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भाजपा की तारीफ क्यों कर रहे हैं राज ठाकरे? उद्धव खेमे ने कसा तंज- बेटे की फिक्र...

Uddhav Thackeray vs Raj Thackeray: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सियासी पारा आसमान छू रहा है। राजनीतिक विरोधी एक दूसरे पर वार-पलटवार कर रह हैं, इसी कड़ी में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूटीबी) के नेता संजय राउत ने कहा है कि राज ठाकरे भाजपा की तारीफ कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने बेटे की फिक्र है।

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राज ठाकरे vs उद्धव ठाकरे

Sanjay Raut Slams Raj Thackeray: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की जंग किसी से छिपी नहीं है, दोनों चचेरे भाई आज किसी दुश्मन से कम नहीं हैं। वजह हर कोई जानता है, सत्ता, सियासत और रसूख...। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी सियासी पार्टियां और उनके नेता अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। शिवसेना भले ही दो हिस्सों में बंट चुकी है, लेकिन उद्धव खेमे के नेता राज ठाकरे पर लगाार तंज कर रहे हैं। इसी कड़ी में संजय राउत ने उद्धव के चचेरे भाई की चुटकी ली है।

अपने बेटे अमित ठाकरे की फिक्र कर रहे हैं राज ठाकरे!

शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इसलिए तारीफ कर हैं क्योंकि उन्हें अपने बेटे अमित ठाकरे की फिक्र है। अमित ठाकरे महाराष्ट्र में 20 नवंबर को हो रहे विधानसभा चुनाव में मुंबई की माहिम सीट से मनसे प्रत्याशी के रूप में पहली बार चुनाव में उतर रहे हैं। बुधवार को राज ठाकरे ने कहा था कि मनसे और भाजपा चुनाव के बाद साथ आ जायेंगी एवं अगला मुख्यमंत्री भाजपा से होगा।

राज ठाकरे के बेटे को लेकर राउत ने कसा तीखा तंज

संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'जिस व्यक्ति का बेटा चुनाव लड़ रहा हो, उसकी मानसिकता समझी जा सकती है। जो व्यक्ति कभी कहता था कि भाजपा को महाराष्ट्र से भगा देना चाहिए तथा अमित शाह एवं नरेन्द्र मोदी को राज्य में घुसने नहीं देना चाहिए, वह आज भाजपा की तारीफ कर रहा है।'

उन्होंने कहा, 'राज ठाकरे जानते हैं कि महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी से (अगला) मुख्यमंत्री होगा।' राज ठाकरे ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार किया था। बाद में उन्होंने अपना रूख बदल लिया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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