Sharjeel Imam Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में शरजील इमाम भी किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं। शरजील इमाम ने इसके लिए बकायदा कोर्ट पहुंचकर 14 दिन की जमानत मांगी है। शरजील इमाम ने कहा है कि वो बिहार चुनाव में निर्दलीय लड़ना चाहते हैं, इसलिए 14 दिन की जमानत दी जाए। शरजील इमाम, दिल्ली दंगे के आरोपी हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में इस संबंध में याचिका दायर की है।
बिहार में कहां से चुनाव लड़ेंगे शरजील इमाम
याचिका में कहा गया है कि शरजील इमाम बिहार की बहादुरगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस संबंध में उन्होंने अदालत से 14 दिनों की अंतरिम जमानत देने की अपील की है ताकि वह अपने चुनाव प्रचार और नामांकन प्रक्रिया में भाग ले सकें। इमाम ने कोर्ट को यह भी बताया कि वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं।शरजील की याचिका पर कब होगी सुनवाई
शरजील इमाम की इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या उन्हें चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए अस्थायी राहत दी जा सकती है या नहीं।
शरजील की जमानत याचिका क्यों हुई थी खारिज
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को इमाम, खालिद और मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, अतर खान, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान, शादाब अहमद और खालिद सैफी समेत 7 अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उमर खालिद और शरजील इमाम की गंभीर संलिप्तता प्रतीत होती है। कोर्ट ने उन पर लगाए गए आरोपों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने जो भाषण दिए, वे सांप्रदायिक प्रकृति के थे और उनका मकसद बड़ी भीड़ इकट्ठा करना था।
कब हुआ था दिल्ली दंगा
उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में भड़के 2020 के दिल्ली दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि यह हिंसा एक पूर्व-नियोजित साजिश थी, जिसे सीएए के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शन के दौरान अंजाम दिया गया था।
शरजील इमाम पर क्या है आरोप
इस मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम को 28 जनवरी, 2020 को बिहार के जहानाबाद से जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह तब से हिरासत में है और बाद में दंगों में उसकी कथित भूमिका के लिए यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।
