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जम्मू-कश्मीर में भाजपा को मिलेंगी 35 सीटें, बनेगी सरकार; रविंद्र रैना ने कर दी भविष्यवाणी

Jammu and Kashmir Elections: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में अब कुछ घंटे बाकी है। परिणामों से पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। मतगणना से ठीक पहले रवींद्र रैना ने भविष्यवाणी की है कि भाजपा को 35 सीटें मिलेंगी, समान विचारधारा वालों के साथ सरकार बनाएंगे। आपको बताते हैं रैना ने क्या कुछ कहा।

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रविंद्र रैना

Photo : Twitter

BJP in Jammu Kashmir: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख रविंद्र रैना ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी 35 सीट जीतकर क्षेत्र में एकमात्र सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और भाजपा समान विचारधारा वाले दलों एवं निर्दलीयों की मदद से सरकार बनाएगी। रैना ने कहा कि पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार उपराज्यपाल द्वारा पांच विधायकों का मनोनयन किया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में 35 सीटें जीतने का दावा

भाजपा नेता ने यहां पत्रकारों से कहा, 'हमें भरोसा है कि जम्मू-कश्मीर में 35 सीटें जीतेंगे और निर्दलीय एवं समान विचारधारा वाले समूहों के सहयोग से हम सरकार बनाने के लिए बहुमत के आंकड़े 50 को पार कर जाएंगे। निर्दलीय एवं समान विचारधारा वाले समूहों के उम्मीदवारों के करीब 15 सीटें जीतने की उम्मीद है।'

उन्होंने कहा, 'लोगों ने विकास और शांति के हमारे दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए हमें वोट दिया है।' रैना ने कहा कि भाजपा असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाली है और 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों में भारी भीड़ का जुटना हमारी पार्टी के लिए स्पष्ट रूप से मिले भारी जनसमर्थन को दर्शाता है और यह इस बात का संकेत है कि लोगों ने भाजपा को वोट दिया है।'

कांग्रेस को लेकर क्या बोले रविंद्र रैना?

रैना ने कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में 'करारी हार' का सामना करना पड़ेगा और भाजपा एकमात्र सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी। पार्टी के गठबंधन के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'भाजपा ने 15 निर्दलीय और समान विचारधारा वाले उम्मीदवारों को समर्थन दिया है, लेकिन हमारा इंजीनियर रशीद की पार्टी से कोई गठबंधन नहीं है। वे (निर्दलीय एवं समान विचारधारा वाले समूह) जीत दर्ज करेंगे। जम्मू-कश्मीर में हम सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी होंगे।'

मतगणना से पहले भाजपा अपने मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक कर रही है, जिसमें वरिष्ठ नेता तरुण चुघ एवं राम माधव हिस्सा ले रहे हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पांच विधायकों के मनोनयन पर उन्होंने कहा, 'पुनर्गठन अधिनियम संसद द्वारा पहले ही पारित किया जा चुका है। यह प्रक्रिया इसके अनुसार आगे बढ़ेगी... इसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उपराज्यपाल द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।'

यह पूछे जाने पर कि क्या नामांकन की प्रक्रिया अगली सरकार पर छोड़ देनी चाहिए, इस पर उन्होंने कहा, 'उपराज्यपाल जो कुछ भी करने वाले हैं वह विधिसम्मत है। यह पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार किया गया है।' जम्मू-कश्मीर में 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतों की गिनती मंगलवार को होगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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