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तेलंगाना में कौन लेगा KCR की जगह? कांग्रेस जीती तो मुख्यमंत्री की रेस में ये 4 चेहरे शामिल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 3, 2023, 12:53 PM IST

Telangana Election Result: इस बात की चर्चा भी शुरू हो गई है कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सूबे का मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इसमें तेंलगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रेवंत रेड्डी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, कुछ नेताओं ने पहले ही सीएम बनने की इच्छा जता दी है...

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तेलंगाना का कौन बनेगा मुख्यमंत्री

Photo : Times Now Digital

Telangana Election Result: पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के नतीजे सामने आने लगे हैं। रुझानों में तीन राज्यों में कांग्रेस पिछड़ती हुई दिख रही है, वहीं तेलंगाना एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस के जख्मों पर मल्हम लगा है। पार्टी यहां बड़ी जीत की ओर आगे बढ़ रही है और 119 विधानसभा सीटों में से 71 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है।

इसी के साथ राज्य कांग्रेस पार्टी मुख्यालय के साथ कार्यकर्ताओं के बीच जश्न शुरू हो गया है। साथ ही इस बात की चर्चा भी शुरू हो गई है कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सूबे का मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इसमें तेंलगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रेवंत रेड्डी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, अन्य नेताओं ने भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर दी है।

सीएम की रेस में रेवंत रेड्डी सबसे आगे

तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तेलंगाना कांग्रेस ईकाई के अध्यक्ष रेवंत रेड्डी का नाम सबसे आगे है। रेड्डी ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी जीता था। वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। प्रदेश के चुनाव प्रचार में भी कांग्रेस ने रेवंत रेड्डी के चेहरे को आगे रखा है और वह राहुल और प्रियंका गांधी के इर्द-गिर्द ही नजर आए। इस विधानसभा चुनाव में वे कामारेड्डी सीट से मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के सामने चुनाव लड़ रहे हैं।

उत्तम कुमार रेड्डी भी बड़े दावेदार

मुख्यमंत्री की रेस में लोकसभा सांसद उत्तर कुमार रेड्डी का नाम भी शामिल है। वह नलकोंडा लोकसभा सीट से सांसद हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस बार वे हुजूरनगर सीट से चुनावी मैदार में हैं, इस सीट से वे दो बार विधायक भी रह चुके हैं।

दलित नेता भट्टी भी रेस में

सूबे के सबसे बड़े दलित नेता एम भट्टी भी मुख्यमंत्री की रेस में आगे दिखाई दे रहे हैं। वे विक्रमार्क सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और यही से मौजूदा विधायक भी हैं। इससे पहले वे 2009 में पहली बार विधायक चुके गए थे। 2019 में कांग्रेस ने उन्हें तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता भी नियुक्त किया था। ऐसे में सीएम की रेस में उन्हें भी आगे माना जा रहा है।

ये चेहरा भी शामिल

तेलंगाना में केसीआर की जगह लेने के लिए इन तीन चहेरों के अलावा भुवनगिरि सीट से लोकसभा सांसद कोमाटी रेर्डी वेंकट रेड्डी भी शामिल हैं। उन्हें भी राज्य में कांग्रेस के मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। इस बार वे नलगोंडा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए गए हैं। लोकसभा सांसद बनने से पहले वे कोमाटी तेलंगाना के विधायक थे। आंध प्रदेश से भी वे तीन बार विधायक चुके गए थे और वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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