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अखिलेश और शिवपाल के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बरकरार, तो क्या सपा को होगा इसका नुकसान?

UP Lok Sabha Chunav : लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का प्लान फिलहाल किसी को समझ नहीं आ रहा है। खुद अखिलेश यादव और उनके चाचा सपा महासचिव शिवपाल यादव के चुनाव लड़ने पर अब तक संशय बरकरार है। आपको इसका नफा-नुकसान समझाते हैं।

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अखिलेश यादव और शिवपाल यादव।

Photo : Times Now Digital

Samajwadi Party Plan For Lok Sabha Election: क्या अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव इस बार लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करेंगे? उत्तर प्रदेश की सियासत में दिलचस्पी रखने वाला हर शख्स इस सवाल का जवाब जानना चाहता है। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव इस बार चुनाव में बतौर उम्मीदवार नजर नहीं आएंगे। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके साथ ही अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव के चुनाव लड़ने पर भी फिलहाल सस्पेंस बरकरार है। यदि अखिलेश और शिवपाल दोनों ही चुनाव नहीं लड़ते हैं तो क्या इसकी वजह से समाजवादी पार्टी को नुकसान होगा या फायदा... आपको समझाते हैं।

क्या अखिलेश यादव नहीं लड़ेंगे लोकसभा चुनाव?

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने पर अब तक सस्पेंस बरकरार है। माना जा रहा था कि 2014 में जिस सीट से उनकी पत्नी सांसद चुनी गई थीं उसी सीट से अखिलेश 2024 में चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि 2019 के चुनाव में डिंपल यादव को इस सीट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। कन्नौज लोकसभा सीट से सुब्रत पाठक ने अखिलेश की पत्नी डिंपल को चुनाव हरा दिया था। समाजवादी पार्टी इस सीट को इस बार हर हाल में हासिल करना चाहेगी। ऐसे में कहा जा रहा था कि अखिलेश खुद यहां से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई के बेटे तेज प्रताप यादव इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

कौन हैं तेज प्रताप यादव, कन्नौज से लड़ सकते हैं चुनाव

मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई राजवीर सिंह यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ा था, जीत हासिल कर वे इस सीट से सांसद भी बने थे। हालांकि इसके बाद उन्हें चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला। बता दें, तेज प्रताप के ताल्लुर लालू यादव से भी है। वो लालू की बेटी राजलक्ष्मी यादव के पति है, यानी तेजस्वी यादव उनके साले और लालू उनके ससुर हैं। यदि अखिलेश कन्नौज सीट से चुनाव नहीं लड़ते हैं तो तेज प्रताप यहां से सपा के उम्मीदवार हो सकते हैं।

भतीजे अखिलेश के साथ-साथ चाचा भी नहीं लड़ेंगे चुनाव?

अखिलेश यादव के साथ-साथ उनके चाचा शिवपाल यादव के चुनाव लड़ने पर भी असमंजस बनी हुई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की बदायूं लोकसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव को कार्यकर्ताओं की ख्वाहिश पर इसी सीट से प्रत्याशी बनाये जाने को लेकर संशय बरकरार है। शिवपाल यादव से बुधवार को जब यहां मीडिया ने पूछा कि क्या बदायूं से वह चुनाव लड़ेंगे या फिर उनके बेटे आदित्य मैदान में उतरेंगे, तब उन्होंने कहा, 'जहां भी हम गए हैं, हमने बैठक की है, हमने सम्मेलन किए, तो जनता ने मांग की है कि उन्हें युवा उम्मीदवार चाहिए।' शिवपाल के जवाब से ये समझा जा सकता है कि इस बार शायद उनके बेटे बदायूं से चुनाव लड़ेंगे।

आदित्य यादव को उम्मीदवार बनाएगी समाजवादी पार्टी?

इस सवाल पर कि आदित्य यादव को उम्मीदवार बनाने की बात पर कब तक मुहर लग सकती है? शिवपाल यादव ने कहा, 'अभी जो समाजवादी पार्टी की सूची जारी हुई है उसमें किसका नाम है? मांग की गई है.... मांग तो कोई भी कर सकता है। सूची तो राष्ट्रीय नेतृत्व ही जारी करेगा। उसने जारी की है। उसमें हमारा नाम है।' उन्होंने आदित्य यादव के चुनाव लड़ने की सम्भावनाओं के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा, 'कुछ रणनीति के हिस्से होते हैं। अब वह रणनीति आपको तो नहीं बताई जाएगी। रणनीति को रणनीति ही रहने दीजिए। हम लड़ेंगे भी, लड़ाएंगे भी। आप चिंता न करें।'

खुद की उम्मीदवारी पर क्या बोले शिवपाल के बेटे आदित्य?

इस मुद्दे पर आदित्य यादव ने कहा, 'जनता के बीच से यह बात सामने आई है कि जब धर्मेंद्र यादव ने शुरुआती दिनों में अपनी राजनीति शुरू की तो उन्होंने बदायूं की बागडोर संभाली और यहां की जनता ने एक युवा के रूप में उनकी जीत सुनिश्चित की। मुझे भी ऐसा ही लगता है।' उन्होंने कहा, 'यहां की जनता के मन में यह भावना आ गई है कि यहां से कोई युवा चुनाव लड़ेगा तो नेतृत्व अच्छा होगा। इसलिए हमारे कार्यकर्ताओं ने यह मुद्दा उठाया है । लेकिन अगर आप मुझसे आधिकारिक तौर पर पूछें तो हम सभी शिवपाल सिंह यादव के लिए प्रचार कर रहे हैं, क्योंकि वह पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं और वह चुनाव लड़ेंगे।'

आदित्य यादव ने कहा कि पार्टी (सपा) ने हमेशा जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की आवाज सुनी है, वैसे कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है, यह सिर्फ यहां के लोगों की इच्छा है जिसे वरिष्ठ नेतृत्व को बता दिया गया है। उन्होंने कहा, 'पार्टी की कुछ रणनीतियों पर वरिष्ठ नेतृत्व विचार कर रहा है। मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में यह रणनीति सबके सामने आ जाएगी और हम उसी के अनुरूप चुनाव लड़ेंगे।' उन्होंने कहा, 'मैं पार्टी का कार्यकर्ता और बेटा बनकर काम कर रहा हूं । हम यह तय करने की स्थिति में नहीं हैं कि कौन किस सीट से लड़ेगा, हालांकि व्यक्तिगत इच्छाएं भी हैं। एक बात तय है, चाहे मेरे पिता हों या मेरे नाम की घोषणा हो, हम पार्टी को मजबूत करने के लिए उसी तरह काम करेंगे।'

संघमित्रा मौर्य का टिकट काटे जाने पर भाजपा की चुटकी ली

बदायूं सीट से भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्य का टिकट काटे जाने के सवाल पर आदित्य यादव ने कहा, 'संघमित्रा मौर्य एक सम्मानित महिला हैं। अगर उनका टिकट काटा गया है तो यह दुख की बात है।' उन्होंने कहा, 'इस बारे में भाजपा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी को जवाब देना है कि उन्होंने एक पिछड़े समुदाय से आने वाली महिला का टिकट क्यों काटा। जिस तरह से भाजपा पिछड़े समुदाय की उपेक्षा कर रही है जिसने पिछले चुनावों में उनका समर्थन किया था, आने वाले चुनाव में पिछड़ा समुदाय उसका जवाब देगा।' सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में सात मई को बदायूं में मतदान होगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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