BJP in Rajasthan Chunav: राजस्थान में क्या 5 साल भाजपा, 5 साल कांग्रेस वाला फॉर्मूला जारी रहेगा या फिर 30 साल पुराने रिकॉर्ड को कांग्रेस ध्वस्त कर देगी? इस सवाल का जवाब अगले महीने यानी 3 दिसंबर, 2023 को मिल जाएगा। राजस्थान में भाजपा पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है, मगर इसमें कोई शक नहीं है कि यदि भाजपा जीतती है तो वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार होंगी। इन दिनों राजस्थान में 'मोदी की गारंटी' पर सियासी उठापटक का दौर बदस्तूर जारी है। भाजपा के लिए वसुंधरा राजे कितनी जरूरी हैं, आपको समझाते हैं।
मोदी की गारंटी और वसुंधरा राजे का चेहरा
"मोदी की गारंटी" के बैनर तले भाजपा राजस्थान में महिला सशक्तिकरण का वादा कर रही है। राजस्थान के राजनीतिक माहौल में इन दिनों अचानक काफी बदलाव देखा गया। विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे खुद पीएम मोदी के वादों को लेकर भाजपा पर पलटवार कर रहे हैं। महिलाओं के मुद्दे ने राजस्थान चुनाव में जोर पकड़ लिया है, ऐसे में वसुंधरा राजे एक बार फिर मजबूत होती नजर आ रही है। भाजपा ने जब पहली बार वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनाया था तो उस वक्त महिला सशक्तिकरण का संदेश देने की कोशिश की थी।
भाजपा के लिए कितनी अहम हैं वसुंधरा राजे?
साल 2003 की बात है जब अशोक गहलोत 5 साल तक सूबे के सीएम रहे। कांग्रेस को हराकर भाजपा वापस सत्ता में लौटी, तो पहली बार वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनाया गया था। भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर राजस्थान में महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया था। भाजपा-कांग्रेस के बीच 5-5 साल ये सिलसिला 30 सालों से जारी है। मगर जब राजस्थान विधानसभा चुनाव का जिक्र होता है तो साल 2013 की याद जरूर आती है, जब वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव लड़ा और राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़ी जीत साबित हुई। साल 2013 में राजस्थान की लड़ाई अशोक गहलोत बनाम वसुंधरा राजे की हो चुकी थी। सूबे में भाजपा का चेहरा वसुंधरा थीं और कांग्रेस गहलोत के चेहरे पर अपना दांव खेलती थी। उस चुनाव में भाजपा ने 163 सीटों पर जीत का बिगुल बजाया और कांग्रेस की झोली में सिर्फ 37 विधानसभा सीटें गईं। वसुंधरा राजे एक दूसरी बार राजस्थान की सीएम बनीं। और इसी के साथ ये जीत राजस्थान के इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी।
'राजस्थान की हर बहन-बेटी को ये मोदी की गारंटी'
इस बार के चुनाव में वसुंधरा राजे की राजनीतिक सुर्खियों में वापसी का सफर आसान नहीं रहा। माना जा रहा था कि पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया है, मगर वसुंधरा राजे जबसे एक्टिव हुईं तो हवा बदलनी शुरू हो गई। महिला आरक्षण विधेयक के लिए मोदी सरकार के रुख को लेकर वसुंधरा और राजस्थान ने स्पष्ट समर्थन किया। मोदी की गारंटी में महिलाओं-बेटियों पर खास जोर दिया जा रहा है। ऐसे में वसुंधरा की भूमिका अपने आप अहम हो जाती है। एक बार फिर भाजपा महिला सशक्तिकरण के रूप में वसुंधरा को आगे कर सकती है। हालांकि ये होता है या नहीं आने वाला वक्त ही बताएगा।
तीन दिसंबर को आएंगे चुनाव के नतीजे
भाजपा ने भले ही राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए अपने चेहरे का ऐलान नहीं किया हो, मगर वसुंधरा राजे मोदी की गारंटी वाले वादों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। राजस्थान में पिछले कई दिनों से भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। टिकट बंटवारे को लेकर कई नेताओं का विरोध देखा गया, वसुंधरा राजे के खेमे के कई नेताओं का टिकट कटा। इसके सीएम की कुर्सी के लिए वसुंधरा अभी भी रेस में बनी हुई हैं। तीन दिसंबर को तय हो जाएगा कि सूबे में भाजपा की सरकार बनती है या नहीं।
