यूपी की रामपुर सीट पर आजम खान की बादशाहत अब खत्म हो गई है। बीजेपी ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की है। बीजेपी उम्मीदवार अकाश सक्सेना यहां से जीत चुके हैं। आजम खान के करीबी दोस्त असीम रजा यहां से चुनाव हार चुके हैं। इस हार के साथ ही साफ हो गया कि आजम खान के आंसू भी सपा को जीत नहीं दिला पाए। इस सीट पर प्रचार के दौरान आजम खान कई बार भावुक हो चुके थे।
जब बोलते-बोलते रो पड़े आजम
रामपुर में जब उपचुनाव का बिगुल बजा तो सपा प्रमुख अखिलेश ने इसकी कमान सीधे आजम खान के हाथ में दे दी। आजम खान ने अपने पुराने दोस्त असीम रजा को सपा का टिकट दिलाया और उन्हें जिताने की कोशिश में लग गए। इसी दौरान जब वो प्रचार करने लगे तो लगभग हर सभा में बीजेपी पर आरोप लगाते रहे कि सरकार उन्हें टारगेट कर रही है, उनपर जुल्म ढाहा जा रहा है। कई सभाओं में आजम खान भावुक हो उठे। मंच से रोते हुए लोगों को धोखा न देने की अपील भी कर बैठे थे, लेकिन उनके आंसूओं का जनता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
कभी रामपुर से अपराजेय रहे थे आजम!
रामपुर सीट पर आजम खान एक तरह से अपराजेय ही रहे हैं। एक बार को छोड़कर आजम खान यहां से लगातार जीतते रहे हैं, एक बार उन्हें कांग्रेस से मात मिली थी। आजम खान यहां से नौ बार जीत चुके हैं। पहली बार उन्होंने 1980 में यहां से किस्मत आजमाया था। जिसके बाद सिर्फ 1996 को छोड़कर वो लगातार जीतते रहे हैं।
इस बार ढह गया किला
इस बार बीजेपी ने आजम खान को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और आजम ने भी जीतने की हर मुमकिन कोशिश की थी। वहीं राज्य बीजेपी ने पूरी ताकत इस सीट पर झोंक दी थी। धुआंधार चुनाव प्रचार किया गया था। जिसका परिणाम यह निकला कि बीजेपी ने आजम खान के अभेद्द किले को तोड़ते हुए यहां से जीत हासिल कर ली।
