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गोरखपुर लोकसभा चुनाव: भोजपुरी सिनेमा के दो दिग्गजों की लड़ाई, दांव पर CM योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा

Gorakhpur Lok Sabha Election: गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में कुल 20,97,202 मतदाता हैं जिनमें 11,23,868 पुरुष, 9,73,160 महिला और तृतीय लिंग के 174 मतदाता हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब चार लाख निषाद मतदाता हैं, इसलिए सभी पार्टियों की नजर इस बड़े वोटबैंक पर रहती है। पिछले कई चुनावों से विपक्षी दलों ने निषाद समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों को ही उम्‍मीदवार के रूप में आगे किया है।

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गोरखुपर लोकसभा चुनाव

Gorakhpur Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। कल सातवें और आखिरी चरण में मतदान हैं। हालांकि, सभी की नरजें सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर पर रहने वाली हैं। इस चर्चित सीट पर इस बार भोजपुरी के दो दिग्गज कलाकारों के बीच सियासी लड़ाई है। टीवी धारावाहिक लापतागंज से मशहूर हुईं इंडिया गठबंधन की उम्मीदवार काजल निषाद और लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं भाजपा उम्मीदवार रवि किशन की मौजूदगी ने चुनाव प्रचार अभियान को रोमांचक बना दिया है। काजल निषाद और रवि किशन समेत यहां कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि, कड़ा मुकाबला काजल निषाद और रवि किशन के बीच ही माना जा रहा है।

लोकसभा चुनाव के अंतिम एवं सातवें चरण में एक जून को होने वाले मतदान की उलटी गिनती शुरू होने के साथ ही गोरखपुर में सत्‍ता पक्ष तथा विपक्ष ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वे जातीय समीकरण सहित हर पहलू पर ध्यान दे रहे हैं। रवि किशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं काजल निषाद मंचों से रवि किशन को फिल्‍मी शैली में ही ललकारती नजर आती हैं।

पांच बार लगातार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर लोकसभा सीट से मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ 1998 से 2014 तक लगातार पांच बार सांसद रहे। 2017 में उनके मुख्‍यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रवीण निषाद को उतारकर यहां कब्‍जा जमा लिया। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रवि किशन को चुनाव में प्रत्याशी बनाकर अपनी प्रतिष्‍ठा वाली सीट को पुन: जीत लिया था। यहां दो उप-चुनावों 1970 और 2018 समेत कुल 19 बार हुए लोकसभा चुनाव में गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों ने 10 बार चुनाव जीता जिसमें पांच बार योगी आदित्‍यनाथ, चार बार उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और एक बार उनके पितामह गुरु महंत दिग्विजय नाथ ने चुनाव जीता।

जातीय समीकरण पर जोर

गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में कुल 20,97,202 मतदाता हैं जिनमें 11,23,868 पुरुष, 9,73,160 महिला और तृतीय लिंग के 174 मतदाता हैं। गोरखपुर में पिछले कई आम चुनावों से विपक्षी दलों ने निषाद समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों को ही उम्‍मीदवार के रूप में आगे किया है। 2018 के उपचुनाव में निषाद पार्टी के अध्‍यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद सपा के चिह्न पर यहां से चुनाव जीत गए थे, लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब चार लाख निषाद मतदाता हैं और निषादों का वोट हासिल करने के लिए भाजपा ने अपने सहयोगी दल ‘निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल’ (निषाद) के अध्‍यक्ष एवं उप्र सरकार के मंत्री संजय निषाद को आगे करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश की है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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