Haryana Assembly Election 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुईं किरण चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। चौधरी ने कहा है कि 'हरियाणा कांग्रेस बाप-बेटे की पार्टी है और भाजपा में शामिल होने के बाद उनके ऊपर से बहुत बड़ा भारत उतर गया।' चौधरी गत जून में अपनी बेटी श्रूति चौधरी के साथ भाजपा में शामिल हुईं। वह चार बार की विधायक हैं। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा में भाजपा की संख्या को देखते हुए उन्हें इस चुनाव में किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भाजपा में शामिल होने के बाद राहत मिली-चौधरी
इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में किरण चौधरी ने कहा कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें बहुत राहत मिली है। उनके ऊपर से बहुत बड़ा भार उतर गया है। चौधरी का कहना है कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। इस पार्टी में सबकुछ एक तरीके से होता है, कांग्रेस की तरह नहीं। उन्होंने कहा, 'हरियाणा में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे कांग्रेस कहा जाए। वहां केवल बाप और बेटे की पार्टी है।
'बाप-बेटा खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं'
उन्होंने आगे कहा कि कोई भी नेता जो आगे बढ़ना चाहता है उसे दबा दिया जाता है। दोनों बाप भूपिंदर हुड्डा और बेटा दीपेंदर हुड्डा दोनों खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। भूपिंदर अपने बेटे के लिए सियासी रास्ता सुरक्षित करना चाहते हैं लेकिन उनका बेटा पूरी तरह से अक्षम है। वे दोनों कांग्रेस के लिए कभी भला नहीं करेंगे। वास्तव में बाप और बेटे ने मिलकर हरियाणा में कांग्रेस को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।'
हरियाणा में वेंटिलेटर पर है कांग्रेस-किरण
हरियाणा कांग्रेस में अलग-अलग खेमे और गुटबाजी के सवाल पर चौधरी ने कहा कि पार्टी में केवल बाप-बेटा बचे हुए हैं जो भी कुछ बचा-खुचा है वे उसे खत्म कर देंगे। हरियाणा में कांग्रेस वेंटिलेटर पर है और वह अपनी अंतिम सांस ले रही है। चौधरी ने कहा कि वह अब भाजपा का हिस्सा हैं। पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी वह उसे निभाएंगी। वह हरियाणा में भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएंगी।
एक अक्टूबर को होगा मतदान
बता दें कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव एक चरण एक अक्टूबर को होगा। राज्य में परंपरागत रूप से मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है। हरियाणा कांग्रेस में कई गुट हैं जो आपसी खींचतान में लगे रहते हैं। कांग्रेस में गुटबाजी अगर खत्म नहीं हुई तो इसका बुरा असर चुनाव परिणाम में देखने को मिल सकता है। कुमारी शैलजा और भूपिंदर हुड्डा में बनती नहीं है। दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है।
