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Meerut Lok Sabha Chunav Parinam 2024: मेरठ से विजयी हुए अरुण गोविल, सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा को हराया

Meerut Lok Sabha Chunav 2024 Parinam: टीवी सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल ने मेरठ लोकसभा सीट को चर्चित बना दिया है। भाजपा ने तीन बार के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर अरुण गोविल को मेरठ से प्रत्याशी बनाया और भाजपा का यह प्रयोग सही साबित हुआ।

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मेरठ लोकसभा चुनाव रिजल्ट

Photo : Times Now Digital

Meerut Lok Sabha Chunav 2024 Parinam, Arun Govil vs Sunita Verma who will win in Meerut: मेरठ लोकसभा सीट भी उत्तर प्रदेश की हॉट सीटों में शुमार है। भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल ने सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा को चुनौती शिकस्त दी है। यहां पर भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला हुआ।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अरुण गोविल सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा से 10,585 वोट के अंतर से आगे चल रहे हैं। अरुण गोविल को अबतक 5,46,469 वोट मिले, जबकि सुनीता वर्मा के पक्ष में 5,35,884 वोट पड़े। वहीं, 87,025 वोट के साथ बसपा उम्मीदवार देवव्रत कुमार त्यागी तीसरे नंबर पर रहे।

राजेंद्र अग्रवाल की जगह मिला टिकट

टीवी सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल ने इस सीट को चर्चित बना दिया है। भाजपा ने तीन बार के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर अरुण गोविल को मेरठ से प्रत्याशी बनाया है। वहीं समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ सुनीता वर्मा को मैदान में उतारा है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी ने देवव्रत कुमार त्यागी को टिकट दिया है।

क्या कहता है एग्जिट पोल

मेरठ को लेकर जारी एग्जिट पोल में अरुण गोविल की जीत निश्चित बताई जा रही है। हालांकि, राजेंद्र अग्रवाल का टिकट कटने से भाजपा के एक खेमे में उनको लेकर भी नाराजगी भी सामने आई थी। ऐसे में इस सीट का चुनाव परिणाम क्या होगा, यह आज होने वाली मतगणना के बाद साफ हो जाएगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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