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'जो पत्थर पुलिस और फौज पर उठते थे, उन पत्थरों से नया जम्मू कश्मीर बन रहा है...' डोडा में बोले PM मोदी

PM Narendra Modi Doda Rally: पीएम मोदी ने डोडा में रैली को संबोधित करते हुए कहा, कश्मीर का इस बार का विधानसभा चुनाव तीन खानदानों और जम्मू-कश्मीर के नौजवानों के बीच में है। एक खानदान कांग्रेस का है, एक खानदान नेशनल कॉन्फ्रेंस का है और एक खानदान पीडीपी का है।

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जम्मू-कश्मीर के डोडा में जनसभा को संबोधित करते पीएम मोदी।

Photo : Twitter

PM Narendra Modi Doda Rally: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा में विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने यहां अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया। पीएम मोदी ने कहा, जम्मू-कश्मीर में आ रहा बदलाव हमारी सरकार की बीते 10 सालों की कोशिशों का नतीजा है। आप सब यहां डोडा, किश्तवाड़ और रामबन के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे हैं। यहां आने के लिए आपने घंटो सफर किया है, इसके बावजूद आपके चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं है और चारो तरफ जोश ही जोश है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आपके प्यार और आशीर्वाद के लिए मैं आपके लिए और देश के लिए दोगुनी, तिगुनी मेहनत करके चुकाऊंगा। हम और आप मिलकर एक सुरक्षित और समृद्ध जम्मू-कश्मीर का निर्माण करेंगे। ये मोदी की गारंटी है। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर कहा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। पिछले 10 साल में यहां जो बदलाव आया है, वो किसी सपने से कम नहीं है। जो पत्थर पहले पुलिस और फौज पर बैठने के लिए उठते थे, उन पत्थरों से नया जम्मू कश्मीर बन रहा है।

जम्मू-कश्मीर का भाग्य तय करने वाले चुनाव

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इस बार जम्मू-कश्मीर का चुनाव, जम्मू-कश्मीर का भाग्य तय करने वाला है। आजादी के बाद से ही हमारा प्यारा जम्मू-कश्मीर विदेशी ताकतों के निशाने पर आ गया। इसके बाद इस खूबसूरत राज्य को परिवारवाद ने खोखला करना शुरू कर दिया। यहां जिन राजनीतिक दलों पर आपने भरोसा किया, उन्होंने आपके बच्चों की चिंता नहीं की। उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चों को आगे बढ़ाया।

आतंकवाद में पिसते रहे नौजवान

पीएम मोदी ने कहा, जम्मू-कश्मीर के मेरे नौजवान आतंकवाद में पिसते रहे और परिवारवाद को आगे बढ़ाने वाली पार्टियां आपको गुमराह करके मौज काटती रही। इन लोगों ने जम्मू-कश्मीर में नए नेतृत्व को कहीं भी, कभी भी उभरने ही नहीं दिया। यहां पंचायत के चुनाव 2000 के बाद नहीं हुए थे, यहां BDC के चुनाव कभी भी नहीं हुए थे। दशकों तक परिवारवाद ने यहां के बच्चों और होनहार नौजवानों को आगे नहीं आने दिया। उन्होंने कहा, जम्मू कश्मीर का इस बार का विधानसभा चुनाव तीन खानदानों और जम्मू-कश्मीर के नौजवानों के बीच में है। एक खानदान कांग्रेस का है, एक खानदान नेशनल कॉन्फ्रेंस का है और एक खानदान पीडीपी का है। जम्मू-कश्मीर में इन तीन खानदानों ने मिलकर आप लोगों के साथ जो किया है, वो किसी पाप से कम नहीं है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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