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...तो अमेठी यूं साध रहीं स्मृति ईरानी? मिठाई-कपड़ों से मोबाइल तक...दिवाली पर बंटवाई 'रेवड़ी', विरोधियों को भी दिए गिफ्ट

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Nov 17, 2023, 11:22 AM IST

Amethi Latest News: दरअसल, अमेठी सीट लंबे समय (साल 1980 से) से कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। 2017 के विस चुनाव में बीजेपी ने पहले अमेठी विस सीट कब्जाई, जबकि 2019 के आम चुनाव में ईरानी ने राहुल को हराया था।

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी। (फाइल)

Photo : BCCL

Amethi Latest News: उत्तर प्रदेश (यूपी) के अमेठी में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कोई कसर नहीं छोड़ रही है। त्यौहारी मौसम में भी इस बात की बानगी देखने को तब मिली, जब दिवाली पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से वहां दिवाली गिफ्ट पहुंचवाए गए। अपने चुनावी क्षेत्र में ईरानी ने एक लाख से अधिक ऐसे दिवाली गिफ्ट पैक पहुंचवाए, जो कि विभिन्न तबकों के बीच बंटवाए गए।

अंग्रेजी अखबार दि इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ईरानी के ओर से भिजवाए गए ऐसे कुछ गिफ्ट पैक्स बीजेपी कार्यकर्ताओं और विरोधी सियासी दलों के स्थानीय नेताओं को भी बंटवाए गए। ऐसा बताया गया कि इन पैक्स में मिठाई, कैसरोल, पानी की बोतलें, साड़ी और शर्ट-पैंट के लिए कपड़े आदि थे। वैसे, पार्टी के कुछ प्रमुख कार्यकर्ताओं को इन गिफ्ट्स के रूप में मोबाइल फोन दिए जाने की बात भी सामने आई है।

इस बीच, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से पार्टी सांसद राहुल गांधी (जो कि ईरानी से इसी सीट पर हार गए थे) ने भी अमेठी के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिफ्ट्स भिजवाए। उनकी ओर से भेजे गए तोहफों में मिठाइयां, दीप व शर्ट और पैंट के लिए कपड़े आदि शामिल थे।

सबसे रोचक बात है कि ईरानी उसी पार्टी से आती हैं, जिनसे ताल्लुक रखने वाले प्रधानमंत्री और पार्टी के फायरब्रांड नेता नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) व उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल (दिल्ली सीएम) को फ्री की रेवड़ी के मुद्दे पर घेरा था। यह मसला सियासी तौर पर काफी दिनों तक चर्चा के केंद्र में रहा था और इस पर खूब राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी।

वैसे, चुनाव विश्लेषकों और राजनीतिक एक्सपर्ट्स की मानें तो वे हालिया घटनाक्रम को लाभ-हानि के नजरिए से देखते हैं। उनका मानना है कि ईरानी और बीजेपी इन तोहफों के जरिए लोगों के दिल में अपनी छवि और पैठ को और मजबूत करना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस ने भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की है।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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