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Haryana Elections: नवीन जिंदल की मां ने भर दिया नामांकन, हिसार सीट से निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव

Hisar Elections: हरियाणा विधानसभा चुनाव में नया मोड़ आ गया है। भाजपा सांसद नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल ने हिसार विधानसभा सीट से निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है। उन्होंने कहा है कि हिसार के लोग मेरा परिवार हैं और ओम प्रकाश जिंदल ने इस परिवार से मेरा रिश्ता जोड़ा था।

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हिसार सीट से नामांकन दाखिल करते हुए सावित्री जिंदल।

Photo : Twitter

Haryana Chunav: कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल ने बृहस्पतिवार को हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए हिसार सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया। सावित्री जिंदल हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रही थीं। जाने-माने उद्योगपति दिवंगत ओ.पी. जिंदल की पत्नी सावित्री (74) ने आज नामांकन की आखिरी तारीख पर पर्चा दाखिल किया। वह हरियाणा के मंत्री और हिसार से मौजूदा विधायक कमल गुप्ता के खिलाफ मैदान में उतरीं हैं।

चुनाव लड़ेंगी देश की सबसे अमीर महिला

‘फोर्ब्स इंडिया’ ने सावित्री जिंदल को इस साल देश की सबसे अमीर महिला बताया है, जिनकी कुल संपत्ति 29.1 अरब डॉलर है। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के लिए पांच अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे आठ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

चुनाव लड़ने को लेकर क्या बोलीं सावित्री जिंदल?

नामांकन दाखिल करने के बाद सावित्री जिंदल ने कहा, 'मैंने हिसार के विकास और बदलाव के लिए सेवा करने का संकल्प लिया है। हिसार के लोग मेरा परिवार हैं और ओम प्रकाश जिंदल ने इस परिवार से मेरा रिश्ता जोड़ा था।' उन्होंने कहा, 'जिंदल परिवार ने हमेशा हिसार की सेवा की है। मैं लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने और उनका भरोसा बनाए रखने के लिए पूरी तरह समर्पित हूं।'

क्या भाजपा से बगावत कर रही हैं सावित्री?

भाजपा द्वारा हिसार विधानसभा क्षेत्र से कमल गुप्ता को मैदान में उतारे जाने पर सावित्री जिंदल से पत्रकारों ने पूछा था कि क्या सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ना बगावत नहीं होगी। इस पर, उन्होंने कहा था, 'ऐसा नहीं माना जाएगा। मैंने लोकसभा चुनाव में सिर्फ अपने बेटे (नवीन जिंदल) के लिए प्रचार किया था। मैंने (भाजपा की) कोई सदस्यता नहीं ली है।'

सावित्री जिंदल दो बार हिसार सीट से विधायक चुनी गईं। उन्होंने 2005 में कांग्रेस विधायक के तौर पर पहली बार हरियाणा विधानसभा में हिसार का प्रतिनिधित्व किया था। 2009 में वह फिर से इसी सीट से चुनी गईं और 2013 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में मंत्री बनाई गईं। बेटे नवीन जिंदल के कांग्रेस छोड़ने के बाद इस साल मार्च में उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी थी। नवीन बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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