ फिल्मों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। तो चलिए जानते हैं कि अमाल मलिक ने संदीप रेड्डी वांगा (Sandeep Reddy Vanga) के पक्ष में क्या बात बोली है।

अमाल मलिक ने किया संदीप रेड्डी वांगा का सपोर्ट

आंध्र प्रदेश में एक स्कूल के अंदर चेनसॉ से हुए हमले के बाद सोशल मीडिया पर फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने ‘एनिमल’ (Animal) जैसी फिल्मों पर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह के सीन लोगों को हिंसा के लिए उकसा सकते हैं। इसके बाद संदीप रेड्डी वांगा ने इसको लेकर रिएक्शन दिया था। अब अमाल मलिक भी संदीप रेड्डी वांगा के समर्थन में उतर आए हैं। अमाल मलिक ने लिखा कि 'मैं समझ सकता हूं कि लोग इस बात को लेकर चिंतित क्यों हैं। फिल्में और म्यूजिक युवाओं को प्रभावित कर सकते हैं और कुछ बच्चे जो देखते हैं, उसकी नकल भी करते हैं। फिल्ममेकर्स को ये सोचने की जरूरत है कि वे फिल्मों में हिंसा को किस तरह दिखाते हैं। लेकिन किसी के किए गए कामों के लिए सिर्फ सिनेमा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। परिवार के संस्कार, परवरिश, अलग-अलग राज्यों का राजनीतिक माहौल और हर इंसान की अपनी सोच और रिएक्शन भी मायने रखते है। लोगों के अनुभव और उनके साथ हुए बुरे हादसे भी उन पर असर डाल सकते हैं। हर इंसान के अंदर अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं, लेकिन इनमें से कोई भी बात हिंसा को सही नहीं ठहराती।'

'मैं कभी सपोर्ट नहीं करूंगा'

अमाल मलिक ने पोस्ट में आगे लिखा कि 'मैं कभी भी ऐसे किसी इंसान का समर्थन नहीं करूंगा, जो स्कूल, कॉलेज या किसी दूसरी जगह पर जाकर चेनसॉ से किसी की हत्या करे। ये बेहद डरावना और पूरी तरह गलत है। आंध्र प्रदेश में हुई इस घटना पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन हमें ये नहीं मान लेना चाहिए कि इसके पीछे किसी एक फिल्म, गाने या फिल्ममेकर का हाथ है। मैंने 'एनिमल' (Animal), 'कबीर सिंह' (Kabir Singh), 'धुरंधर' (Dhurandhar), 'केजीएफ' (KGF) और ऐसी कई दूसरी फिल्में देखी हैं। मुझे ये पसंद भी आई हैं, लेकिन कुछ फिल्मों के कुछ सीन को लेकर मुझे आपत्ति भी रही है। फिल्म एक कहानी होती है और हमें यह समझना चाहिए कि पर्दे पर जो कुछ भी दिखाया जाता है, उसे अपनी जिंदगी में उतारना जरूरी नहीं है। एक फिल्म बनाने में कई लोग मिलकर काम करते हैं। अगर 70, 80 और 90 के दशक में सोशल मीडिया और आज की तरह नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले लोग होते, तो उस दौर की फिल्मों में भी आलोचना करने के लिए उन्हें बहुत कुछ मिल जाता।'

अमाल मलिक ने उठाए सवाल

अमाल मलिक ने पोस्ट में कई सवाल भी उठाए। अमाल मलिक ने लिखा कि 'फिल्मों की एज रेटिंग का पालन किया जाना चाहिए। माता-पिता को 'A' रेटिंग वाली फिल्में देखने के लिए छोटे बच्चों को साथ नहीं लाना चाहिए। हम फिल्मों के प्रभाव को गंभीरता से ले सकते हैं, लेकिन दर्शकों से ये उम्मीद भी होनी चाहिए कि वे कहानी और असल जिंदगी के बीच का फर्क समझें। अगर हम फिल्मों की आलोचना करते हैं, तो हमें निष्पक्ष होकर गानों पर भी बात करनी चाहिए। 'कर गई चुल्ल', 'रोम रोम रोमांटिक', 'बीड़ी जलइले', 'पिंक लिप्स', 'चिकनी चमेली' और 'मुन्नी बदनाम' जैसे गानों को भी बैन कर देना चाहिए। आखिर इन गानों को इतना पसंद क्यों किया जाता है और रियलिटी शोज में इनका इस्तेमाल क्यों होता है? इसके अलावा फिल्मों से बाहर भी कई ऐसे गाने और कंटेंट मौजूद हैं, खासकर यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मिलने वाले रैप म्यूजिक में। अगर आप किसी फिल्म से इतने प्रभावित हो रहे हैं, तो आप बेवकूफ हैं। अगर हिंसा या आपत्तिजनक कंटेंट वाली हर फिल्म, गाने या शो को लोगों के कामों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा, तो फिर 'पुष्पा', 'केजीएफ', 'लेटेंट' और दूसरे कॉमेडी शोज को भी बैन कर देना चाहिए।आखिर हम सभी नैतिकता के ठेकेदार क्यों न बन जाएं और हर चीज पर बैन क्यों न लगा दें? सिनेमा लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति के अपराध करने के पीछे यह अकेली वजह नहीं होती।'

Abhay
अभयauthor

अभय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एंटरटेनमेंट डेस्क पर चीफ कॉपी एडिटर हैं। टीवी पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल करने वाले अभय मनोरंजन जगत की खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। वे फिल्म, टीवी, ओटीटी और सेलिब्रिटी अपडेट्स को सरल भाषा में और सटीक जानकारी के साथ पेश करने के लिए जाने जाते हैं। अभय अबतक 9,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं। तेजी से बदलती एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खबरों को पकड़ने, रिसर्च करने और समय पर प्रकाशित करने में उनकी खास दक्षता है।

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