Times Now Navbharat
live-tv
Premium

ट्रंप को झटका लगते ही क्यों रॉकेट बना भारतीय बाजार, क्या फिर से ऊंची उड़ान भरने को तैयार?

नवंबर के चार दिन के कारोबार में भारतीय बाजार के वैल्यूएशन में 18,23,272 करोड़ का इजाफा हुआ है। वहीं, इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स करीब 6 फीसदी भाग चुके हैं। जबकि, FII ने 17 हजार करोड़ की खरीदारी की है।

Image
ट्रंप की हार से बाजार में बहार
Authored by: यतींद्र लवानिया
Updated Nov 5, 2026, 13:31 IST
Follow on Google News

Trump Vs Indian Stocks Market Trends : अमेरिका में हुए मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी की हार से डोनाल्ड ट्रंप को लगा झटका भारतीय शेयर बाजार के लिए किक स्टार्ट मोमेंट बन गया है। नवंबर मे 4 दिन के कारोबार में भारतीय बाजार के वैल्यूएशन में 18 लाख करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है। वहीं, पिछले पांच दिन में सेंसेक्स और निफ्टी में 6 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है।

भारतीय बाजार की यह तेजी साफ तौर पर बता रही है कि ट्रंप को लगा झटका भारतीय बाजार के लिए अच्छा है। क्योंकि, इसकी वजह से निवेशकों में बड़े जियो-पॉलिटिकल बदलाव की उम्मीद जगी है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में राहत मिल सकती है। खासतौर पर क्रूड ऑयल के दाम 16 फीसदी तक लुढ़क चुके हैं।

क्या सिर्फ हार से बाजार में बहार?

भारतीय शेयर बाजार के लिए सिर्फ ट्रंप की हार अकेली वजह नहीं है। बल्कि, एक साथ कई फैक्टर निवेशकों के रिस्क ऑन सेंटिमेंट को मजबूत कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में ट्रंप की हार भले ही मार्केट का डायरेक्शन बदलने के लिए बड़ा ट्रिगर है। लेकिन, मार्केट को मौजूदा लेवल से ऊपर बढ़ने और सस्टेन करने के लिए कॉरपोरेट अर्निंग के इंजन से ही ताकत मिलती है।

बाजार के भागने की कई वजह

ट्रंप की हार को जियो-पॉलिटिक नजरिये से एक्सपर्ट पश्चिम एशिया में शांति और क्रूड सप्लाई सामान्य होने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। आमतौर पर ग्लोबल इक्विटी मार्केट जियो-पॉलिटिक्स के फ्रंट रनर रहते हैं। ऐसे में इक्विटी बाजार फिलहाल सस्ते क्रूड को प्राइस इन कर रहा है। सस्ता क्रूड ओवरऑल ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बूस्टर का काम करता है।

तिमाही नतीजों ने फूंकी जान

अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में जब तक अमेरिकी चुनावों के नतीजे भी नहीं आए थे और क्रूड भी 118 से 115 डॉलर के आसपास था, तब भी भारतीय बाजार में खरीदारी का ट्रेंड उभरने लगा था। इसके पीछे असल में भारतीय कंपनियों की कमाई है। Q2 (जुलाई से सितंबर) के दौरान निफ्टी की 50 कंपनियों की औसत प्रॉफिट ग्रोथ 20 फीसदी से ऊपर रही है। इस लिहाज से यह करीब 11 तिमाहियों का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।

खपत के आंकड़ों ने दिया भरोसा

भारत के कॉरपोरेट सेक्टर की कमाई के लिए घरेलू खपत सबसे बड़ा स्रोत है। भले ही पूरी दुनिया में मंदी की आहट नजर आ रही हो, लेकिन घरेलू खपत के दम पर भारतीय बाजार के पास अच्छा प्रदर्शन करने की गुंजाइश रहती है। महंगे क्रूड के बाद भी जुलाई से सितंबर तिमाही में घरेलू खपत के आंकड़ो ने निवेशकों को भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर भरोसा दिया है। इसके अलावा अक्टूबर-नवंबर में त्योहारी मांग की वजह से Q3 में भी अच्छे नतीजों की उम्मीद है।

AI के खिलाफ भारत का IT सेक्टर बचाव

पिछले 2 साल से भारतीय बाजार के निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे की बड़ी वजह रहे IT Stocks में पिछले एक महीने में करीब 16 फीसदी की तेजी आई है। हालांकि, ईयर टू डेट (YTD) लिहाज से अब भी Nifty IT करीबी 12 फीसदी नीचे है। लेकिन, जैसे ही दुनियाभर के AI और चिप हैवी इंडेक्स लुढ़कने शुरू हुए, तो भारत के आईटी स्टॉक्स में खरीदारी बढ़ गई। निवेशकों के लिए भारत का आईटी सेक्टर एआई के निवेश के खिलाफ हेजिंग का विकल्प बन गया है। पिछले एक महीने में जहां अमेरिका, जापान, चीन और ताइवान के टॉप एआई और चिप स्टॉक्स में 5 ट्रिलियन डॉल से ज्यादा की बिकवाली हुई है। वहीं, इस दौरान Nifty IT में जरदस्त खरीदारी हुई है।

FII की रिकॉर्ड बिकवाली ने तोड़ा

NSDL/CDSL के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बाजार से इस साल विदेशी निवेशकों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है। विदेशी निवेशकों की निकासी के लिहाज से यह भारतीय बाजार के इतिहास का सबसे खराब वर्ष रहा है। हालांकि, साल के आखिर में विदेशी निवेशक कई वजहों से भारतीय बाजार का रुख कर रहे हैं। सबसे बड़ी वजह तनावभरे जियोपॉलिटिकल माहौल में इमर्जिंग मार्केट्स में हाई वैल्यूएशन के बाद भी भारतीय कंपनियों की अच्छी कमाई है। पिछले 13 दिन में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 40 हजार करोड़ की नेट खरीदारी की है। वहीं, नवंबर के चार दिनों में ही करीब 20 हजार करोड़ की खरीदारी देखने को मिली है।

क्या फिर पुराने रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में बाजार?

भारतीय शेयर बाजार की आगे की उड़ान को लेकर बड़े ग्लोबल ब्रोकरेज भी उम्मीद जता रहे हैं। Goldman Sachs ने जून 2027 तक Nifty के 26,500 अंक तक पहुंचने का टारगेट दिया है। वहीं, JPMorgan ने Nifty के लिए 27,000 अंक का बेस केस और 30,000 अंक का बुल केस टारगेट रखा है। जबकि, Morgan Stanley ने जून 2027 तक Sensex के 89,000 अंक तक पहुंचने का अनुमान जताया है। वहीं, उसके बुल केस में Sensex के 1 लाख अंक तक जाने की संभावना भी शामिल है।

इन अनुमानों के पीछे मजबूत कॉरपोरेट अर्निंग, घरेलू खपत, निवेश में तेजी, आकर्षक वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी जैसे फैक्टर हैं। हालांकि, ये सभी लक्ष्य अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों से पहले जारी किए गए थे। यानी ट्रंप को लगे राजनीतिक झटके ने तेजी को नया ट्रिगर जरूर दिया है, लेकिन बाजार की अगली उड़ान की असली परीक्षा कंपनियों की कमाई, क्रूड की कीमतों और FII की लगातार खरीदारी से होगी।

End of Article