Bengal Elections: टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे एक कड़े पत्र में भाजपा पर फॉर्म 6 आवेदनों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के बाहर के मतदाताओं को अवैध रूप से मतदाता सूची में बड़ी संख्या में शामिल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे भाजपा द्वारा भारतीय चुनाव आयोग के साथ मिलकर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का एक और सुनियोजित प्रयास बताया।
टीएमसी का आरोप- बीजेपी ने 30000 फॉर्म 6 जमा किए
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह पत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा सोमवार को लगाए गए उस आरोप के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर लिखा, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा ने एक ही दिन में लगभग 30,000 फॉर्म 6 जमा किए हैं ताकि अन्य राज्यों के निवासियों को पश्चिम बंगाल का मतदाता बनाया जा सके। ममता ने ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में कहा, इस बात को लेकर गंभीर चिंताएं हैं कि ये आवेदन उन व्यक्तियों से संबंधित हो सकते हैं जो बंगाल के वास्तविक निवासी नहीं हैं और जिनका राज्य से कोई वैध संबंध नहीं है। खबरों के अनुसार, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में चुनावों से पहले भी इसी तरह के मामले सामने आए थे।
ममता ने उठाया सवाल
उन्होंने आगे कहा, अगर ये बातें सच हैं, तो ये अवैध, असंवैधानिक और मौलिक रूप से अलोकतांत्रिक होंगी, जो दुर्भावनापूर्ण इरादे और कुटिल मंशा को दर्शाती हैं। संवैधानिक प्राधिकरण से ऐसी अपेक्षा नहीं की जाती है। जनता को पारदर्शिता और अपने मतदान अधिकारों की सुरक्षा का अधिकार है। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें उचित आशंकाएं हैं कि चुनाव आयोग संबंधित बूथों और सभी राजनीतिक दलों को उचित सूचना दिए बिना ही लगभग 30,000 आवेदनों को मंजूरी दे देगा।
सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी के उस आदेश का हवाला देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी द्वारा फॉर्म 6 आवेदनों पर लिया गया निर्णय पूरी तरह से अवैध और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के दायरे से बाहर था। इसमें कहा गया था कि अंतिम मतदाता सूची में नामों को शामिल करने या हटाने के संबंध में दावों और आपत्तियों की जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
