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West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव में चंदननगर से ग्राउंड रिपोर्ट में देखें किन मुद्दों पर हो रही सबसे ज्यादा चर्चा?

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल गर्माने लगा है। इस बीच, टाइम्स नाउ नवभारत की टीम चंदननगर पहुंची, जहां के वोटर्स से खुलकर बातचीत की और जानने की कोशिश की कि उनके मन में क्या है।

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टाइम्स नाउ नवभारत की टीम चंदननगर पहुंची

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच अहम मुकाबला देखा जा सकता है, जबकि कांग्रेस भी लगातार अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। इस बीच, टाइम्स नाउ नवभारत की पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बंगाल यात्रा जारी है। ऐसे में कार्यक्रम के मद्देनजर एंकर श्वेता भट्टाचार्य राजनीतिक दलों की नस टटोलने के लिए चंदननगर पहुंची हैं तो चलिए ग्राउंड रिपोर्ट में देखते हैं कि यहां की जनता के मन में आखिर है क्या...

फ्रांसीसी विरासत और बंगाली संस्कृति को अपने आप में समेटे। 1673 से लेकर 1950 तक चंदन नगर जो है वो फ्रांसीसी कॉलोनी हुआ करता था। 1954 में यह पश्चिम बंगाल में शामिल हुआ।

बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर गजब का सियासी माहौल है। जहां एक ओर ममता बनर्जी की पार्टी TMC और बंगाल के ओवैसी कहे जाने वाले हूमांयू कबीर (Humayun Kabir) के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। वहीं दूसरी ओर BJP के बंगाल में आने का भी माहौल बनाया जा रहा है। इसी मुद्दे पर देखिए चंदननगर की जनता ने क्या कहा..

यहां देखें पूरी रिपोर्ट-

पश्चिम बंगाल का मिनी फ्रांस चंदन नगर

पश्चिम बंगाल का मिनी फ्रांस चंदन नगर जहां से फ्रांस तो चला लेकिन उसकी रूह और फ्रांसीसी विरासत यहां आज भी बसती है। समय यहां ठहरा है लेकिन यादें आज भी बहती हैं। चंदन नगर इलाके की जनता अपने इलाके का विकास चाहती है। कुछ का कहना है कि बदलाव अच्छा है तो कुछ को दीदी ही भाती है।

एक यूथ से जब यह सवाल किया कि क्या सोच रहा है? चंदन नगर खासकर बात करें क्योंकि यहां पे सभी मिलजुलकर रहते हैं। मुस्लिम, हिंदू, ईसाई यहां के यूथ के मुद्दे क्या हैं?

जवाब कुछ ऐसा आया- जी मैं बाकी यूथों के बारे में बोल नहीं सकता। जितना मैं सोच रहा हूं इस वाले पे कि अभी चेंज तो बहुत जरूरी चीज है।हम अब बिना चेंज के अच्छा चीज भी नहीं आएगा और जो चला जा रहा है वो भी इंप्रूव नहीं करेगा। बट उनको कंपटीशन नहीं है। येहेल्दी कंपटीशन है। मतलब धर्म को लेके जो भी हो हिंदू हो, मुस्लिम हो जो भी हो धर्म को लेके हो या रोजगार को लेके हो। ऊपर दिखावा थोड़ा ज्यादा है। तीनों पार्टी तीनों पार्टी सब पार्टी सब एक है। क्या है उसका वो सीपीएम के गलती के वजह से हम लोग ये फंस गए हैं। एक उल्टा सीधा सरकार आ गया। सीपीएम के गलती के वजह से ये हो गया है।

सीपीएम की क्या गलती रही?

जबाव ऐसा रहा- उसका इंडस्ट्रियलाइजेशन का जो प्रोसेस था वो गलती था। लेकिन कर कर सकता था कुछ। अच्छा कुछ कर सकता था लेकिन बुद्धोदेव भट्टाचार्य अच्छा आदमी थे। बहुत अच्छा आदमी था। लेकिन उसका प्रोसेस प्रॉब्लम है।

दीदी अच्छा कर रही है। दीदी को हिलाएंगे या फिर दादा को चांस देंगे?

जबाव ऐसा रहा- देखता है क्या होता है। अभी वोट के ऊपर तो निर्भर करता है। दीदी के सरकार में ठीक-ठाक काम हुआ है।पार्टी से जुड़े कोई बात हम नहीं करना चाहते। मतलब पॉलिटिकल पार्टीज की बात नहीं करेंगे। अच्छा ऐसा डर का माहौल भी है क्या पॉलिटिकल पार्टीज हो या फिर वोट को लेकर कोई बात नहीं करना चाहते। नहीं हम कोई बात ही नहीं करना चाहते।

कब होगी बंगाल में वोटिंग?

सनद रहे कि चुनाव आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव संपन्न होंगे। पहले चरण की 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को, जबकि 142 सीटों के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई की जाएगी।

Shweta Bhattacharya
श्वेता भट्टाचार्य author

श्वेता भट्टाचार्य Times Now नवभारत में एंकर और स्पेशल कॉरेस्पोन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं। वह टेलीविजन मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, चुनाव कवरेज और इवेंट कवरेज में विशेष महारत हासिल है। अपनी सटीक और प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जानी जाने वाली श्वेता जमीनी हकीकत को दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाती हैं।

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