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Jharkhand: कितना दिलचस्प है रांची का मुकाबला? जेएमएम ने दूसरी सूची से सबको चौंकाया

झारखंड विधानसभा चुनाव में किसका डंका बजेगा और किस पार्टी की लंका लगेगी? इसका फैसला जनता को करना है, इस बीच हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने रांची विधानसभा सीट से राज्यसभा सांसद महुआ माजी को प्रत्याशी बनाया है। आपको विधानसभा चुनाव में जेएमएम का समीकरण समझाते हैं।

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हेमंत सोरेन ने बनाया विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा प्लान।

Assembly Elections 2024: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने विधानसभा चुनाव के लिए अब तक 36 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। बुधवार को पार्टी ने दूसरी सूची जारी की, जिसमें एकमात्र नाम महुआ माजी का है। वह रांची सीट से उम्मीदवार हैं।

रांची विधानसभा सीट से महुआ माजी को बनाया उम्मीदवार

महुआ माजी फिलहाल राज्यसभा की सांसद हैं और उनका कार्यकाल करीब तीन साल बचा हुआ है। वह 2014 और 2019 में भी रांची विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रत्याशी रही हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सीपी सिंह से करीब पांच हजार मतों से पराजित हुई थीं।

गांडेय सीट से उम्मीदवार होंगी हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन

पार्टी ने मंगलवार देर रात 35 सीटों पर प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की थी। हेमंत सोरेन अपनी परंपरागत सीट बरहेट से चुनाव मैदान में उतरेंगे, जबकि उनकी पत्नी कल्पना सोरेन गिरिडीह जिले की गांडेय सीट से उम्मीदवार होंगी। हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन एक बार फिर दुमका सीट से प्रत्याशी बनाए गए हैं।

हाल में दुमका लोकसभा सीट से सांसद चुने गए नलिन सोरेन के पुत्र आलोक सोरेन को शिकारीपाड़ा से टिकट दिया गया है, जबकि मनोहरपुर सीट से चाईबासा की सांसद जोबा मांझी के पुत्र जगत मांझी को मैदान में उतारा गया है। पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों में एकमात्र लिट्टीपाड़ा से दिनेश विलियम मरांडी का टिकट काटा है। उनकी जगह हेमलाल मुर्मू को प्रत्याशी बनाया गया है।

जेएमएम ने किस सीट से किसे बनाया अपना उम्मीदवार

राजमहल से एमटी राजा, बोरियो से धनंजय सोरेन, महेशपुर से स्टीफन मरांडी, नाला से रविंद्र नाथ महतो, मधुपुर से हफीजुल हसन अंसारी, सारठ से उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह, गिरिडीह से सुदिव्य कुमार सोनू, डुमरी से बेबी देवी, चंदनकियारी से उमाकांत रजक, टुंडी से मथुरा प्रसाद महतो, बहरागोड़ा से समीर कुमार मोहंती को उम्मीदवार बनाया गया है।

इसी तरह घाटशिला से रामदास सोरेन, पोटका से संजीव सरदार, जुगसलाई से मंगल कालिंदी, इचागढ़ से सविता महतो, चाईबासा सीट से दीपक बिरुआ, मझगांव से निरल पूर्ति, खरसावां से दशरथ गगरई और तमाड़ सीट से विकास मुंडा, तोरपा से संदीप गुड़िया, गुमला से भूषण तिर्की, लातेहार से वैद्यनाथ राम, गढ़वा से मिथिलेश कुमार ठाकुर, जमुआ से केदार हाजरा, भवनाथपुर से अनंत प्रताप देव, सिमरिया से मनोज चंद्रा, सिल्ली से अमित महतो, बरकट्ठा से जानकी यादव और धनवार से निजामुद्दीन अंसारी प्रत्याशी हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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