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'पाकिस्तान पीओके के लोगों को विदेशी कहता है, हम उन्हें अपना...' जम्मू में बोले राजनाथ सिंह

Rajnath Singh Jammu Rally: म्मू संभाग के रामबन जिले में एक चुनावी रैली के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा, उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि अफ़ज़ल गुरु को फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वह चाहते थे कि अफजल गुरु को माला पहनाई जाए?

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राजनाथ सिंह।

Photo : ANI

Rajnath Singh Jammu Rally: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान सरकार पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के लोगों को 'विदेशी' कहती है, जबकि भारत उन्हें अपना नागरिक मानता है। जम्मू संभाग के रामबन जिले में एक चुनावी रैली के दौरान राजनाथ सिंह ने भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार का जिक्र करते हुए कहा, महबूबा के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान, हमने नाबालिगों और निर्दोष लोगों के खिलाफ मामले वापस ले लिए थे। लेकिन समस्या यह थी कि पीडीपी अलगाववादियों के प्रति सहानुभूति रखती थी। मैं हमेशा उनसे जमीनी हालात को नियंत्रण में लाने के लिए कहता था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकीं। जम्मू-कश्मीर के लोग भारत के स्वतंत्र नागरिक हैं और उन्हें शांति तथा समृद्धि का अधिकार है।"

रक्षा मंत्री ने कहा, इसके विपरीत, हाल ही में एक हलफनामे में पाकिस्तान के सॉलिसिटर जनरल ने पीओके के लोगों को 'विदेशी' कहा था। हम उन्हें विदेशी नहीं कहते। वे हमारे लोग हैं। उन्हें आकर हमारे साथ जुड़ने दीजिए। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनने के बाद, पीओके के लोग भारत में आकर शामिल होना चाहेंगे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की इस बयान के लिए कड़ी आलोचना की कि अफ़ज़ल गुरु को फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी।

क्या अफजल गरू को माला पहनाई जाए?

राजनाथ सिंह ने कहा, उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि अफ़ज़ल गुरु को फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वह चाहते थे कि अफजल गुरु को माला पहनाई जाए? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह पहली बार रामबन आए हैं, लेकिन लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने दावा किया, मैं आप सभी का अभिवादन करता हूं। 10 साल बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। पूरा देश इस चुनाव के नतीजों पर नजर रख रहा है। मैं हाल ही में अमेरिका गया था और वहां प्रवासी भारतीयों ने मुझसे पूछा कि इन चुनावों में क्या होगा। मैंने उनसे कहा कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार बनेगी।

जम्मू-कश्मीर में पहली बार बिना डर के हुआ चुनाव

उन्होंने कहा, यहां आने पर मैंने डॉ. जितेंद्र सिंह से जमीनी हालात के बारे में पूछा और उन्होंने मुझे बताया कि भाजपा के पक्ष में ऐसा अनुकूल राजनीतिक माहौल उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक है। पहले जब भी कश्मीर में 2, 6 या 10 प्रतिशत मतदान होता था तो यह बड़ी खबर बन जाती थी। लोकसभा चुनाव में 58 प्रतिशत मतदान हुआ और लद्दाख में यह 72 प्रतिशत हो गया। राजनाथ सिंह ने कहा, पहली बार यहां बिना किसी डर और बिना किसी पक्षपात के चुनाव हुए। यह एक बड़ा बदलाव है। जम्मू-कश्मीर के लोग मेहनती और प्रतिभाशाली हैं। अगर भाजपा अगले 10 साल तक जम्मू-कश्मीर पर शासन करती है, तो जम्मू-कश्मीर भारत का सबसे समृद्ध स्थान होगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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