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फूलपुर उपचुनाव: गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन करने वाले कांग्रेस जिला अध्यक्ष पर गिरी गाज, पार्टी ने पद से हटाया

Phulpur by-election: सुरेश चंद्र यादव ने पार्टी से बगावत करते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन दाखिल किया था, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से यह कार्रवाई की गई है।

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इंडिया गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन करने वाले कांग्रेस नेता पर गिरी गाज।

Photo : ANI

Phulpur by-election: उत्तर प्रदेश के फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी से बगावत करने वाले नेता सुरेश चंद्र यादव के खिलाफ कांग्रेस ने एक्शन लिया है। कांग्रेस पार्टी ने जिला कांग्रेस कमेटी प्रयागराज (गंगापार) के पद से सुरेश चंद्र यादव की छुट्टी कर दी है। इस बाबत उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने पत्र भी जारी किया है। बात दें, सुरेश चंद्र यादव ने पार्टी से बगावत करते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन दाखिल किया था, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से यह कार्रवाई की गई है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है, पार्टी नेतृत्व के निर्णय के विरुद्ध फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के विरोध में आप द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने पर आपको जिला कांग्रेस कमेटी प्रयागराज (गंगापार) के पद से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाता है।

सपा ने उतारा है अपना प्रत्याशी

बता दें, उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में सभी पर सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ये सभी उम्मीदवार इंडिया गठबंधन के तहत चुनाव मैदान में हैं। इसके तहत फूलपुर से समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी मुज्जतबा सिद्धीकी को बनाया है। इस बात से नाराज होकर कांग्रेस नेता रहे सुरेश यादव ने पार्टी से बगावत करते हुए अपना नामांकदन दाखिल किया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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