Gujarat Election 2022: गुजरात विधान सभा चुनाव के पहले चरण की 89 सीटों पर वोटिंग हो गई है। ये वो इलाके हैं जहां 2017 के विधानसभा चुनावों में पाटीदार आंदोलन का असर था। सौराष्ट्र-कच्छ में कुल 54 सीटें हैं। जबकि बाकी 35 सीटें दक्षिण गुजरात की हैं। पहले चरण के चुनाव में राजकोट, द्वारका, सोमनाथ, मोरबी, पोरबंदर, जूनागढ़, अमरेली, नर्मदा, भरूच आदि प्रमुख जिलों की सीटें शामिल हैं। 19 जिलों में होने वाली वोटिंग में भाजपा के लिए सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्र सबसे बड़े चुनौती हैं। क्योंकि पिछली बार 2017 में भी भाजपा को इन इलाकों में कांग्रेस से कांटे की टक्कर मिली थी। और इस चरण की खासियत ऐसी रही है कि हर बड़ी जनता सरकार की दिशा तय कर देती है।
पहले क्या रहा रिकॉर्ड
2017 में पार्टियों का हाल देखा जाय तो यहां 68 फीसदी वोटिंग हुई थी। और भाजपा को 89 सीटों में से 48 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस को 39 सीटों पर जीत मिली थी। पिछली बार सौराष्ट्र-कच्छ में कांग्रेस भाजपा पर भारी पड़ गई थी। इस दौरान 65 में से 28 पर जीत मिली थी, जबकि बीजेपी को 20 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। इसका असर यह हुआ कि भाजपा के लिए बहुमत की राह मुश्किल हो गई थी। पिछले चुनाव में भाजपा को बची 93 सीटों में 51 पर जीत हासिल हुई थी। और 2002 में सत्ता में आने के बाद भाजपा के लिए पहली बार हुआ था कि उसे 100 सीटों से कम सीट मिली थीं। उस वक्त भाजपा को 99 सीटें मिली थीं।
इसीलिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का इस बार इस इलाके में सबसे ज्यादा जोर है। और यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद गुजरात में डेरा डाले हुए हैं। और भाजपा का पूरी कोशिश है कि पहले चरण में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल की जाएं। भाजपा के लिए पहले चरण में दक्षिण गुजरात की वोटिंग बेहद अहम है। पिछली बार उसे 35 सीटों में से 27 पर भाजपा ने जीत मिली थी।
पहले चरण की वीआईपी सीटें
पहले चरण में पूर्व मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी,आप के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार इसुदान गढ़वी, क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा, मोरबी हादसे में नायक बन उभरे कांतिलाल अमृतिया प्रमुख उम्मीदवार हैं। इन वीआईपी उम्मीदवारों पर सबकी नजरें रहेंगी। इसके अलावा द्वारका, गिर सोमनाथ, अमरेली, नर्मदा, डांग आदि जिलों में भाजपा के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है।
त्रिकोणीय मुकाबले का कितना असर
पहले चरण में भाजपा और कांग्रेस के 89-89 और आप के 88 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने पहले चरण में 57, भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) ने 14 सीटों पर उम्मीदवारों उतारे हैं। समाजवादी पार्टी, माकपा के भी उम्मीदवार मैदान में हैं। लेकिन मेन लड़ाई भाजपा, कांग्रेस और आप में हैं। भाजपा ने जहां नरेंद्र मोदी और विकास को मुद्दा बनाया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने दिल्ली मॉडल से लुभाने की कोशिश की है। हालांकि आखिर दौर में गुजरात दंगे, बाटला हाउस और आतंकवाद जैसे मुद्दे वोटरों को लुभाने का हथियार बने। अब देखना है कि गुजरात की जनता किस पर भरोसा करती है।
