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'जब केंद्र का पैसा लग रहा है तो...' AMU के अल्पसंख्यक आरक्षण पर सीएम योगी का बड़ा बयान

CM Yogi Adityanath on Aligarh Muslim University: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, केंद्र सरकार के पैसे से चलने वाला एएमयू 50 फीसदी मुसलमानों को आरक्षण देता है, लेकिन एससी-एसटी, ओबीसी व अन्य जातियों को वहां आरक्षण नहीं मिलता है। ये बातें सीएम योगी ने अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट पर चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहीं।

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सीएम योगी आदित्यनाथ।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

CM Yogi Adityanath on Aligarh Muslim University: उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक आरक्षण पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, जब केंद्र का पैसा एएमयू में लगा है तो वहां भी एससी, एसटी व अन्य को नौकरी व शिक्षा में आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केंद्र के पैसे से चलती है, लेकिन वंचितों-पिछड़ों को आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। ये बातें सीएम योगी ने अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट पर चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहीं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, केंद्र सरकार के पैसे से चलने वाला एएमयू 50 फीसदी मुसलमानों को आरक्षण देता है, लेकिन एससी-एसटी, ओबीसी व अन्य जातियों को वहां आरक्षण नहीं मिलता है। मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण की सुविधा एससी-एसटी समुदाय को मिलती है, लेकिन एएमयू में ऐसा नहीं किया जाता है।

कांग्रेस-सपा जैसी पार्टियां राष्ट्रीय एकता के साथ कर रहीं समझौता

सीएम योगी ने कहा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा अपने वोट बैंक को बचाने के लिए आपकी भावना के साथ, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के साथ समझौता कर रहे हैं। उन्होंने कहा, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्था के रूप में स्थापित करना चाहिए या सामान्य संस्था के रूप में रहना चाहिए? इस पर कल माननीय सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही थी। भारत के संसाधनों से पलने और जनता के टैक्स से चलने वाला ऐसा संस्थान, जो पिछड़ी, अनुसूचित जाति या जनजाति के लोगों को आरक्षण नहीं देता है, लेकिन मुसलमानों के लिए स्वयं के माध्यम से 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने कहा, भारत का संविधान मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों को आरक्षण प्रदान किया गया है।

बंटेंगे तो कटेंगे- सीएम योगी

योगी आदित्यनाथ ने कहा, अयोध्या में रामजी का वनवास हमने देखा, मथुरा का मामला हमारे सामने है। हमारी मां-बहनों के साथ क्या कुछ नहीं हुआ, अगर इन सबके बावजूद हम आंखों पर पट्टी बांधकर जाति में बंटे हुए हैं, तो कटने के सिवाय कोई दूसरी नीति नहीं हो सकती। मैं कहता हूं, बंटो मत, ये बांटने वाले आपके दुश्मन हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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