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Maharashtra: राज ठाकरे ने एकनाथ शिंदे से की मुलाकात, क्या चुनाव से पहले पक रही है खिचड़ी

Maharashtra Elections: क्या महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले कोई बड़ा खेला होने वाला है? उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सूबे के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की है। ऐसे में तमाम सवाल उठ रहे हैं, आखिर इस मुलाकात के क्या मायने हैं और क्या चुनाव से पहले कोई खिचड़ी पक रही है?

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राज ठाकरे ने एकनाथ शिंदे से की मुलाकात।

Raj Thackeray Meets CM Eknath Shinde: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से यहां उनके आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। पिछले दो महीनों में ठाकरे का मुख्यमंत्री आवास वर्षा में यह दूसरा दौरा था।

शिंदे के आधिकारिक आवास वर्षा बंगले में मुलाकात

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आज मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आधिकारिक आवास वर्षा बंगले में मुलाकात की। इससे पहले राज ठाकरे ने अगस्त के पहले सप्ताह में शिंदे से मुलाकात की थी, जिसमें मुंबई में बीडीडी चॉल और पुलिस कर्मियों के लिए कॉलोनियों के विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

क्या शिंदे और ठाकरे के बीच हो रही कोई बड़ी डील?

शिवसेना प्रमुख शिंदे राज्य विधानसभा चुनावों से पहले ठाकरे का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। राज ठाकरे ने रविवार को मध्य मुंबई के वर्ली इलाके में एक जनसभा की थी, जहां उनकी पार्टी अपने प्रतिनिधि संदीप देशपांडे को मौजूदा विधायक एवं शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए उतारने का इरादा रखती है।

महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नवंबर में होने की संभावना है। सवाल यही है कि क्या महाराष्ट्र की सियासत नई ओर करवट लेने वाली है? विधानसभा चुनाव से पहले कोई बड़ा उलटफेर या खेला होने वाला है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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